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Moradabad News: पाकबड़ा में बंदरों का आतंक, दहशत में लोग
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पाकबड़ा। नगर पंचायत पाकबड़ा के विभिन्न मोहल्लों में बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। बड़ा मंदिर, होली वाला कुआं, शनिवार का बाजार, हाशमपुर चौराहा और भूड़ रोड समेत नगर के अधिकांश इलाकों में बंदरों के झुंड दिनभर घूमते रहते हैं। बंदरों के डर से बच्चों का अकेले घर से निकलना मुश्किल हो गया है। अभिभावकों को बच्चों को स्कूल तक छोड़ने के लिए साथ जाना पड़ रहा है। लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन से बंदरों को पकड़वाने की मांग की है।
नगर निवासी उस्मान अंसारी ने बताया कि सुबह के समय बड़ी संख्या में बंदर मोहल्लों में पहुंच जाते हैं। बच्चों को घर से बाहर भेजने में डर लगता है। स्कूल जाने वाले बच्चों के साथ परिवार के किसी बड़े सदस्य को भेजना पड़ता है। रास्ते में भी बंदरों का झुंड देखकर बच्चे डर जाते हैं।
गौरव गुप्ता ने बताया कि सुबह के समय बंदरों की संख्या इतनी अधिक हो जाती है कि घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। छोटे बच्चों पर बंदर कई बार हमला कर उन्हें काट भी चुके हैं। बंदरों का पूरा झुंड मोहल्ले में घूमता रहता है।
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हरपाल सिंह दिवाकर ने बताया कि सुबह से शाम तक बंदरों का आतंक बना रहता है। बड़ा मंदिर परिसर में दिनभर बंदरों का जमावड़ा रहता है। बंदर बुजुर्गों और महिलाओं के हाथ से सामान छीनकर भाग जाते हैं।
डॉक्टर इरफान सैफी ने बताया कि घरों के सामने बंदरों के झुंड बैठे रहते हैं। छोटे बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं, इसलिए परिवार के लोगों को उन्हें स्कूल तक छोड़ने जाना पड़ता है।
मोहम्मद जावेद ने बताया कि बंदर दिनभर सड़कों पर घूमते रहते हैं और रात में भी छतों पर शोर मचाते हैं। इससे लोगों की नींद तक प्रभावित हो रही है। नगरवासियों ने बंदरों को पकड़ने के लिए प्रशासन से अभियान चलाने की मांग की है।
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नगर निवासी उस्मान अंसारी ने बताया कि सुबह के समय बड़ी संख्या में बंदर मोहल्लों में पहुंच जाते हैं। बच्चों को घर से बाहर भेजने में डर लगता है। स्कूल जाने वाले बच्चों के साथ परिवार के किसी बड़े सदस्य को भेजना पड़ता है। रास्ते में भी बंदरों का झुंड देखकर बच्चे डर जाते हैं।
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गौरव गुप्ता ने बताया कि सुबह के समय बंदरों की संख्या इतनी अधिक हो जाती है कि घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। छोटे बच्चों पर बंदर कई बार हमला कर उन्हें काट भी चुके हैं। बंदरों का पूरा झुंड मोहल्ले में घूमता रहता है।
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हरपाल सिंह दिवाकर ने बताया कि सुबह से शाम तक बंदरों का आतंक बना रहता है। बड़ा मंदिर परिसर में दिनभर बंदरों का जमावड़ा रहता है। बंदर बुजुर्गों और महिलाओं के हाथ से सामान छीनकर भाग जाते हैं।
डॉक्टर इरफान सैफी ने बताया कि घरों के सामने बंदरों के झुंड बैठे रहते हैं। छोटे बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं, इसलिए परिवार के लोगों को उन्हें स्कूल तक छोड़ने जाना पड़ता है।
मोहम्मद जावेद ने बताया कि बंदर दिनभर सड़कों पर घूमते रहते हैं और रात में भी छतों पर शोर मचाते हैं। इससे लोगों की नींद तक प्रभावित हो रही है। नगरवासियों ने बंदरों को पकड़ने के लिए प्रशासन से अभियान चलाने की मांग की है।