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Moradabad News: दस साल में सिर्फ चार फ्लैट ही आवंटित कर सका एमडीए
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मुरादाबाद। एमडीए की ओर से ढक्का गांव में विकसित किया गया अलकनंदा एन्क्लेव एक दशक बाद भी वीरान है। कहने को तो यहां 176 चार मंजिला फ्लैट बनाए गए हैं लेकिन पिछले एक दशक में सिर्फ चार लोगों को ही फ्लैट आवंटित किए जा सके हैं, 172 फ्लैट अभी भी खाली हैं, जिन्हें कई बेसहारा परिवारों में अनाधिकृत रूप से अपना आशियाना बना लिया है।
खाली पड़े होने के कारण ये आलीशान फ्लैट अब जर्जर होने लगे हैं।
उत्तराखंड की जीवनदायिनी कहलाने वाली अलकनंदा नदी के नाम पर विकसित किए गए अलकनंदा एन्क्लेव में 22 ब्लॉक है, एक ब्लॉक में दोनों तरफ आठ फ्लैट हैं। कुल फ्लैट 176 हैं। एक फ्लैट में दो कक्ष, बाथरूम, टॉयलेट, स्टोर, किचन आदि हैं। अलकनंदा एन्क्लेव को समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2014-15 में समाजवादी अफोर्डेबल फ्लैट के तौर पर कम आय वालों (एलआईजी) के लिए बनाए गए, हालांकि इनका आवंटन सरकार बदलने के बाद वर्ष 2018-19 में शुरू किया गया था। एमडीए ने करोड़ो रुपये की लागत से फ्लैट तो तैयार करा दिए, इनमें बिजली की वायरिंग, सीवरेज नेटवर्क, ओवरहेड टैंक आदि की व्यवस्था की लेकिन इसके बाद इन्हें भुला दिया।
बीते एक दशक के दौरान न इस पूरी कॉलोनी में न तो बिजली पहुंच सकी और न ही पेयजल। यहां पर चार बिजली की ट्रांसफार्मर की व्यवस्था भी की गई थी लेकिन एक छोटे ट्रांसफार्मर को छोड़कर अन्य ट्रांसफार्मर कॉलोनी तक पहुंचे तो लेकिन उन्हें तय स्थल (फाउंडेशन) पर रखा नहीं जा सका। दो ट्रांसफार्मर तो सालों से एक स्थान पर जमीन पर रखे हुए हैं।
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खाली पड़े होने के कारण ये आलीशान फ्लैट अब जर्जर होने लगे हैं।
उत्तराखंड की जीवनदायिनी कहलाने वाली अलकनंदा नदी के नाम पर विकसित किए गए अलकनंदा एन्क्लेव में 22 ब्लॉक है, एक ब्लॉक में दोनों तरफ आठ फ्लैट हैं। कुल फ्लैट 176 हैं। एक फ्लैट में दो कक्ष, बाथरूम, टॉयलेट, स्टोर, किचन आदि हैं। अलकनंदा एन्क्लेव को समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2014-15 में समाजवादी अफोर्डेबल फ्लैट के तौर पर कम आय वालों (एलआईजी) के लिए बनाए गए, हालांकि इनका आवंटन सरकार बदलने के बाद वर्ष 2018-19 में शुरू किया गया था। एमडीए ने करोड़ो रुपये की लागत से फ्लैट तो तैयार करा दिए, इनमें बिजली की वायरिंग, सीवरेज नेटवर्क, ओवरहेड टैंक आदि की व्यवस्था की लेकिन इसके बाद इन्हें भुला दिया।
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बीते एक दशक के दौरान न इस पूरी कॉलोनी में न तो बिजली पहुंच सकी और न ही पेयजल। यहां पर चार बिजली की ट्रांसफार्मर की व्यवस्था भी की गई थी लेकिन एक छोटे ट्रांसफार्मर को छोड़कर अन्य ट्रांसफार्मर कॉलोनी तक पहुंचे तो लेकिन उन्हें तय स्थल (फाउंडेशन) पर रखा नहीं जा सका। दो ट्रांसफार्मर तो सालों से एक स्थान पर जमीन पर रखे हुए हैं।
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