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Moradabad News: फेफड़ों का विकास रोक रहा प्रदूषण, सीओपीडी का खतरा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2024 03:59 AM IST
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Pollution stopping the development of lungs, danger of COPD
मुरादाबाद। हर साल खराब होता प्रदूषण का ग्राफ बच्चों के फेफड़ों को प्रभावित कर रहा है। डॉक्टरों ने चिंता जताई है कि आने वाले वर्षों में यही स्थिति रही तो फेफड़ों का विकास रुक सकता है। इससे सीओपीडी, अस्थमा का खतरा कई गुना तक बढ़ जाएगा। वर्तमान में ठंड व प्रदूषण के कारण जिला अस्पताल से लेकर निजी चिकित्सकों की चेस्ट ओपीडी में 80 प्रतिशत मरीज सीओपीडी व अस्थमा की समस्या लेकर आ रहे हैं।
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हर दिन औसतन चार मरीज भर्ती हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह धुंध बच्चों के लिए सिगरेट के धुएं से भी ज्यादा खतरनाक है। इससे फेफड़ों में सिकुड़न आ रही हैं व सांस की नलियां भी सिकुड़ रही हैं। इसे ही सीओपीडी कहा जाता है। वहीं अस्थमा के मामले में सांस की नलियों में सूजन आ जाती है, इससे श्वसन मार्ग संकुचित हो रहा है। बलगम न निकलने के कारण बच्चों के मुंह से घर्र-घर्र की आवाज आ रही है। इसे ब्रोंकाइटिस कहते हैं। स्थिति यह है कि बच्चों को इनहेलर इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। इस समय बच्चों से लेकर बड़े तक इस समस्या से जूझ रहे हैं। डॉक्टर लगातार भाप लेने की सलाह दे रहे हैं।
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कामगारों को सीओपीडी का खतरा ज्यादा
पीतल कारखानों, कैंची कारखानों व पॉलिश का काम करने वाले लोगों को सांस संंबंधी रोग होने का खतरा ज्यादा है। डॉक्टरों का कहना है कि सीओपीडी एक दिन में होने वाली बीमारी नहीं है। यह कम से कम पांच साल लेती है। कारखानों में पॉलिश आदि काम करने वाले कर्मचारियों के सीने में धूल धीरे-धीरे जमा होती रहती है। इससे उन्हें सीओपीडी हो जाती है। यदि लगातार प्रदूषण की यह स्थिति रही तो बच्चों के फेफड़े विकसित नहीं हो पाएंगे। जानकारों का मानना है शहर में करूला, असालतपुरा आदि क्षेत्रों में ई-कचरा जलने के कारण यहां की आबादी को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
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इन बातों का रखें ध्यान
- ठंड में अनावश्यक बाहर निकलने से परहेज करें
- घरों में अच्छे पौधे लगाने से हवा साफ रहेगी
- मास्क लगाकर ही बाहर निकलें
- घर का बना खाना ही खाएं
- पार्टियों में आइसक्रीम, दही का सेवन न करें
- डाइट में अंडा शामिल करें
- गुड़ के साथ गर्म दूध पीएं

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सांस की समस्या में कई बार अनुवांशिक कारण होते हैं। धूल, धुएं व धुंध से सांस लेने में कठिनाई हो रही है तो शुरुआत में ही डॉक्टर को दिखाएं। नजरअंदाज करने से फेफड़ों को नुकसान हो सकता है। बच्चों से बुजुर्गों तक सबको सावधान रहने की जरूरत है।
- डॉ. अमोल चंद्रा, पल्मोनोलॉजिस्ट
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