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महिला चिकित्सक ही नहीं, बाल रोग विशेषज्ञ का पद भी खाली
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सोमवार से मंगलवार के बीच 11 घंटे के भीतर चार नवजात शिशुओं की मौत से चर्चा में आए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में महिला रोग विशेषज्ञ ही नहीं, बाल रोग विशेषज्ञ समेत अन्य कई चिकित्सकों के पद भी खाली हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ की मौजूदगी होती तो भी कुछ नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती थी।
महिला चिकित्सक न होने से हसनपुर सीएचसी में गर्भवतियों की प्रसव प्रक्रिया स्टाफ नर्स और एएनएम द्वारा कराई जाती है। सोमवार से मंगलवार के बीच 11 घंटे में मौत के मुंह में समाए चार शिशुओं का जन्म भी इन्हीं महिला कर्मचारियों के हाथों कराया गया था। चार बच्चों की मौत का मामला चर्चा में आने के बाद चिकित्सा अधिकारियों ने प्रशिक्षित व अनुभवी नर्सों के हाथों प्रसव को जायज बताया था। किसी शिशु के गर्भ में ही दम तोड़ने तो किसी में खून की कमी या सांस लेने में दिक्कत के कारण जान जाने की बात भी कही थी।
जानकारों की मानें तो गर्भ में कमजोर स्थिति में पल रहे शिशुओं या जन्म के समय सांस लेने की दिक्कत जैसे मामलों में तत्काल शिशु को बाल रोग विशेषज्ञ की सही देखरेख अक्सर जीवनदायिनी बन जाती है। हसनपुर सीएचसी में दो साल से महिला चिकित्सक न होना तथा बाल रोग विशेषज्ञ का पद भी खाली होना व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारों की अनदेखी बड़ा उदाहरण है।
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महिला चिकित्सक न होने से हसनपुर सीएचसी में गर्भवतियों की प्रसव प्रक्रिया स्टाफ नर्स और एएनएम द्वारा कराई जाती है। सोमवार से मंगलवार के बीच 11 घंटे में मौत के मुंह में समाए चार शिशुओं का जन्म भी इन्हीं महिला कर्मचारियों के हाथों कराया गया था। चार बच्चों की मौत का मामला चर्चा में आने के बाद चिकित्सा अधिकारियों ने प्रशिक्षित व अनुभवी नर्सों के हाथों प्रसव को जायज बताया था। किसी शिशु के गर्भ में ही दम तोड़ने तो किसी में खून की कमी या सांस लेने में दिक्कत के कारण जान जाने की बात भी कही थी।
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जानकारों की मानें तो गर्भ में कमजोर स्थिति में पल रहे शिशुओं या जन्म के समय सांस लेने की दिक्कत जैसे मामलों में तत्काल शिशु को बाल रोग विशेषज्ञ की सही देखरेख अक्सर जीवनदायिनी बन जाती है। हसनपुर सीएचसी में दो साल से महिला चिकित्सक न होना तथा बाल रोग विशेषज्ञ का पद भी खाली होना व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारों की अनदेखी बड़ा उदाहरण है।
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