मेजर ध्यानचंद के लिए फिर उमड़ा लोगों का प्यार, भारत रत्न दिलाने के लिए प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हॉकी के मशहूर खिलाड़ी बलवीर सिंह को भारत रत्न दिए जाने की मांग की है। उन्होंने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। बलबीर सिंह को भारत रत्न दिलाने की मांग के साथ हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न सम्मान देने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।
अपने खेल करियर में 1000 और अंतरराष्ट्रीय मैचों में 400 गोल करने वाले दद्दा निर्विवाद रूप से भारत रत्न के हकदार हैं। हॉकी के मैदान में उनकी ड्रिबलिंग इतनी लाजवाब थी कि कई बार तो गेंद उनकी हॉकी स्टिक से चिपकी नजर आती थी। इसीलिए कई दफे उनकी स्टिक की जांच भी की गई।
भारत के इस सपूत ने जर्मनी के तानाशाह हिटलर की धन और पद की पेशकश को लात मार दी थी। मुरादाबाद मंडल के जनप्रतिनिधियों ने दद्दा को एक सुर से भारत रत्न देने की मांग उठाई है। कई ने पत्र लिखे हैं। 29 अगस्त को दद्दा ध्यानचंद की जयंती है। उनकी जयंती पर भारत रत्न के ऐलान से बड़ा तोहफा खेलप्रेमियों के लिए क्या हो सकता है?
उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग करते हुए कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान ने कहा कि मेरे पास खेल विभाग नहीं है। भारत रत्न का चयन ऊपर लेवल पर होता है। फिर भी ध्यानचंद जी को भारत रत्न मिलना चाहिए। सैफई में उनके नाम से स्टेडियम बना है। इस संबंध में मैं लखनऊ और दिल्ली के वरिष्ठ नेताओं से बात करूंगा।
वहीं अमरोहा से सांसद कुंवर दानिश अली ने कहा कि मेजर ध्यानचंद हिंदुस्तान में हॉकी के जन्मदाता हैं। देश में उनसे बड़ा कोई हॉकी खिलाड़ी अब तक नहीं हुआ। खेल कैटेगरी में सबसे पहले उन्हें ही भारत रत्न मिलना चाहिए था। इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। उनका सम्मान होना चाहिए।
मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी, विधायक इकबाल महमूद, असमोली विधायक पिंकी यादव, अमरोहा विधायक महबूब अली समेत अन्य कई लोगों ने एक साथ आवाज बुलंद कर मांग उठाई है।
दद्दा की प्रोफाइल एक नजर में
भारत में हॉकी के जन्म दाता माने जाने वाले मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को उत्तर प्रदेश राज्य के प्रयागराज जिले में हुआ था।
हॉकी के मौदान में बॉल को अपनी स्टिक के इशारों पर नचाने वाले ध्यानचंद को 'हॉकी जादूगर' के नाम से जाना जाता था। अपने खेल करियर में उन्होंने 400 अंतर्राष्ट्रीय गोल समेत कुल 1000 गोल अपने नाम किए थे।
अपनी प्रतिभा के बल पर वे हॉकी टीम के ऐसे सदस्य बने जिन्होंने ओलंपिक खेलों में तीन बार स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। 1956 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया। खेल जगत में लंबी पारी के बाद मेजर ध्यानचंद 3 दिसंबर 1979 को दुनिया छोड़ कर चले गए और हॉकी जगत में हमेशा के लिए अमर हो गए।