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डिप्रेशन में वर्दीधारी, एग्रेसिव होकर साथियों पर कर रहे हमले

Wed, 24 Aug 2016 12:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Wed, 24 Aug 2016 12:02 PM IST
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 policemen are in Depression, aggressive and attack colleagues
स्वास्थ्य - फोटो : demo
बुलंदशहर की घटना ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। पुलिस वालों को छुट्टी न मिलने और उनसे अधिक कार्य कराना केवल इकलौता बुलंदशहर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के सभी जिलोें का ऐसा ही हाल है। कभी त्योहार तो कभी चुनाव। कभी बड़ी वारदात तो वीआईपी मुवेंट। इन्हीं में उलझ कर रह जातीं हैं पुलिस वालों की छुट्टियां। घर परिवार से दूर होने के कारण पुलिस वाले तनाव में आ रहे हैं।
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मुरादाबाद में भी तमाम ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। जब वर्दीधारियों ने अपने ही सीनियर पर हाथ उठाने में भी गुरेज नहीं किया। साथियों पर फायरिंग करने और अधिक काम के बोझ में दबे पुलिस वालों ने आत्मघाती कदम तक उठाए हैं। जिस अनुशासन के बदौलत पुलिस महकमा टिका हुआ है। अब खुद वर्दीधारी ही उस अनुशासन को तार तार कर रहे हैं। पुलिस वालों में सहनशीलता खत्म होती जा रही है। अब सिपाही अन मर्जी के थानों में पोस्टिंग चाहते हैं। कभी अपने सीनियर के सामने जुबां न खोल वाले अधीनस्थ अब जबाव देने और बदतमीजी करने से भी पीछे नहीं कर रहे हैं।  
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एके-47 की ताबड़तोड़ गोलियों से दहल गया था सिविल लाइंस
मुरादाबाद। तीन साल पहले सिविल लाइंस सीओ के गनर रजनीश बालियान ने चालक पर एके-47 से ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। चालक और गनर तत्कालीन सीओ अलका सिंह को दफ्तर में छोड़कर पुलिस लाइन स्थित अपने आवास पर खाना खाने चले गए थे। इसी बीच सीओ का फोन चालक के पास पहुंचा और उन्होंने तुरंत आने को कहा। लेकिन गनर रजनीश बालियान ने अपने कमरे से निकले में देर कर दी थी। इसी बीच चालक उसे पुलिस लाइन में ही छोड़ आया था। चालक सीओ को उनके आवास पर छोड़कर वापस पुलिस लाइन जा रहा था। पुलिस लाइन  मंदिर के पास रजनीश ने चालक को घेर लिया। उसने उसे धमकाया और गोली मारने की धमकी दी। चालक किसी ने वहां से गाड़ी लेकर भागने लगा था। जिस पर गनर ने एके 47 से गोलियां बरसा दी थीं। चालक उस घटना में किसी तरह बच गया था। अधिकारियों के आदेश पर केस दर्ज कर गनर को जेल भेज दिया था।
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 बाजार में सिपाही ने इंस्पेक्टर को जड़ दिए थे थप्पड़
मुरादाबाद। करीब चार साल पहले कोतवाली में तैनात रहा सिपाही मनोज कुमार बाजार में शराब के नशे में हंगामा कर रहा था। सूचना मिलने पर तत्कालीन कोतवाल रईसपाल अपने हमराह के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने सिपाही को शांत होने को कहा। इसके बाद सिपाही भड़क गया था और उसने कोतवाल को बीच बाजार ही थप्पड़ जड़ दिए थे। इसके बाद सिपाही को हमराहों ने पकड़ कर उसका मेडिकल परीक्षण कराया था। जिसमें शराब की पुष्टि हुई थी। तत्कालीन एसएसपी ने सिपाही को निलंबित कर दिय था। 

दरोगा को सिपाही ने डंडो से पीटा
मुरादाबाद। मैनाठेर की डींगरपुर पुलिस  चौकी में तैनात रहे सिपाही  अपने प्रभारी को बिना बताए ही गायब हो गया था। दरोगा ने सिपाही का जीडी में तस्करा डाल दिया था। सिपाही वापस लौटा और उसे इस मामले की जानकारी हुई तो वह दरोगा पर भड़क गया था। उसने दरोगा को डंडे से पीटा था। जिसमें दरोगा को काफी चोट आई थी। आरोपी सिपाही के खिलाफ केस दर्ज उसका चालान कर दिया था। 

खनन की अवैध वसूली की रकम को लेकर दरोगा से भिड़ गया था सिपाही
मुरादाबाद। भोजपुर थाने में खनन की अवैध वसूली की रकम को लेकर सिपाही ने दरोगा के साथ मारपीट कर दी थी। दरोगा के हल्के से सिपाही खनन माफियाओं से रकम ले आया था। दरोगा ने जब उससे पूछताछ की तो वह भड़क गया और उसने थाने में ही दरोगा के साथ मारपीट कर दी थी। 

खान पीन भी डिप्रेशन की बड़ी वजह
मुरादाबाद। सिपाहियों के खान पीन में तेजी से बदलाव हो गया है। जिस कारण सिपाहियों की सहनशीलता खत्म होती जा रही है। जबकि एग्रेसिव हो रहे हैं। वह अपने साथियों पर हमले कर रहे हैं।  

ट्रेनिंग में ही पुलिस की नौकरी से मोह भंग 
मुरादाबाद। मुरादाबाद में इन दिनों पीएसी, पीटीएस, पीटीसी और पुलिस लाइन में रंगरूटों की ट्रेनिंग चल रही है। लेकिन इन पुलिस सेंटरों में पिछले कुछ समय में ही पचास से ज्यादा रंगरूट बीच में ही ट्रेनिंग छोड़कर चले गए हैं। हालांकि इनमें अधिकांश दूसरे नौकरियों में चल गए हैं। जबकि कुछ बीमारी की वजह से चले गए हैं। पिछले दिनों जिले के तमाम पुलिस वाले बिना छुट्टी लिए ही चले गए थे। काफी समय तक उनके वापस आने का इंतजार किया गया। लेकिन उनमें से आधे से ज्यादा अभी गायब हैं। लोग पुलिस वाले वापस आ गए हैं। बीमार और दूसरी वजह से जाने की बात कहते हुए उच्च अधिकारियों को शपथ पत्र दे चुके हैं।  

पुलिस विभाग में संवाद की कमी है। सिपाही से चौबीस घंटे काम तो लिया जा रहा है। लेकिन उच्च अधिकारियाें के यहां सिपाहियों की सुनवाई नहीं हो रही है। छुट्टी नहीं मिल पा रही है। जिस कारण वर्दीधारी तनाव में आ रहे हैं। 

डा. विशेष गुप्ता, समाज शास्त्री 

 - काम का तनाव पुलिसकर्मियों को डिप्रेशन में ला रहा है। डिप्रेशन में आने वाले पुलिसकर्मी जरूरत से ज्यादा उम्मीद लगाए बैठे होते हैं। जब उनकी ये उम्मीद टूटती है तो उन्हें लगता है कि अब सब कुछ खत्म हो गया। ऐसे में पुलिस कर्मी एग्रेसिव डिप्रेशन में चले जाते हैं और हिंसक कदम उठा लेते हैं।  - डा. नीरज गुप्ता, मनोरोग विशेषज्ञ 
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