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तीन फुटबॉल एसोसिएशनों के चक्कर में खिलाड़ी बने फुटबॉल
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मुरादाबाद। जिले के फुटबॉल खिलाड़ियों का भविष्य अनिश्चय से भरा लग रहा है। इसका कारण मुरादाबाद में संचालित तीन फुटबॉल एसोसिएशन हैं। तीनों स्वयं को असली और दूसरी एसोसिएशन को फर्जी बता रही हैं। जबकि इसका चुनाव ऑल इंडिया ओलंपिक एसोसिएशन को करना है, जो अब तक नहीं हो सका है। इन पचड़े में पिछले दो वर्ष से फुटबॉल की कोई बड़ी प्रतियोगिता का आयोजन नहीं हुआ है।
खिलाड़ियों को यह नहीं पता कि किस एसोसिएशन द्वारा आयोजित खेल में प्रतिभाग करने से मिले प्रमाण पत्र का लाभ मिलेगा। तीनों एसोसिएशनों का विवाद बढ़ा तो मामला कोर्ट तक पहुंचा। डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन के नाम से पंजीकृत संस्था के सचिव अनवर एहसान हैं। उनका कहना है कि कोर्ट ने उनकी संस्था को खेल आयोजन कराने के लिए मान्यता और अनुमति दी है।
जबकि जिला फुटबॉल एसोसिएशन के नाम से पंजीकृत संस्था के सचिव मोहम्मद नासिर कमाल का कहना है कि यूपी फुटबॉल संघ ने उन्हें अधिकार दिए हैं। इसके आधार पर वह डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन को नकली बता रहे हैं।
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इसके अलावा डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन के नाम से एक और संस्था जिले में पंजीकृत है। इसके सचिव विशनपाल सिंह हैं। इनका कहना है कि जिला ओलंपिक संघ और यूपी ओलंपिक संघ ने इन्हें मान्यता दी है। साक्ष्य के तौर पर उन्होंने जिला ओलंपिक संघ का लेटर और रजिस्ट्रार द्वारा जारी पत्र भी प्रस्तुत किया।
यह है मामला
क्रीड़ाधिकारी अनिमेष सक्सेना के मुताबिक जिला फुटबॉल एसोसिएशन के सचिव पहले एहसान इलाही थे। कोरोना के प्रकोप के समय उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे अनवर एहसान ने जिलास्तर पर चुनाव आयोजित किया, जिसमें वह सचिव चुने गए। इसके आधार पर कोर्ट ने उन्हें ऑल इंडिया ओलंपिक एसोसिएशन द्वारा चुनाव न होने तक मान्यता दी है।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश ओलंपिक संघ के सचिन शम्सुद्दीन थे। उनके निधन के बाद उनके बेटे मोहम्मद शाहिद ने खुद को सचिव बताया। उत्तर प्रदेश फुटबॉल संघ का चुनाव भी ऑल इंडिया ओलंपिक एसोसिएशन को करना है। इन सबके बीच डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन के नाम से दूसरा पंजीकरण कराने वाले विशनपाल सिंह भी ऑल इंडिया ओलंपिक एसोसिएशन की मान्यता से पहले ही खुद को असली और अन्य दोनों को फर्जी बता रहे हैं।
वर्जन
हमारी संस्था सबसे पुरानी है। मोहम्मद नासिर कमाल और विशनपाल सिंह के पास पुराने पंजीकरण का कोई प्रमाण नहीं है। कोर्ट के आदेशानुसार सिर्फ हमें खेल का आयोजन कराने की अनुमति है।
- अनवर एहसान, सचिव डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन
मेरे पास उत्तर प्रदेश फुटबॉल संघ द्वारा जारी एनओसी है। हमने फर्जी फुटबॉल एसोसिएशन चलाने वालों के खिलाफ मंडलायुक्त से जांच की गुहार लगाई है। जल्द ही सब साफ हो जाएगा।
- मोहम्मद नासिर कमाल, सचिव जिला फुटबॉल एसोसिएशन
जिला ओलंपिक संघ ने हमारी संस्था को खेल आयोजन कराने की मान्यता दी है। अन्य दोनों संस्थाएं फर्जी हैं। मेरे पास अपना पक्ष प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज उपलब्ध हैं।
- विशनपाल सिंह, सचिव डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन
तीनों संस्थाओं के झगड़े में फुटबॉल की कोई जिला या राज्य स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित नहीं हो पा रही है। तीनों अपने अपने दस्तावेजों के अनुसार दावेदारी ठोक रहे हैं। वास्तव में ऑल इंडिया ओलंपिक एसोसिएशन द्वारा चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन असली है। ओलंपिक एसोसिएशन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- अनिमेष सक्सेना, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी
