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Moradabad News: प्रकाश एन्क्लेव में बंदरों का आतंक, घरों में कैद हुए लोग

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2026 02:33 AM IST
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Monkey menace in Prakash Enclave; residents confined to their homes.
मुरादाबाद। कांठ रोड स्थित प्रकाश एन्क्लेव कॉलोनी में बंदरों का आतंक एक बार फिर लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बन गया है। कॉलोनी की गलियों, छतों और घरों के आसपास दिनभर बंदरों के झुंड घूम रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि अभिभावकों ने बच्चों को घर से बाहर खेलना बंद करा दिया है। सुबह और शाम के समय सबसे ज्यादा दहशत रहती है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे घर से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि मई और जून में बंदरों के हमले में तीन लोग घायल हो चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि समस्या लेकर नगर निगम पहुंचे तो उन्हें वन विभाग भेज दिया गया। वन विभाग ने मामला नगर निगम का बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने का खामियाजा कॉलोनी के लोग भुगत रहे हैं। मजबूर होकर लोगों ने पहले अपने खर्चे पर बंदरों को पकड़वाने की व्यवस्था कराई थी, जिससे कुछ समय तक राहत मिली, लेकिन अब फिर बंदरों के झुंड कॉलोनी में सक्रिय हो गए हैं। लोग अब स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार का कहना है कि बंदरों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी वन विभाग की है। जल्द ही इस विषय में समन्वय कर कार्रवाई की जाएगी।
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बोले कॉलोनी के लोग
बंदरों के डर से बच्चों को घर के अंदर ही रखना पड़ रहा है। परिवारों ने बच्चों का अकेले बाहर निकलने से मना कर दिया है। हर समय किसी क अनहोनी का डर बना रहता है।
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- डॉ.राजीव चौधरी



कॉलोनी की समस्याओं को लेकर विभाग गंभीर नहीं हैं। कई बार स्ट्रीट लाइट खराब होने पर भी लोगों को अपने खर्चे से ठीक करानी पड़ती है। अब बंदरों की समस्या का समाधान खुद करना पड़ रहा है।
- कैलाश चंद्र



घर के पुरुष सदस्य काम पर बाहर चले जाते हैं, ऐसे में महिलाओं को पूरे दिन बंदरों के डर के साये में रहना पउ़ता है। कई बार बंदर घरों की छतों और बालकनी तक पहुंच जाते हैं।
- रेनू



सुबह और शाम के समय बंदरों का आतंक सबसे ज्यादा रहता है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे बाहर निकलने से डरते हैं। कई बार बंदर लोगों के हाथ से सामान छीन लेते हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द विशेष अभियान चलाकर बंदराें को पकड़वाने की मांग की है।
- ज्योति



महिलाओं और बुजुर्गाें के लिए खतरा सबसे ज्यादा है। बंदरों के झुंड अचानक घरों के बाहर आ जाते हैं, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार डर के कारण लोगों को जरूरी काम भी टालने पड़ते हैं।

- दीपा यादव



बंदरों की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो गई है। लोग सुबह की सैर और बच्चों को पार्क में खेलने भेजने से बच रहे हैं। कई बार बंदर घरों की छतों पर रखे सामान को नुकसान पहुंचा देते हैं।- प्रेम सिंह
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