{"_id":"6ab2ee89adff2d064b0f226c","slug":"newzealand-ftta-se-vidroh-ke-virodhiyon-ko-nai-rah-naye-vikalp-par-jor-moradabad-news-c-15-1-mbd1044-999457-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: न्यूजीलैंड एफटीए से मुरादाबाद के निर्यात को नई राह, नए विकल्प पर जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: न्यूजीलैंड एफटीए से मुरादाबाद के निर्यात को नई राह, नए विकल्प पर जोर
विज्ञापन
मुरादाबाद। वैश्विक व्यापार में बदलते हालात के बीच मुरादाबाद के निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार नई संभावना लेकर आया है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 20 अक्तूबर से लागू होने जा रहा है। इसके बाद न्यूजीलैंड भारत के 100 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त प्रवेश देगा। मुरादाबाद के लिए इसका सबसे सीधा असर पीतल एवं अन्य धातु हस्तशिल्प, मेटलवेयर, आर्टवेयर, होम डेकोर और गिफ्टवेयर पर पड़ने की उम्मीद है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के उत्तर प्रदेश चैप्टर के प्रमुख आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत से न्यूजीलैंड को करीब 5,900 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 1,300 करोड़ रुपये रही, जबकि मुरादाबाद से न्यूजीलैंड को करीब 100 से 150 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। उनका अनुमान है कि एफटीए के बाद मुरादाबाद के निर्यात में पांच से सात प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है। न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों पर पहले कुछ श्रेणियों में पांच से 10 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। एफटीए से यह शुल्क समाप्त होने के बाद कीमत के स्तर पर भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। निर्यातकों के सामने एफटीए का लाभ उठाने के लिए न्यूजीलैंड के उत्पाद मानकों, गुणवत्ता, पैकेजिंग और खरीदारों की पसंद के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की चुनौती भी होगी। नए खरीदारों से संपर्क, बायर-सेलर मीट, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और बीटूबी मैचमेकिंग के जरिए बाजार विस्तार पर काम करना होगा।
अमेरिका के साथ दूसरे बाजारों पर भी नजर
एफटीए के साथ शहर के निर्यातकों के सामने बाजारों के विस्तार की चुनौती भी है। फियो ने अमेरिका के साथ ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, सीआईएस, डब्ल्यूएएनए और मेना क्षेत्र में नए खरीदार और वितरक विकसित करने पर जोर दिया है। ब्रिटेन में होम डेकोर, गिफ्टवेयर और टेबलवेयर, यूरोप में डिजाइन आधारित हस्तशिल्प व टिकाऊ उत्पाद तथा खाड़ी देशों में प्रीमियम लाइफस्टाइल उत्पादों की संभावनाएं तलाशने की बात कही गई है। शहर से इन बाजारों में निर्यात पहले से होता है, लेकिन फियो के अनुसार अब किसी एक बड़े बाजार पर निर्भरता घटाकर अलग-अलग देशों में खरीदारों का आधार बढ़ाना जरूरी है। मुरादाबाद के 78 कारोबारी 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में भी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 42 नए निर्यातक पहली बार विदेशी खरीदारों के सामने उत्पाद रखेंगे।
विज्ञापन
निर्यातकों के कोट्स (फोटो) -
एफटीए मुरादाबाद के निर्यातकों को नया बाजार अवसर दे सकता है। खासकर हस्तशिल्प, मेटलवेयर और वुडन हैंडीक्राफ्ट के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकती है। लेकिन निर्यातकों को केवल शुल्क लाभ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। गुणवत्ता, पैकेजिंग, उत्पाद मानक और खरीदारों की पसंद के अनुसार तैयारी जरूरी होगी।
- आलोक श्रीवास्तव, हेड-फियो, उत्तर प्रदेश
न्यूजीलैंड मुरादाबाद के लिए अभी बहुत बड़ा बाजार नहीं है, लेकिन एफटीए के बाद वहां नए खरीदार बनाने की संभावना बढ़ेगी। सबसे जरूरी बात यह है कि छोटे निर्यातक भी इस अवसर तक पहुंच बना सकें। खरीदारों से सीधे संपर्क और व्यापार मेलों में भागीदारी बढ़ाकर बाजार तैयार करना होगा।
- नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच
अमेरिका हमारा महत्वपूर्ण बाजार है, लेकिन वैश्विक व्यापार में किसी एक बाजार पर निर्भर रहना जोखिम बढ़ाता है। ब्रिटेन, यूरोप, मध्य एशिया और खाड़ी देशों में नए खरीदार तलाशने की जरूरत है। उत्पादों की डिजाइन, कीमत और गुणवत्ता को अलग-अलग बाजारों की मांग के अनुसार बदलना भी जरूरी है।
- जेपी सिंह, अध्यक्ष, यस
एफटीए से शुल्क की बाधा कम होगी, लेकिन इससे अपने आप ऑर्डर नहीं आएंगे। मुरादाबाद के निर्यातकों को न्यूजीलैंड के खरीदारों की जरूरत समझकर नए उत्पाद तैयार करने होंगे। छोटे एमएसएमई के लिए खरीदारों तक पहुंच, प्रमाणन, पैकेजिंग और बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा।
- दीपक चौधरी, निर्यातक
विज्ञापन
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के उत्तर प्रदेश चैप्टर के प्रमुख आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत से न्यूजीलैंड को करीब 5,900 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 1,300 करोड़ रुपये रही, जबकि मुरादाबाद से न्यूजीलैंड को करीब 100 से 150 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। उनका अनुमान है कि एफटीए के बाद मुरादाबाद के निर्यात में पांच से सात प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है। न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों पर पहले कुछ श्रेणियों में पांच से 10 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। एफटीए से यह शुल्क समाप्त होने के बाद कीमत के स्तर पर भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। निर्यातकों के सामने एफटीए का लाभ उठाने के लिए न्यूजीलैंड के उत्पाद मानकों, गुणवत्ता, पैकेजिंग और खरीदारों की पसंद के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की चुनौती भी होगी। नए खरीदारों से संपर्क, बायर-सेलर मीट, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और बीटूबी मैचमेकिंग के जरिए बाजार विस्तार पर काम करना होगा।
विज्ञापन
अमेरिका के साथ दूसरे बाजारों पर भी नजर
एफटीए के साथ शहर के निर्यातकों के सामने बाजारों के विस्तार की चुनौती भी है। फियो ने अमेरिका के साथ ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, सीआईएस, डब्ल्यूएएनए और मेना क्षेत्र में नए खरीदार और वितरक विकसित करने पर जोर दिया है। ब्रिटेन में होम डेकोर, गिफ्टवेयर और टेबलवेयर, यूरोप में डिजाइन आधारित हस्तशिल्प व टिकाऊ उत्पाद तथा खाड़ी देशों में प्रीमियम लाइफस्टाइल उत्पादों की संभावनाएं तलाशने की बात कही गई है। शहर से इन बाजारों में निर्यात पहले से होता है, लेकिन फियो के अनुसार अब किसी एक बड़े बाजार पर निर्भरता घटाकर अलग-अलग देशों में खरीदारों का आधार बढ़ाना जरूरी है। मुरादाबाद के 78 कारोबारी 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में भी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 42 नए निर्यातक पहली बार विदेशी खरीदारों के सामने उत्पाद रखेंगे।
विज्ञापन
निर्यातकों के कोट्स (फोटो) -
एफटीए मुरादाबाद के निर्यातकों को नया बाजार अवसर दे सकता है। खासकर हस्तशिल्प, मेटलवेयर और वुडन हैंडीक्राफ्ट के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकती है। लेकिन निर्यातकों को केवल शुल्क लाभ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। गुणवत्ता, पैकेजिंग, उत्पाद मानक और खरीदारों की पसंद के अनुसार तैयारी जरूरी होगी।
- आलोक श्रीवास्तव, हेड-फियो, उत्तर प्रदेश
न्यूजीलैंड मुरादाबाद के लिए अभी बहुत बड़ा बाजार नहीं है, लेकिन एफटीए के बाद वहां नए खरीदार बनाने की संभावना बढ़ेगी। सबसे जरूरी बात यह है कि छोटे निर्यातक भी इस अवसर तक पहुंच बना सकें। खरीदारों से सीधे संपर्क और व्यापार मेलों में भागीदारी बढ़ाकर बाजार तैयार करना होगा।
- नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच
अमेरिका हमारा महत्वपूर्ण बाजार है, लेकिन वैश्विक व्यापार में किसी एक बाजार पर निर्भर रहना जोखिम बढ़ाता है। ब्रिटेन, यूरोप, मध्य एशिया और खाड़ी देशों में नए खरीदार तलाशने की जरूरत है। उत्पादों की डिजाइन, कीमत और गुणवत्ता को अलग-अलग बाजारों की मांग के अनुसार बदलना भी जरूरी है।
- जेपी सिंह, अध्यक्ष, यस
एफटीए से शुल्क की बाधा कम होगी, लेकिन इससे अपने आप ऑर्डर नहीं आएंगे। मुरादाबाद के निर्यातकों को न्यूजीलैंड के खरीदारों की जरूरत समझकर नए उत्पाद तैयार करने होंगे। छोटे एमएसएमई के लिए खरीदारों तक पहुंच, प्रमाणन, पैकेजिंग और बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा।
- दीपक चौधरी, निर्यातक