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UP: 'चूहों की काटी गर्दन...', पुलिस अधिकारी ने खुद को बताया कल्कि का अवतार; कहा- हवन से फिर जिंदा होंगे चूहे
Sat, 01 Feb 2025 03:13 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 01 Feb 2025 03:13 PM IST
सार
मुरादाबाद में एक पुलिस अधिकारी ने खुद को कल्कि का अवतार बताया। पुलिस अधिकारी ने चूहों की गर्दन काट दीं। कहा कि हवन से जीवित कर देंगे। इससे महकमे में खलबली मच गई। एसएसपी ने कहा कि पुलिस अधिकारी का स्वास्थ्य खराब है।
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Moradabad News Police Officer
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुरादाबाद जिले में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने अपने आवास पर चूहों की गर्दन काट दी। उन्होंने एक सिपाही को बुलाकर कहा कि हवन करेंगे तो चूहे फिर से जिंदा हो जाएंगे। उन्होंने सिपाही से यह भी कहा कि वह कल्कि के अवतार हैं। एक सप्ताह तक अधिकारी तरह-तरह की हरकतें करते रहे।
इसके बाद अफसरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सूचना पर पहुंचे परिजन उन्हें साथ ले गए। एसएसपी ने कहा कि अधिकारी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। दिल्ली निवासी एक पुलिस अधिकारी जिले में तैनात हैं।
पुलिस विभाग के सूत्रों का दावा है कि कुछ समय से उनकी गतिविधियां अजीब थीं। शुरुआत में तो किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन उनका व्यवहार लगातार बदलता गया। 26 जनवरी की परेड के लिए पुलिस लाइन में तैयारी चल रही थी।
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उसके तीन दिन पहले 23 जनवरी की रात वह अपनी गाड़ी लेकर मैदान में पहुंच गए। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने हंगामा कर दिया। इस दौरान अपने कपड़े उतार दिए और मिट्टी में लेट गए।
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इसके बाद अफसरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सूचना पर पहुंचे परिजन उन्हें साथ ले गए। एसएसपी ने कहा कि अधिकारी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। दिल्ली निवासी एक पुलिस अधिकारी जिले में तैनात हैं।
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पुलिस विभाग के सूत्रों का दावा है कि कुछ समय से उनकी गतिविधियां अजीब थीं। शुरुआत में तो किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन उनका व्यवहार लगातार बदलता गया। 26 जनवरी की परेड के लिए पुलिस लाइन में तैयारी चल रही थी।
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उसके तीन दिन पहले 23 जनवरी की रात वह अपनी गाड़ी लेकर मैदान में पहुंच गए। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने हंगामा कर दिया। इस दौरान अपने कपड़े उतार दिए और मिट्टी में लेट गए।
'सिपाही को दिखाए मरे हुए चूहे'
अधिकारियों ने उन्हें किसी तरह शांत कराकर आवास पर भेज दिया। 24 जनवरी को वह पुलिस लाइन के जीडी दफ्तर में पहुंच गए और वहां तैनात मुंशी का काम देख रहे एक सिपाही को अपने आवास पर ले गए। उसे मरे हुए चूहे दिखाए।
अधिकारियों ने उन्हें किसी तरह शांत कराकर आवास पर भेज दिया। 24 जनवरी को वह पुलिस लाइन के जीडी दफ्तर में पहुंच गए और वहां तैनात मुंशी का काम देख रहे एक सिपाही को अपने आवास पर ले गए। उसे मरे हुए चूहे दिखाए।
अधिकारी ने सिपाही से कहा कि हवन करेंगे तो यह चूहे जिंदा हो जाएंगे। अधिकारी की हरकतों को देखकर सिपाही भी घबरा गया। उसने पुलिस लाइन के आरआई को इसकी जानकारी दी और वहां से निकल गया। पुलिस अधिकारी की हरकतें यहीं नहीं रुकीं।
एसपी यातायात के दफ्तर में भी किया हंगामा
बताया जा रहा है कि पुलिस लाइन में एसपी यातायात के दफ्तर में जाकर भी हंगामा किया। कर्मचारियों ने रोकने का प्रयास किया तो तोड़फोड़ शुरू कर दी। एक महिला अधिकारी से भी अभद्रता की।
