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Moradabad News: शहादत की रात जंजीरी मातम में गूंजा या हुसैन या हुसैन

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 02:24 AM IST
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On the night of martyrdom, the chant of "Ya Hussain, Ya Hussain" echoed amidst the *Zanjeeri Matam* (ritual mourning with chains).
मुरादाबाद। नाैवीं मुहर्रम पर (शबे आशूरा) बृहस्पतिवार की रात हजरत इमाम हुसैन का चाहने वाला हर शख्स सोग में डूब गया। शहादत की रात अजादारों ने इमामबाड़ा कुली खां में सीनाजनी की गई। अजादारों ने छुरियों के मातम से खुद को खून से तरबतर कर लिया और या हुसैन की सदाएं बुलंद करते रहे। वहीं मजलिसों में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जांनिसारों की शहादत के गम में अजादारों की आंखें छलक पड़ीं।
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इमामबाड़ा कुली खां में कर्बला का मंजर बयान किया गया। मातमी अंजुमनों ने नौहाख्वानी की। इस दौरान शहादत का जिक्र होने पर अजादारों ने छुरियों का मातम किया। नंगी पीठ को छुरियों से लहूलुहान कर लिया। बच्चे भी बड़ों के साथ मातम में शरीक हुए। खून से तरबतर बच्चों ने या हुसैन की सदाएं बुलंद की। इस दौरान जुलजुनाह का जुलूस भी निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन के घोड़े की शबीह जुलजुनाह आया तो हर ओर गमगीन आवाजें गूंजने लगी। देर रात तक मातम का सिलसिला जारी रहा।
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इससे पहले नाैवीं मुहर्रम पर मोहल्ला लाकड़ीवालान में मरहूम अली यावर नकवी के घर पर सुबह हुई मजलिस में मौलाना सैय्यद नकी अब्बास रिजवी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने यजीदी फौज से अपने छह माह के बच्चे हजरत अली असगर को जंग के मैदान मेें ले जाकर कहा कि इस बच्चे को पानी पिला दो। मगर यजीदी फौज ने इमाम हुसैन की ना सुनी। हुर्मला ने एक तीर हजरत अली असगर को मारकर शहीद कर दिया। हजरत अली असगर की शहादत को सुनकर अजादार रोने लगे। मजलिस के बाद आजदारों ने मातम किया। आसिम यावर ने नौहा पढ़ा। इस दाैरान आजम, मोअज्जम नौशाद हैदर, डाॅ. सिबते नबी, जावेद यावर, शान हैदर, सुहैल अहमद रिजवी, आसिम यावर, कायम हसनैन, मोहम्मद अब्बास, आलम आब्दी आदि माैजूद रहे।
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दूसरी मजलिस चौमुखा पुल इमामबाड़े में हुई जिसे मौलाना कौसर मुजतबा ने खिताब किया। जबकि तीसरी मजलिस इमामबड़ा हकीम फरजंद अली में हुई जिसको मौलाना हसन मुजताबा ने खिताब किया।
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