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बैंकों पर आर्गेनाइज्ड गैंगों का कब्जा, पब्लिक पाई- पाई को तरसी
ब्यूराे/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Wed, 16 Nov 2016 02:02 AM IST
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बैंकों पर गैंगों का कब्जा
- फोटो : अमर उजाला
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काले धन को सफेद करने के लिए बाकायदा आर्गेनाइज्ड गैंग काम कर रहे हैं। सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही ये गैंग मजदूरों को करेंसी एक्सचेंज के लिए बैंकाें की कतारों में लगा देते हैं। ब्लैक मनी को व्हाइट करने के जतन में लगे फैक्ट्री - कारखाना मालिक यह पैंतरा आजमा रहे हैं। यही वजह है कि जब तक आम आदमी करेंसी एक्सचेंज करने बैंक पहुंचता है तब तक लाइन इतनी लंबी हो चुकी होती है कि नंबर शाम तक नहीं आता। इसकी वजह से पब्लिक में आक्रोश पनप रहा है और आईबी ने भी इस बाबत सरकार को रिपोर्ट भेज दी है।
500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के दो दिन बाद से ही बैंक लगातार कैश एक्सचेंज कर रहे हैं। लेकिन बैंकों के बाहर लग रही कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बल्कि हर रोज लाइनें लंबी होती जा रही हैं। करेंसी एक्सचेंज के लिए रकम को खाते में डालने की जरूरत नहीं होती है लिहाजा ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए फैक्ट्री - कारखाना मालिकों, ज्वैलर्स और व्यापारियों ने यह रास्ता ईजाद किया है। अपनी फैक्ट्रियों में काम करने वाली लेबर को चार - चार हजार रुपये लेकर ये सुबह से ही बैंकों की कतारों में लगा देते हैं। बदले में इन्हें इनका पूरे दिन का मेहनताना मिलता है। एक - एक मजदूर और कर्मचारी एक - एक दिन में तीन - तीन बार लाइन में लगकर अपने मालिकों की करेंसी एक्सचेंज कर रहा है। हालांकि अब सरकार ने उंगली पर स्याही लगाने का फरमान दे दिया है।
लेकिन इसके बावजूद मंगलवार को बैंकों पर इन्हीं गैंगों का कब्जा रहा। फैक्ट्री - कारखाना मालिकों के साथ ही बैक डेट में फ्लैट बेच रहे बिल्डर और बाजार में नई करेंसी और सौ के नोटों को ब्लैक करने वाले गैंग भी इसी फंडे पर काम कर रहे हैं। बैकों से नए नोट लेकर बाजार में 20 से 30 फीसदी कमीशन पर ये गैंग पुराने नोटों को एक्सचेंज कर रहे हैं।
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बैंकों की कतारों में इन गैंगों के कब्जे की वजह से ही आम आदमी अपनी जरूरत के लिए भी करेंसी एक्सचेंज नहीं कर पा रहा है। बैंकों से लेकर एटीएम तक यही गैंग काबिज हैं। बैंक की लाइनों में हर रोज वही चेहरे नजर आ रहे हैं। वक्त बीतने के साथ बैंकों के दरवाजों पर लगी ये कतारें कम होनी चाहिए लेकिन उल्टा ये और भी लंबी होती जा रही हैं। खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में अलर्ट किया है कि इसे लेकर पब्लिक में गुस्सा है जो कभी भी फट सकता है।
एसपी सिटी अभिषेक यादव ने बताया कि बैंक की सुरक्षा के लिए पुलिस लगा दी गई है। इनके अलावा सीओ और थानेदार व चौकी इंचार्जों से कहा गया है कि अपने अपने क्षेत्रों में भ्रमण पर रहे और किसी बैंक व एटीएम से किसी तरह की सूचना आए तो उसे गंभीरता से चेक करें।
ऐसे तो कभी खत्म नहीं होंगी कतारें
मुरादाबाद। आम आदमी यह सोचकर बैठा है कि जल्द बैंकों के बाहर लगी लाइनें खत्म हो जाएंगी और वह आराम से अपनी रकम बैंक में जमा कर सकेगा और नई करेंसी ले सकेगा। लेकिन बैंकों के बाहर जिस तरह से हर रोज फैक्ट्री मालिकों की लेबर और बैक डेट में फ्लैट्स बेच रहे बिल्डरों व दोगुने दामों पर सोना बेच रहे ज्वैलर्स के कारिंदे सुबह होते ही आ डटते हैं उससे नहीं लगता कि 30 दिसंबर तक भी ये लाइनें कम होंगी। यही हाल रहा तो ब्लैक मनी वालों की ब्लैक मनी एक्सचेंज होने तक बैंकों के बाहर लाइनें जस की तस बनी रहेंगी और हर रोज वही चेहरे लाइनों में दिखते रहेंगे। पूरा दिन लाइन में रहने के बावजूद रकम एक्सचेंज करने में नाकाम रहे लाइनपार निवासी सूर्य प्रकाश और दीवान का बाजार निवासी शशिकांत कहते हैं कि प्रशासन को चाहिए कि ऐसे गैंगों व फैक्ट्री मालिकों और ज्वैलर्स को ट्रेस करके उनके खिलाफ कार्रवाई करे।
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500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के दो दिन बाद से ही बैंक लगातार कैश एक्सचेंज कर रहे हैं। लेकिन बैंकों के बाहर लग रही कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बल्कि हर रोज लाइनें लंबी होती जा रही हैं। करेंसी एक्सचेंज के लिए रकम को खाते में डालने की जरूरत नहीं होती है लिहाजा ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए फैक्ट्री - कारखाना मालिकों, ज्वैलर्स और व्यापारियों ने यह रास्ता ईजाद किया है। अपनी फैक्ट्रियों में काम करने वाली लेबर को चार - चार हजार रुपये लेकर ये सुबह से ही बैंकों की कतारों में लगा देते हैं। बदले में इन्हें इनका पूरे दिन का मेहनताना मिलता है। एक - एक मजदूर और कर्मचारी एक - एक दिन में तीन - तीन बार लाइन में लगकर अपने मालिकों की करेंसी एक्सचेंज कर रहा है। हालांकि अब सरकार ने उंगली पर स्याही लगाने का फरमान दे दिया है।
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लेकिन इसके बावजूद मंगलवार को बैंकों पर इन्हीं गैंगों का कब्जा रहा। फैक्ट्री - कारखाना मालिकों के साथ ही बैक डेट में फ्लैट बेच रहे बिल्डर और बाजार में नई करेंसी और सौ के नोटों को ब्लैक करने वाले गैंग भी इसी फंडे पर काम कर रहे हैं। बैकों से नए नोट लेकर बाजार में 20 से 30 फीसदी कमीशन पर ये गैंग पुराने नोटों को एक्सचेंज कर रहे हैं।
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बैंकों की कतारों में इन गैंगों के कब्जे की वजह से ही आम आदमी अपनी जरूरत के लिए भी करेंसी एक्सचेंज नहीं कर पा रहा है। बैंकों से लेकर एटीएम तक यही गैंग काबिज हैं। बैंक की लाइनों में हर रोज वही चेहरे नजर आ रहे हैं। वक्त बीतने के साथ बैंकों के दरवाजों पर लगी ये कतारें कम होनी चाहिए लेकिन उल्टा ये और भी लंबी होती जा रही हैं। खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में अलर्ट किया है कि इसे लेकर पब्लिक में गुस्सा है जो कभी भी फट सकता है।
एसपी सिटी अभिषेक यादव ने बताया कि बैंक की सुरक्षा के लिए पुलिस लगा दी गई है। इनके अलावा सीओ और थानेदार व चौकी इंचार्जों से कहा गया है कि अपने अपने क्षेत्रों में भ्रमण पर रहे और किसी बैंक व एटीएम से किसी तरह की सूचना आए तो उसे गंभीरता से चेक करें।
ऐसे तो कभी खत्म नहीं होंगी कतारें
मुरादाबाद। आम आदमी यह सोचकर बैठा है कि जल्द बैंकों के बाहर लगी लाइनें खत्म हो जाएंगी और वह आराम से अपनी रकम बैंक में जमा कर सकेगा और नई करेंसी ले सकेगा। लेकिन बैंकों के बाहर जिस तरह से हर रोज फैक्ट्री मालिकों की लेबर और बैक डेट में फ्लैट्स बेच रहे बिल्डरों व दोगुने दामों पर सोना बेच रहे ज्वैलर्स के कारिंदे सुबह होते ही आ डटते हैं उससे नहीं लगता कि 30 दिसंबर तक भी ये लाइनें कम होंगी। यही हाल रहा तो ब्लैक मनी वालों की ब्लैक मनी एक्सचेंज होने तक बैंकों के बाहर लाइनें जस की तस बनी रहेंगी और हर रोज वही चेहरे लाइनों में दिखते रहेंगे। पूरा दिन लाइन में रहने के बावजूद रकम एक्सचेंज करने में नाकाम रहे लाइनपार निवासी सूर्य प्रकाश और दीवान का बाजार निवासी शशिकांत कहते हैं कि प्रशासन को चाहिए कि ऐसे गैंगों व फैक्ट्री मालिकों और ज्वैलर्स को ट्रेस करके उनके खिलाफ कार्रवाई करे।