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Moradabad: टोकन की अनदेखी से एक पटरी पर आई थीं दो ट्रेनें, बाल-बाल बचा था हादसा, निलंबित हुए थे स्टेशन मास्टर

Fri, 23 Jan 2026 08:45 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 23 Jan 2026 08:45 PM IST
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Moradabad: Two trains ended up same track due to disregard of tokens; station master was suspended
मुरादाबाद रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला

खुर्जा में 29 दिसंबर को एक ही पटरी पर दो ट्रेनें आमने-सामने आने से पैदा हुई हादसे की नौबत का कारण टोकन की अनदेखी मानी गई है। इस गलती पर स्टेशन मास्टर को निलंबित किया जा चुका है। डीआरएम संग्रह मौर्य को हटाने के बाद अब खुर्जा सेक्शन में उस पुरातन टोकन व्यवस्था को भी खत्म कर दिया गया, जिसके प्रयोग से स्टेशन मास्टर और चालक के बीच ट्रेन आमद की सूचना का आदान-प्रदान होता था।

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अंग्रेजों के जमाने की यह टोकन व्यवस्था तब आधुनिक तकनीक के सिग्नल-संचार सिस्टम न होने की वजह से शुरू हुई थी। मुरादाबाद रेल मंडल के खुर्जा स्टेशन पर दो यात्री ट्रेनों की आमने-सामने भिड़ंत के हालात बन जाने से उत्तर रेल मुख्यालय ही नहीं, रेल मंत्रालय तक भी हड़कंप मच गया था।
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यही वजह थी कि एकाएक तत्कालीन डीआरएम को हटाने का फैसला लेना पड़ा था। गंभीर मामला होने के कारण हर पहलू की बारीकी से जांच अब भी जारी है। गहन जांच में स्पष्ट हुआ है कि खुर्जा स्टेशन पुरानी मैनुअल टोकन व्यवस्था से संचालित हो रहा था।
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उस दिन टोकन का आदान-प्रदान सुनिश्चित होने से पहले ही स्टेशन मास्टर ने प्वाइंट्समैन से फोन पर हुई बातचीत के आधार पर हापुड़ की ओर से आ रही ट्रेन को गुजरने की अनुमति दे दी थी, जबकि उस लाइन पर पहले से दूसरी यात्री ट्रेन थी। अब रेलवे ने खुर्जा में व्यवस्था बदल दी है।

ट्रैक पर ऑप्टीकल फाइबर केबल बिछाकर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल प्रणाली लागू कर दी गई है। डीआरएम विनीता श्रीवास्तव ने बताया कि अब खुर्जा स्टेशन पर भी स्टेशन मास्टर टोकन देने के बजाय सिग्नल देकर ट्रेनों का संचालन करेंगे। संरक्षा को लेकर सभी विभागों को सतर्कता के प्रति गंभीरता के निर्देश दिए गए हैं।

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कलर लाइट सिग्नल से तेजी से बदल रही है व्यवस्था
मुरादाबाद रेल मंडल में आधुनिक तकनीक के तेजी से इस्तेमाल के कारण खुर्जा सरीखे कुछ स्थानों पर ही प्राचीन टोकन व्यवस्था बची थी। नजीबाबाद से कोटद्वार और बालामऊ–सीतापुर–उन्नाव रेल मार्ग भी इसी सिस्टम पर निर्भर था। साल 2022 से इन रेल खंडों में इसे विदा कर आधुनिक सिग्नल व्यवस्था लागू कर दी गई। इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों का संचालन बढ़ने से यह बदलाव भी तेज हो गया।

रेलवे बोर्ड के आदेश, दुर्घटनाएं रोकने के लिए रात्रि गश्त करें अफसर
रेलवे बोर्ड के आदेश हैं कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभिन्न अनुभागों के अधिकारी अलग-अलग सेक्शन में रात्रि गश्त करें। हाल ही में इसे लेकर उत्तर रेलवे ने जानकारी साझा की है। जोनल मुख्यालय द्वारा बताया गया है कि 31 दिन में मुख्यालय स्तर पर 48,  मुरादाबाद रेल मंडल में 131, दिल्ली मंडल में 93, लखनऊ मंडल में 131, फिरोजपुर मंडल में 190, जम्मू मंडल में 23 रात्रि निरीक्षण किए गए हैं।

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