बताया जा रहा है कि पुलिस लाइन में एसपी यातायात के दफ्तर में जाकर भी हंगामा किया। कर्मचारियों ने रोकने का प्रयास किया तो तोड़फोड़ शुरू कर दी। एक महिला अधिकारी से भी अभद्रता की।
इसके बाद अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस अधिकारी को निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। मानसिक रोग विशेषज्ञों ने उनका इलाज किया। साथ ही उनके परिजनों को भी सूचना दी गई। तीन दिन पहले परिजन मुरादाबाद आकर पुलिस अधिकारी को अपने साथ दिल्ली ले गए। एसएसपी सतपाल अंतिल ने कहा कि जिन बातों की चर्चा की जा रही है, उनकी पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण अधिकारी अवकाश पर गए हैं।
काउंसिलिंग से भी नहीं हुआ सुधार
पुलिस अफसरों ने अधिकारी को इलाज के लिए शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। उनका यहां इलाज कराया गया और मानसिक रोग विशेषज्ञों ने चेकअप किए। काउंसिलिंग भी की गई। तीन दिन इलाज कराने के बाद भी उनकी गतिविधियां बढ़ती गईं। वह अस्पताल में भी रुक नहीं पा रहे थे। उनकी निगरानी के लिए पुलिस टीम अस्पताल में तैनात की गई। जब उन्हें यहां रोकना मुश्किल हो गया तो परिवार को बुलाकर उनके साथ भेज दिया गया।
पुलिस अफसरों ने अधिकारी को इलाज के लिए शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। उनका यहां इलाज कराया गया और मानसिक रोग विशेषज्ञों ने चेकअप किए। काउंसिलिंग भी की गई। तीन दिन इलाज कराने के बाद भी उनकी गतिविधियां बढ़ती गईं। वह अस्पताल में भी रुक नहीं पा रहे थे। उनकी निगरानी के लिए पुलिस टीम अस्पताल में तैनात की गई। जब उन्हें यहां रोकना मुश्किल हो गया तो परिवार को बुलाकर उनके साथ भेज दिया गया।
पुलिस अफसर के पिता रह चुके हैं प्रशासनिक अधिकारी
अपनी हरकतों से पुलिस अफसर और कर्मचारियों को परेशान करने वाले पुलिस अधिकारी के पिता भी प्रशासनिक अधिकारी चुके हैं। वह उच्च पदों पर रहे हैं। जिन पुलिसकर्मियों के साथ अफसर ने अभद्रता और मारपीट की है, उन्होंने भी मामला अधिकारी से जुड़ा होने के कारण कुछ बोलने से इन्कार कर दिया। अधिकारियों ने पुलिस अधिकारी को दस दिन के अवकाश पर भेजा है।
अपनी हरकतों से पुलिस अफसर और कर्मचारियों को परेशान करने वाले पुलिस अधिकारी के पिता भी प्रशासनिक अधिकारी चुके हैं। वह उच्च पदों पर रहे हैं। जिन पुलिसकर्मियों के साथ अफसर ने अभद्रता और मारपीट की है, उन्होंने भी मामला अधिकारी से जुड़ा होने के कारण कुछ बोलने से इन्कार कर दिया। अधिकारियों ने पुलिस अधिकारी को दस दिन के अवकाश पर भेजा है।
एक अधिकारी वाइपर से कर चुके हैं कर्मचारियों की पिटाई
पुलिस अधिकारी द्वारा कर्मचारियों के साथ मारपीट और अभद्रता का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक पुलिस अधिकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट कर चुके हैं। एसएसपी बंगले में 2013 में पुलिस अधिकारी ने कर्मचारियों को वाइपर से पीटा था। इस घटना में पुलिस अधिकारी को शासन ने निलंबित कर दिया था।
पुलिस अधिकारी द्वारा कर्मचारियों के साथ मारपीट और अभद्रता का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक पुलिस अधिकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट कर चुके हैं। एसएसपी बंगले में 2013 में पुलिस अधिकारी ने कर्मचारियों को वाइपर से पीटा था। इस घटना में पुलिस अधिकारी को शासन ने निलंबित कर दिया था।
इस तरह की हरकतों से मानसिक अवसाद के संकेत मिलते हैं। इसे मेनिया या एंग्जाइटी के रूप में समझा जा सकता है। अवसाद के कई कारण हो सकते हैं, उन्हें जानने के लिए संबंधित व्यक्ति की काउंसिलिंग जरूरी है। यह तय है कि लक्षण अचानक सामने नहीं आए होंगे, संबंधित व्यक्ति कई दिन से इससे जूझ रहा होगा। - डॉ. दिशांतर गोयल, मानसिक रोग विशेषज्ञ