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Moradabad News: मुआवजा जमा नहीं करने पर डीएम अमरोहा को नोटिस
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मुरादाबाद। लारा कोर्ट ने किसानों की जमीन की मुआवजा राशि जमा नहीं करने पर डीएम अमरोहा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने डीएम को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि क्यों न आपको सिविल जेल भेजा जाए।
भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण (लारा) कोर्ट में बृहस्पतिवार को अबरार अहमद एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले की सुनवाई शुरू हुई। अमरोहा के जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल की तरफ से स्थगन प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया। तर्क दिया गया कि संबंधित मामले में 30 जून 2025 के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल है।
भुगतान के लिए 8 अप्रैल 2026 को शासन को पत्र भेजा गया है। दूसरे पक्ष के अधिवक्ता ने इस तर्क का विरोध किया। प्राधिकरण ने सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि सिर्फ अपील लंबित होने के आधार पर डिक्री के क्रियान्वयन पर रोक नहीं लगाई जाएगी। जब तक अपीलीय न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश न दिया जाए।
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कोर्ट ने माना कि वाद 27 नवंबर 2025 से लंबित है। फिर भी मुआवजा राशि जमा नहीं की गई। इससे पहले 8 अप्रैल 2026 को डीएम अमरोहा की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया गया था। 24 अप्रैल को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। फिर भी डीएम अमरोहा अदालत में पेश नहीं हुए।
अदालत ने टिप्पणी की, अधीनस्थ प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से संपत्ति की बिक्री की प्रक्रिया प्रभावी नहीं हो पा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार छह माह में वाद का निष्पादन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसकी समय सीमा 27 मई 2026 को समाप्त हो रही है।
इन परिस्थितियों में कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 नियम 37 के तहत नोटिस जारी कर कलेक्टर अमरोहा को निर्देश दिया है कि शपथपत्र के साथ उपस्थित होकर बताएं कि उन्हें क्यों न सिविल कारावास में भेजा जाए। साथ ही कोर्ट ने स्थगन प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई लोक अदालत के बाद 12 मई को होगी।
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भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण (लारा) कोर्ट में बृहस्पतिवार को अबरार अहमद एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले की सुनवाई शुरू हुई। अमरोहा के जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल की तरफ से स्थगन प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया। तर्क दिया गया कि संबंधित मामले में 30 जून 2025 के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल है।
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भुगतान के लिए 8 अप्रैल 2026 को शासन को पत्र भेजा गया है। दूसरे पक्ष के अधिवक्ता ने इस तर्क का विरोध किया। प्राधिकरण ने सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि सिर्फ अपील लंबित होने के आधार पर डिक्री के क्रियान्वयन पर रोक नहीं लगाई जाएगी। जब तक अपीलीय न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश न दिया जाए।
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कोर्ट ने माना कि वाद 27 नवंबर 2025 से लंबित है। फिर भी मुआवजा राशि जमा नहीं की गई। इससे पहले 8 अप्रैल 2026 को डीएम अमरोहा की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया गया था। 24 अप्रैल को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। फिर भी डीएम अमरोहा अदालत में पेश नहीं हुए।
अदालत ने टिप्पणी की, अधीनस्थ प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से संपत्ति की बिक्री की प्रक्रिया प्रभावी नहीं हो पा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार छह माह में वाद का निष्पादन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसकी समय सीमा 27 मई 2026 को समाप्त हो रही है।
इन परिस्थितियों में कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 नियम 37 के तहत नोटिस जारी कर कलेक्टर अमरोहा को निर्देश दिया है कि शपथपत्र के साथ उपस्थित होकर बताएं कि उन्हें क्यों न सिविल कारावास में भेजा जाए। साथ ही कोर्ट ने स्थगन प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई लोक अदालत के बाद 12 मई को होगी।