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Moradabad News: सपा कार्यालय को खाली कराने के आदेश पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 25 Sep 2025 04:18 AM IST
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Petition filed in High Court on order to vacate SP office
मुरादाबाद। सपा ने चक्कर की मिलक स्थित जिला कार्यालय को खाली कराने के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है। पार्टी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कार्यालय खाली कराने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि वर्ष 1994 से अलॉट हुए इस भवन पर न तो किसी शर्त का उल्लंघन हुआ है और न ही किराया बकाया है। बावजूद इसके अचानक नोटिस जारी कर बेदखली का प्रयास राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है।
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याचिका के अनुसार 13 जुलाई 1994 को उत्तर प्रदेश सरकार ने यह भवन सपा को कार्यालय संचालन के लिए आवंटित किया था। शुरुआत में किराया 250 रुपये प्रति माह तय किया गया जिसे बाद में बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया। तब से लगातार यह भवन पार्टी कार्यालय के तौर पर उपयोग में है और किराया समय-समय पर जमा भी किया गया है।
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डीएम ने 12 सितंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए कहा कि यह आवंटन अब वैध नहीं है। आदेश में उल्लेख किया गया कि भवन का किराया नाममात्र का है जबकि उसकी वास्तविक कीमत लाखों रुपये मासिक आंकी जा रही है। जिला प्रशासन ने भवन खाली कराने के लिए दो हफ्ते की समय सीमा दी है और कहा है कि समय पूरा होने पर जबरन कब्जा लिया जाएगा।
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हालांकि जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने याचिका दाखिल होने की जानकारी से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि अभी पार्टी अपनी प्रक्रिया में जुटी हुई है। सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर ही आगे के कदम उठाए जाएंगे।
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केवल सपा को निशाना बनाना लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई है कि 1994 से अब तक भवन का उपयोग सिर्फ पार्टी कार्यालय के लिए किया गया है। यहां जनता की समस्याएं सुनी जाती हैं और कार्यकर्ताओं की बैठकें होती हैं। भवन का इस्तेमाल पूरी तरह सार्वजनिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। पार्टी का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सुनवाई के आदेश पारित कर दिया। जबकि कानून के अनुसार किसी भी बेदखली से पहले अवसर देना जरूरी है।


याचिका में यह भी कहा गया है कि पूरे देश और उत्तर प्रदेश में सभी दलों को कार्यालय के लिए भवन आवंटित किए गए हैं। ऐसे में केवल सपा को निशाना बनाना लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ है। याचिका में डीएम के आदेश को अवैध, असंवैधानिक और मनमाना बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही 30 जुलाई 2025 को जारी नोटिस को भी चुनौती दी गई है। पार्टी ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि आदेश पर रोक लगाई जाए और प्रशासन को कार्यालय खाली कराने या जबरन कब्जा लेने से रोका जाए।
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