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मरीज कम तो लापरवाह हुए हम, मास्क-सैनिटाइजर की बिक्री में नहीं रहा दम
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मुरादाबाद। जून में मरीजों की संख्या में कमी जरूर आई है, लेकिन कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। मरीज कम हुए तो हम लापरवाह अधिक हो गए हैं। टूटती सामाजिक दूरी के बीच मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल कम होने लगा है। मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री में सत्तर फीसदी की गिरावट आई है। अप्रैल-मई की तुलना में सिर्फ बीस से तीस फीसदी ही डिमांड रह गई है। ऐसे में ये लापरवाही संक्रमण को फिर से रफ्तार देने का काम करेगी।
साल की शुरुआत में धीमी पड़ी कोरोना की रफ्तार मार्च में बढ़ने शुरू हो गई थी। अप्रैल में रफ्तार गई गुना बढ़ गई थी। 16087 संक्रमित मरीज पाए गए। मई में संक्रमित मरीजों की संख्या 10363 रही। संक्रमण के तेजी से फैलाव से कोविड की दवाएं, मास्क, सैनिटाइजर के लिए मारामारी रही। लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन मई के आखिरी हफ्ते में संक्रमण की रफ्तार सुस्त पड़ने लगी थी। इसका असर जून में देखने को मिला। जून में सिर्फ 131 पॉजिटिव केस मिले। संक्रमितों की संख्या कम होने पर बाजार खुल गए। जहां एक बार फिर से पहले जैसी भीड़भाड़ दिखने लगी है। पॉजिटिव केस कम होने को कोरोना का खात्मा मान बैठे हैं। सामाजिक दूरी टूटने लगी है। चेहरों से मास्क गायब होने लगे हैं। वहीं सैनिटाइजर तो भूल से गए हैं। यही वजह है कि अप्रैल-मई की तुलना में मास्क और सैनिटाइजर की मांग सत्तर प्रतिशत कम हो गई है। अब सिर्फ 20 से 30 फीसदी की मांग रह गई है। इसमें भी सैनिटाइजर की डिमांड नाम मात्र की है।
- मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री में सत्तर प्रतिशत से अधिक गिरावट आई है। अप्रैल और मई में मास्क और सैनिटाइजर की डिमांड पूरी करना मुश्किल था। फुटकर दुकानों से 20 से 30 फीसदी की मांग हो रही है। - संजय अग्रवाल, एसआर सर्जिकल
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- अप्रैल और मई में मास्क और सैनिटाइजर की खपत अधिक थी। लेकिन अब तो सत्तर फीसदी की गिरावट आ गई है। सैनिटाइजर की बिक्री तो बंद सी हो गई। जागरूक लोग ही मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। - विपुल अग्रवाल, गर्ग सर्जिकल
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साल की शुरुआत में धीमी पड़ी कोरोना की रफ्तार मार्च में बढ़ने शुरू हो गई थी। अप्रैल में रफ्तार गई गुना बढ़ गई थी। 16087 संक्रमित मरीज पाए गए। मई में संक्रमित मरीजों की संख्या 10363 रही। संक्रमण के तेजी से फैलाव से कोविड की दवाएं, मास्क, सैनिटाइजर के लिए मारामारी रही। लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन मई के आखिरी हफ्ते में संक्रमण की रफ्तार सुस्त पड़ने लगी थी। इसका असर जून में देखने को मिला। जून में सिर्फ 131 पॉजिटिव केस मिले। संक्रमितों की संख्या कम होने पर बाजार खुल गए। जहां एक बार फिर से पहले जैसी भीड़भाड़ दिखने लगी है। पॉजिटिव केस कम होने को कोरोना का खात्मा मान बैठे हैं। सामाजिक दूरी टूटने लगी है। चेहरों से मास्क गायब होने लगे हैं। वहीं सैनिटाइजर तो भूल से गए हैं। यही वजह है कि अप्रैल-मई की तुलना में मास्क और सैनिटाइजर की मांग सत्तर प्रतिशत कम हो गई है। अब सिर्फ 20 से 30 फीसदी की मांग रह गई है। इसमें भी सैनिटाइजर की डिमांड नाम मात्र की है।
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- मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री में सत्तर प्रतिशत से अधिक गिरावट आई है। अप्रैल और मई में मास्क और सैनिटाइजर की डिमांड पूरी करना मुश्किल था। फुटकर दुकानों से 20 से 30 फीसदी की मांग हो रही है। - संजय अग्रवाल, एसआर सर्जिकल
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- अप्रैल और मई में मास्क और सैनिटाइजर की खपत अधिक थी। लेकिन अब तो सत्तर फीसदी की गिरावट आ गई है। सैनिटाइजर की बिक्री तो बंद सी हो गई। जागरूक लोग ही मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। - विपुल अग्रवाल, गर्ग सर्जिकल