फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Now the T-55 tank which defeated Pakistan will increase the pride of Brass City.

Moradabad News: अब पीतलनगरी की शान बढ़ाएगा पाक को धूल चटाने वाला टी-55 टैंक

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 16 Feb 2025 12:15 AM IST
विज्ञापन
Now the T-55 tank which defeated Pakistan will increase the pride of Brass City.
मुरादाबाद। वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दाैरान दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाला टी-55 टैंक जल्द ही पीतलनगरी की शान बढ़ाता नजर आएगा। मंडलायुक्त के निर्देश पर नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने टैंक को पुणे से मुरादाबाद लाने की तैयारी पूरी कर ली है। यह टैंक बुद्धि विहार में बन रहे युद्ध स्मारक में रखा जाएगा। इसके अलावा युद्ध के दौैरान उपयोग की गईं (अब निष्प्रयोज्य) कुछ बंदूकें व गोले भी स्मारक की शोभा बढ़ाते नजर आएंगे।
विज्ञापन

नगर निगम की ओर से बुद्धि विहार में आवास विकास परिषद के कार्यालय के पास खाली पड़ी भूमि पर युद्ध स्मारक का निर्माण कराया जा रहा है। मंडलायुक्त ने 26 जनवरी को युद्ध स्मारक का शिलान्यास किया था। युद्ध स्मारक में लाइट एंड साउंड शो के साथ सेना के शाैर्य को दिखाने वाली गैलरी भी बनाई जा रही है। युद्ध स्मारक में 48 सीटों वाला थियेटर भी रहेगा, जिसमें दर्शकों को 1947 से लेकर अब तक के बलिदानियों की शौर्य गाथा दिखाई जाएगी। यहां युद्ध के दौरान सेना द्वारा प्रयोग किए गए टैंक व अन्य हथियार भी लोग देख सकेंगे।
विज्ञापन

000
सेना के अधिकारियों ने दी टी-55 टैंक देने की मंजूरी
नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने बताया कि सेना के अधिकारियों से लगातार पत्राचार हो रहा है। सेना के अधिकारियों ने पत्र भेजकर टी-55 टैंक को देने की मंजूरी दे दी है। टैंक लेने के लिए इसी सप्ताह नगर निगम अधिकारियों की एक टीम पुणे भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि टैंक के अलावा युद्ध के दौरान प्रयोग की गई बंदूकें, गोला व कुछ अन्य हथियार भी लाने के लिए सेना के अधिकारियों से बातचीत चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

000
जानिये टी-55 टैंक के बारे में
टी-55 टैंक का निर्माण सबसे पहले 1946 से 1981 के बीच सोवियत संघ ने किया था। 1956 से 1989 के बीच पोलैंड ने भी टी-55 मॉडल टैंक का निर्माण किया। दोनों देशों की तर्ज पर 1957 से 1983 के बीच चेकोस्लोवाकिया में भी इसके मॉडल का निर्माण हुआ था। भारतीय सेना में इस टैंक को 1968 में शामिल किया गया था। इसका प्रमुख उपयोग पाकिस्तान की सेना के खिलाफ 1971 के युद्ध में किया गया था। उस दौरान यह टैंक पाकिस्तानी सैनिकों के लिए दहशत बन गए थे। बताया जाता है कि यह टैंक वर्ष 2011 तक सेवा देते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed