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Moradabad News: रेलवे के दुर्घटना बचाने वाले विभागों में डेढ़ हजार पद खाली
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मुरादाबाद। रेल मंडल में दुर्घटना बचाने वाले विभागों में करीब डेढ़ हजार पद खाली हैं। इसमें ऑपरेटिंग, इंजीनियरिंग व सिग्नल एवं दूर संचार विभाग शामिल हैं। स्टेशन मास्टर, गार्ड से लेकर सिग्नल के टेक्नीशियन तक की रेलवे को जरूरत है। माना जा रहा है कि ये पद भर जाएं तो ट्रेनों का संचालन सुरक्षित हो सकेगा।
देशभर में हो रही रेल दुर्घटनाओं के बाद सेफ्टी विभाग में रिक्त पदों का मुद्दा चर्चा में है। भारतीय रेलवे में संरक्षा के करीब डेढ़ लाख पद खाली हैं। इसका असर सभी मंडलों में है। मुरादाबाद मंडल में इंजीनियरिंग विभाग में 700 से अधिक, ऑपरेटिंग में 500 से अधिक व एसएनटी विभाग में 300 से अधिक पद खाली हैं।
ड्राइवरों व गार्डों की संख्या कम होने के कारण स्टाफ को समुतिच आराम नहीं मिल पाता है। प्वाइंट्स मैन कम होने के कारण पेट्रोलिंग प्रभावित होती है। इसी तरह सीनियर सेक्शन इंजीनियर, जेई, टेक्नीशियन, सेक्शन कंट्रोलर आदि महत्वपूर्ण पद कई वर्षों से खाली हैं। यह स्थिति तब है जबकि सुरक्षित संचालन रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले वर्षों में रेलवे ने कई भर्तियां की हैं, लेकिन अभी और प्रयास की जरूरत है।
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इन पदों की रिक्तियां अहम
रेलवे की संरक्षा श्रेणी में ट्रेन ड्राइवर, निरीक्षक, चालक दल नियंत्रक, लोको प्रशिक्षक, ट्रेन नियंत्रक, पटरी की मरम्मत करने वाला स्टाफ, स्टेशन मास्टर, प्वाइंट्समैन, सिग्नल का रखरखाव करने वाला स्टाफ और सिग्नलिंग पर्यवेक्षक शामिल हैं। ट्रेनों के परिचालन में सीधे शामिल होने के कारण इन पदों पर कार्यरत कर्मचारी सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिहाज से बेहद अहम हैं। रेल कर्मचारी संगठनों का कहना है कि संरक्षा श्रेणी में कर्मचारियों पर काफी दबाव है। उन्हें अधिक कार्य करना पड़ रहा है।
डेढ़ साल में मंडल में हुए हैं तीन रेल हादसे
दिसंबर 2022 से जुलाई 2024 तक मंडल में तीन रेल हादसे हुए हैं। तीनों बार मालगाड़ी पटरी से उतरी है। पहला हादसा तीन दिसंबर की रात को रामपुर स्टेशन यार्ड के पास हुआ। इसमें मालगाड़ी के दो वैगन पटरी से उतर गए थे। दूसरा हादसा 17 दिसंबर 2023 को हुआ। मुरादाबाद स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर पांच के पास हुआ था, जिसमें मालगाड़ी के कई वैगन बेपटरी हो गए थे। इसमें ओएचई व खंभे भी टूट गए थे। तीसरा हादसा 19 जुलाई 2024 को मंडल के अमरोहा स्टेशन के पास हुआ। कंटेनर ट्रेन के 10 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।
- रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। सुरक्षित व संरक्षित संचालन के लिए कुशल स्टाफ से ज्यादा बेहतर तकनीक की जरूरत होती है। हमारे पास अच्छी तकनीक है। संरक्षा रेलवे की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
- आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम
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देशभर में हो रही रेल दुर्घटनाओं के बाद सेफ्टी विभाग में रिक्त पदों का मुद्दा चर्चा में है। भारतीय रेलवे में संरक्षा के करीब डेढ़ लाख पद खाली हैं। इसका असर सभी मंडलों में है। मुरादाबाद मंडल में इंजीनियरिंग विभाग में 700 से अधिक, ऑपरेटिंग में 500 से अधिक व एसएनटी विभाग में 300 से अधिक पद खाली हैं।
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ड्राइवरों व गार्डों की संख्या कम होने के कारण स्टाफ को समुतिच आराम नहीं मिल पाता है। प्वाइंट्स मैन कम होने के कारण पेट्रोलिंग प्रभावित होती है। इसी तरह सीनियर सेक्शन इंजीनियर, जेई, टेक्नीशियन, सेक्शन कंट्रोलर आदि महत्वपूर्ण पद कई वर्षों से खाली हैं। यह स्थिति तब है जबकि सुरक्षित संचालन रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले वर्षों में रेलवे ने कई भर्तियां की हैं, लेकिन अभी और प्रयास की जरूरत है।
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इन पदों की रिक्तियां अहम
रेलवे की संरक्षा श्रेणी में ट्रेन ड्राइवर, निरीक्षक, चालक दल नियंत्रक, लोको प्रशिक्षक, ट्रेन नियंत्रक, पटरी की मरम्मत करने वाला स्टाफ, स्टेशन मास्टर, प्वाइंट्समैन, सिग्नल का रखरखाव करने वाला स्टाफ और सिग्नलिंग पर्यवेक्षक शामिल हैं। ट्रेनों के परिचालन में सीधे शामिल होने के कारण इन पदों पर कार्यरत कर्मचारी सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिहाज से बेहद अहम हैं। रेल कर्मचारी संगठनों का कहना है कि संरक्षा श्रेणी में कर्मचारियों पर काफी दबाव है। उन्हें अधिक कार्य करना पड़ रहा है।
डेढ़ साल में मंडल में हुए हैं तीन रेल हादसे
दिसंबर 2022 से जुलाई 2024 तक मंडल में तीन रेल हादसे हुए हैं। तीनों बार मालगाड़ी पटरी से उतरी है। पहला हादसा तीन दिसंबर की रात को रामपुर स्टेशन यार्ड के पास हुआ। इसमें मालगाड़ी के दो वैगन पटरी से उतर गए थे। दूसरा हादसा 17 दिसंबर 2023 को हुआ। मुरादाबाद स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर पांच के पास हुआ था, जिसमें मालगाड़ी के कई वैगन बेपटरी हो गए थे। इसमें ओएचई व खंभे भी टूट गए थे। तीसरा हादसा 19 जुलाई 2024 को मंडल के अमरोहा स्टेशन के पास हुआ। कंटेनर ट्रेन के 10 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।
- रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। सुरक्षित व संरक्षित संचालन के लिए कुशल स्टाफ से ज्यादा बेहतर तकनीक की जरूरत होती है। हमारे पास अच्छी तकनीक है। संरक्षा रेलवे की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
- आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम