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Moradabad News: पीतल उद्योग को चमकाने के लिए नहीं हुई पॉलिश
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मुरादाबाद। गिरावट के दौर से गुजर रहे मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को आम बजट से निराशा मिली है। फौरी तौर पर निर्यातकों को राहत देने वाली कोई घोषणा बजट में नहीं की गई। न तो निर्यातकों के लिए इनकम टैक्स की स्लैब बढ़ाई गई और न ही निर्यातकों को मिलने वाली सब्सिडी बढ़ाई गई। हालांकि, आम बजट में रेल-बंदरगाह संपर्क गलियारे व बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर उत्पादन की घोषणा ने शहर के निर्यातकों को मामूली राहत दी है।
मुरादाबाद के कई निर्यातक अपनी फैक्टरियों के उत्पाद बंदरगाह तक ट्रकों से पहुंचाते हैं। रेल-बंदरगाह संपर्क गलियारे बनने से कम शुल्क में ज्यादा माल बंदरगाहों तक पहुंचाया जा सकेगा। वहीं बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर का उत्पादन भारत में बढ़ने से उत्पादों की महंगी पैकेजिंग से राहत मिलेगी। फिलहाल विदेशों से बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर मंगाकर माल पैक किया जाता है, जो बहुत मंहगा पड़ता है। इसके बाद ही विदेशी ग्राहक माल को स्वीकार करते हैं, क्योंकि बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर को नष्ट किया जा सकता है।
इसके अलावा बजट में निर्यात पर मिलने वाली फोकस व धातु निर्यात पर मिलने वाली ड्रॉ बैक सब्सिडी को शुरू नहीं किया गया है। निर्यात ऋण पर बैंकों के ब्याज में मिलने वाली सब्सिडी पर भी कोई बात नहीं हुई है। निर्यातकों ने कहा कि कम काम व महंगे कच्चे माल के संकट की ओर ध्यान न देकर सरकार ने पीतलनगरी के निर्यातकों को निराश किया है।
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आंकड़े एक नजर में
- 2400 छोटे बड़े निर्यातक जिले में
- 8500 करोड़ रुपये का निर्यात मुरादाबाद से हर साल होता है
- 1900 डॉलर पहुंच गया कंटेनरों का रेट, पहले 600 डॉलर था
- 15 फीसदी महंगे हो गए कच्चे माल
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40 फीसदी घटा मुरादाबाद का निर्यात
- पिछले छह महीने में मुरादाबाद का निर्यात करीब 40 फीसदी घटा है। कभी रूस-यूक्रेन युद्ध से कारोबार प्रभावित हुआ तो कभी अमेरिका में आर्थिक मंदी कारण बनी। वहीं चीन का बाजार खुलने से भी मुरादाबाद के निर्यात को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा कंटेनरों के रेट में तीन गुना और स्थानीय स्तर पर कच्चे माल (पीतल, स्टील, तांबा, एल्युमिनियम, लोहा) की कीमतों में करीब 15 फीसदी उछाल ने भी निर्यात को प्रभावित करने का काम किया है। यही वजह है कि छह महीने में मुरादाबाद के निर्यात में करीब चालीस प्रतिशत की गिरावट आई है।
- बजट से निर्यातकों की उम्मीदों को चोट पहुंची है। एमएसएमई में सिडबी की भूमिका क्या है, इसका निर्यातकों को सीधा लाभ नहीं है। पहले निर्यात ऋण पर बैंक के ब्याज में पांच प्रतिशत सब्सिडी मिलती थी, वह अब बंद हो गई है। हस्त शिल्प निर्यात के लिए बजट में कुछ नहीं है। - अवधेश अग्रवाल, महासचिव एमएचईए
- इनकम टैक्स में रियायत नहीं दी गई। आजकल निर्यातक शेयर मार्केट में भी शॉर्ट व लॉन्ग टर्म निवेश करते हैं। इस पर भी सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया है। निर्यात को बढ़ावा देने की कोई बात बजट में दिखाई नहीं दी। - नीरज खन्ना, वाइस चेयरमैन ईपीसीएच
- बजट में मेटल हैंडीक्राफ्ट्स निर्यातकों और विशेष रूप से मुरादाबाद के लिए कोई लाभ नहीं है। रेल-बंदरगाह संपर्क गलियारे व बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर के उत्पादन से थोड़ी राहत मिलेगी। लौह इस्पात स्क्रैप पर कर में छूट से भी मुरादाबाद को कोई लाभ नहीं है। सब्सिडी पर बात होनी चाहिए थी। - जेपी सिंह, चेयरमैन यस
- बजट में सरकार की ओर से निर्यातकों को कोई राहत पैकेज नहीं मिला है। सरकार ने फोकस इंसेटिव मेंं कोई भी बढ़ोतरी नहीं की और न ही ड्रॉ बैक को दोबारा शुरू किया। इसके साथ ही 45 दिन में निर्यातकों को पेमेंट करने में जो परेशानी का सामाना करना पड़ रहा है। उसमें भी किसी प्रकार की कोई राहत नहीं मिली है। - नवेद खान, निर्यातक
- ट्रॉफी के निर्माण पर सब्सिडी व टैक्स कम करने की थी मांग
मुरादाबाद में ट्रॉफी (प्रतीक चिह्न) का निर्माण बड़ी संख्या में होता है। देशभर में होने वाले बड़े खेल आयोजनों में मुरादाबाद से बनकर ट्रॉफियां जाती हैं। निर्यातक गोपाल मेहता ने कहा कि सरकार की खेल को बढ़ावा देने की सोच के कारण लगा था कि ट्रॉफी बनाने व निर्यात करने वाले उद्यमियों को सब्सिडी व टैक्स में छूट मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उद्यमियों के लिए सरकार कोई राहत योजना भी नहीं लाई। निर्यातकों को मिलने वाले फोकस एक्सपोर्ट्स इंसेंटिव पर भी बात नहीं की गई।
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मुरादाबाद के कई निर्यातक अपनी फैक्टरियों के उत्पाद बंदरगाह तक ट्रकों से पहुंचाते हैं। रेल-बंदरगाह संपर्क गलियारे बनने से कम शुल्क में ज्यादा माल बंदरगाहों तक पहुंचाया जा सकेगा। वहीं बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर का उत्पादन भारत में बढ़ने से उत्पादों की महंगी पैकेजिंग से राहत मिलेगी। फिलहाल विदेशों से बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर मंगाकर माल पैक किया जाता है, जो बहुत मंहगा पड़ता है। इसके बाद ही विदेशी ग्राहक माल को स्वीकार करते हैं, क्योंकि बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर को नष्ट किया जा सकता है।
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इसके अलावा बजट में निर्यात पर मिलने वाली फोकस व धातु निर्यात पर मिलने वाली ड्रॉ बैक सब्सिडी को शुरू नहीं किया गया है। निर्यात ऋण पर बैंकों के ब्याज में मिलने वाली सब्सिडी पर भी कोई बात नहीं हुई है। निर्यातकों ने कहा कि कम काम व महंगे कच्चे माल के संकट की ओर ध्यान न देकर सरकार ने पीतलनगरी के निर्यातकों को निराश किया है।
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आंकड़े एक नजर में
- 2400 छोटे बड़े निर्यातक जिले में
- 8500 करोड़ रुपये का निर्यात मुरादाबाद से हर साल होता है
- 1900 डॉलर पहुंच गया कंटेनरों का रेट, पहले 600 डॉलर था
- 15 फीसदी महंगे हो गए कच्चे माल
40 फीसदी घटा मुरादाबाद का निर्यात
- पिछले छह महीने में मुरादाबाद का निर्यात करीब 40 फीसदी घटा है। कभी रूस-यूक्रेन युद्ध से कारोबार प्रभावित हुआ तो कभी अमेरिका में आर्थिक मंदी कारण बनी। वहीं चीन का बाजार खुलने से भी मुरादाबाद के निर्यात को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा कंटेनरों के रेट में तीन गुना और स्थानीय स्तर पर कच्चे माल (पीतल, स्टील, तांबा, एल्युमिनियम, लोहा) की कीमतों में करीब 15 फीसदी उछाल ने भी निर्यात को प्रभावित करने का काम किया है। यही वजह है कि छह महीने में मुरादाबाद के निर्यात में करीब चालीस प्रतिशत की गिरावट आई है।
- बजट से निर्यातकों की उम्मीदों को चोट पहुंची है। एमएसएमई में सिडबी की भूमिका क्या है, इसका निर्यातकों को सीधा लाभ नहीं है। पहले निर्यात ऋण पर बैंक के ब्याज में पांच प्रतिशत सब्सिडी मिलती थी, वह अब बंद हो गई है। हस्त शिल्प निर्यात के लिए बजट में कुछ नहीं है। - अवधेश अग्रवाल, महासचिव एमएचईए
- इनकम टैक्स में रियायत नहीं दी गई। आजकल निर्यातक शेयर मार्केट में भी शॉर्ट व लॉन्ग टर्म निवेश करते हैं। इस पर भी सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया है। निर्यात को बढ़ावा देने की कोई बात बजट में दिखाई नहीं दी। - नीरज खन्ना, वाइस चेयरमैन ईपीसीएच
- बजट में मेटल हैंडीक्राफ्ट्स निर्यातकों और विशेष रूप से मुरादाबाद के लिए कोई लाभ नहीं है। रेल-बंदरगाह संपर्क गलियारे व बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर के उत्पादन से थोड़ी राहत मिलेगी। लौह इस्पात स्क्रैप पर कर में छूट से भी मुरादाबाद को कोई लाभ नहीं है। सब्सिडी पर बात होनी चाहिए थी। - जेपी सिंह, चेयरमैन यस
- बजट में सरकार की ओर से निर्यातकों को कोई राहत पैकेज नहीं मिला है। सरकार ने फोकस इंसेटिव मेंं कोई भी बढ़ोतरी नहीं की और न ही ड्रॉ बैक को दोबारा शुरू किया। इसके साथ ही 45 दिन में निर्यातकों को पेमेंट करने में जो परेशानी का सामाना करना पड़ रहा है। उसमें भी किसी प्रकार की कोई राहत नहीं मिली है। - नवेद खान, निर्यातक
- ट्रॉफी के निर्माण पर सब्सिडी व टैक्स कम करने की थी मांग
मुरादाबाद में ट्रॉफी (प्रतीक चिह्न) का निर्माण बड़ी संख्या में होता है। देशभर में होने वाले बड़े खेल आयोजनों में मुरादाबाद से बनकर ट्रॉफियां जाती हैं। निर्यातक गोपाल मेहता ने कहा कि सरकार की खेल को बढ़ावा देने की सोच के कारण लगा था कि ट्रॉफी बनाने व निर्यात करने वाले उद्यमियों को सब्सिडी व टैक्स में छूट मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उद्यमियों के लिए सरकार कोई राहत योजना भी नहीं लाई। निर्यातकों को मिलने वाले फोकस एक्सपोर्ट्स इंसेंटिव पर भी बात नहीं की गई।