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खिलाड़ियों को यह नहीं पता कि किस एसोसिएशन द्वारा आयोजित खेल में प्रतिभाग करने से मिले प्रमाण पत्र का लाभ मिलेगा। तीनों एसोसिएशनों का विवाद बढ़ा तो मामला कोर्ट तक पहुंचा। डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन के नाम से पंजीकृत संस्था के सचिव अनवर एहसान हैं। उनका कहना है कि कोर्ट ने उनकी संस्था को खेल आयोजन कराने के लिए मान्यता और अनुमति दी है।
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जबकि जिला फुटबॉल एसोसिएशन के नाम से पंजीकृत संस्था के सचिव मोहम्मद नासिर कमाल का कहना है कि यूपी फुटबॉल संघ ने उन्हें अधिकार दिए हैं। इसके आधार पर वह डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन को नकली बता रहे हैं।
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इसके अलावा डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन के नाम से एक और संस्था जिले में पंजीकृत है। इसके सचिव विशनपाल सिंह हैं। इनका कहना है कि जिला ओलंपिक संघ और यूपी ओलंपिक संघ ने इन्हें मान्यता दी है। साक्ष्य के तौर पर उन्होंने जिला ओलंपिक संघ का लेटर और रजिस्ट्रार द्वारा जारी पत्र भी प्रस्तुत किया।
यह है मामला
क्रीड़ाधिकारी अनिमेष सक्सेना के मुताबिक जिला फुटबॉल एसोसिएशन के सचिव पहले एहसान इलाही थे। कोरोना के प्रकोप के समय उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे अनवर एहसान ने जिलास्तर पर चुनाव आयोजित किया, जिसमें वह सचिव चुने गए। इसके आधार पर कोर्ट ने उन्हें ऑल इंडिया ओलंपिक एसोसिएशन द्वारा चुनाव न होने तक मान्यता दी है।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश ओलंपिक संघ के सचिन शम्सुद्दीन थे। उनके निधन के बाद उनके बेटे मोहम्मद शाहिद ने खुद को सचिव बताया। उत्तर प्रदेश फुटबॉल संघ का चुनाव भी ऑल इंडिया ओलंपिक एसोसिएशन को करना है। इन सबके बीच डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन के नाम से दूसरा पंजीकरण कराने वाले विशनपाल सिंह भी ऑल इंडिया ओलंपिक एसोसिएशन की मान्यता से पहले ही खुद को असली और अन्य दोनों को फर्जी बता रहे हैं।
वर्जन
हमारी संस्था सबसे पुरानी है। मोहम्मद नासिर कमाल और विशनपाल सिंह के पास पुराने पंजीकरण का कोई प्रमाण नहीं है। कोर्ट के आदेशानुसार सिर्फ हमें खेल का आयोजन कराने की अनुमति है।
- अनवर एहसान, सचिव डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन
मेरे पास उत्तर प्रदेश फुटबॉल संघ द्वारा जारी एनओसी है। हमने फर्जी फुटबॉल एसोसिएशन चलाने वालों के खिलाफ मंडलायुक्त से जांच की गुहार लगाई है। जल्द ही सब साफ हो जाएगा।
- मोहम्मद नासिर कमाल, सचिव जिला फुटबॉल एसोसिएशन
जिला ओलंपिक संघ ने हमारी संस्था को खेल आयोजन कराने की मान्यता दी है। अन्य दोनों संस्थाएं फर्जी हैं। मेरे पास अपना पक्ष प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज उपलब्ध हैं।
- विशनपाल सिंह, सचिव डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन
तीनों संस्थाओं के झगड़े में फुटबॉल की कोई जिला या राज्य स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित नहीं हो पा रही है। तीनों अपने अपने दस्तावेजों के अनुसार दावेदारी ठोक रहे हैं। वास्तव में ऑल इंडिया ओलंपिक एसोसिएशन द्वारा चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन असली है। ओलंपिक एसोसिएशन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- अनिमेष सक्सेना, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी