{"_id":"674b745447ff3b6e84075c06","slug":"parents-create-pressure-for-admission-by-manipulating-papers-moradabad-news-c-15-1-mbd1042-533944-2024-12-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: कागजों में हेराफेरी कर दाखिले का दबाव बनाते हैं अभिभावक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: कागजों में हेराफेरी कर दाखिले का दबाव बनाते हैं अभिभावक
विज्ञापन
मुरादाबाद। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को समान शिक्षा देने के लिए शुरू की गई आरटीई योजना का संपन्न लोग भी अनुचित लाभ उठाने लगे हैं। शहर के स्कूलों के प्रधानाचार्यों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे संपन्न लोग भी आरटीई के तहत अपने बच्चों का दाखिला कराने के लिए आवेदन करते हैं। कई बार इन्हें सीटें आवंटित भी कर दी जाती हैं। स्कूलों द्वारा कराए गए सत्यापन में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग ने इस सत्र में 3915 विद्यार्थियों का आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला करवाया। इसके अलावा बच्चों का दाखिला करने से मना करने या आनाकानी करने पर विभिन्न विद्यालयों को 78 नोटिस भी जारी किए। इस मामले में मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल के महासचिव नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि आरटीई के अधिनियम की धारा 15-ए के अनुसार जो बच्चा पहले से ही किसी विद्यालय में पढ़ रहा है, उसका प्रवेश आरटीई के तहत नहीं हो सकता है।
लाभार्थी के परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए। लोग आरटीई में प्रवेश के लिए अपनी आय मात्र चार हजार रुपये प्रतिमाह का आय प्रमाणपत्र बनवा रहे है, जो आज के समय में संभव ही नहीं है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -
जिस स्कूल में बच्चा पढ़ रहा है, उसी स्कूल में दोबारा उम्र कम करके आरटीई के माध्यम से दाखिला लेने के मामले भी सामने आ रहे हैं। आर्थिक रूप से संपन्न और सरकारी नौकरी वाले व्यक्ति भी बच्चों को आरटीई के माध्यम से दाखिला करवाने के लिए कम वेतन के कागज बनवा लेते हैं। ऐसे मामलों में स्कूल कुछ भी करने में असमर्थ नजर आते हैं। स्कूल एसोसिएशन के द्वारा समय-समय पर इसके खिलाफ आवाज उठाई गई है। - नीरज कुमार गुप्ता, महासचिव, मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स
-- -- -- -- -- -- --
प्रधानाचार्यों की बात
आरटीई के तहत हमारे यहां प्रतिवर्ष 25 से 30 बच्चों का दाखिला होता है। स्कूल द्वारा करवाए गए सत्यापन में यह देखने को मिला है कि ऐसे अभिभावक जिनके पास स्वयं के बड़े घर हैं, गाड़िया हैं और आर्थिक रूप से भी मजबूत हैं। वह भी अपने बच्चे का आरटीई के तहत दाखिला करवाने का प्रयास करते हैं। मना करने पर शिक्षा विभाग और शासन में शिकायत करते हैं। ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिसमें कुछ एनजीओ और गिरोह अभिभावकों से पैसा लेकर दाखिले का दबाव बनाते हैं। - भावना दयाल, प्रिंसिपल, रानी प्रीतम कुंवर स्कूल
-- -- -- -- -- -- -- -
आरटीई के तहत हमारे स्कूल में लगभग 20 बच्चों का दाखिला होता है। पहली बार जब हमने सभी दाखिले कर लिए और अभिभावक पीटीएम में आए तब पता चला कि अधिकतर आर्थिक रूप से संपन्न हैं। उन्होंने अपने बच्चों का दाखिला करवाने के लिए फर्जी कागज बनवाए थे। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे को दाखिला देने में हम कभी मना नहीं करते हैं। यह दुखद है कि जरूरतमंद बच्चों की जगह संपन्न व्यक्ति अपने बच्चों का दाखिला करवा लेते हैं। - डॉ. इंदू पारीख, प्रिंसिपल, टाइनी टॉट्स कॉलेज
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग ने इस सत्र में 3915 विद्यार्थियों का आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला करवाया। इसके अलावा बच्चों का दाखिला करने से मना करने या आनाकानी करने पर विभिन्न विद्यालयों को 78 नोटिस भी जारी किए। इस मामले में मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल के महासचिव नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि आरटीई के अधिनियम की धारा 15-ए के अनुसार जो बच्चा पहले से ही किसी विद्यालय में पढ़ रहा है, उसका प्रवेश आरटीई के तहत नहीं हो सकता है।
विज्ञापन
लाभार्थी के परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए। लोग आरटीई में प्रवेश के लिए अपनी आय मात्र चार हजार रुपये प्रतिमाह का आय प्रमाणपत्र बनवा रहे है, जो आज के समय में संभव ही नहीं है।
विज्ञापन
जिस स्कूल में बच्चा पढ़ रहा है, उसी स्कूल में दोबारा उम्र कम करके आरटीई के माध्यम से दाखिला लेने के मामले भी सामने आ रहे हैं। आर्थिक रूप से संपन्न और सरकारी नौकरी वाले व्यक्ति भी बच्चों को आरटीई के माध्यम से दाखिला करवाने के लिए कम वेतन के कागज बनवा लेते हैं। ऐसे मामलों में स्कूल कुछ भी करने में असमर्थ नजर आते हैं। स्कूल एसोसिएशन के द्वारा समय-समय पर इसके खिलाफ आवाज उठाई गई है। - नीरज कुमार गुप्ता, महासचिव, मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स
प्रधानाचार्यों की बात
आरटीई के तहत हमारे यहां प्रतिवर्ष 25 से 30 बच्चों का दाखिला होता है। स्कूल द्वारा करवाए गए सत्यापन में यह देखने को मिला है कि ऐसे अभिभावक जिनके पास स्वयं के बड़े घर हैं, गाड़िया हैं और आर्थिक रूप से भी मजबूत हैं। वह भी अपने बच्चे का आरटीई के तहत दाखिला करवाने का प्रयास करते हैं। मना करने पर शिक्षा विभाग और शासन में शिकायत करते हैं। ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिसमें कुछ एनजीओ और गिरोह अभिभावकों से पैसा लेकर दाखिले का दबाव बनाते हैं। - भावना दयाल, प्रिंसिपल, रानी प्रीतम कुंवर स्कूल
आरटीई के तहत हमारे स्कूल में लगभग 20 बच्चों का दाखिला होता है। पहली बार जब हमने सभी दाखिले कर लिए और अभिभावक पीटीएम में आए तब पता चला कि अधिकतर आर्थिक रूप से संपन्न हैं। उन्होंने अपने बच्चों का दाखिला करवाने के लिए फर्जी कागज बनवाए थे। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे को दाखिला देने में हम कभी मना नहीं करते हैं। यह दुखद है कि जरूरतमंद बच्चों की जगह संपन्न व्यक्ति अपने बच्चों का दाखिला करवा लेते हैं। - डॉ. इंदू पारीख, प्रिंसिपल, टाइनी टॉट्स कॉलेज