फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Major boost for Moradabad exporters... Trade with the US to now take place in rupees.

Moradabad News: मुरादाबाद के निर्यातकों को बड़ा लाभ... अब अमेरिका के साथ रुपये में होगा कारोबार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2026 02:24 AM IST
विज्ञापन
Major boost for Moradabad exporters... Trade with the US to now take place in rupees.
शिवम वर्मा
विज्ञापन


मुरादाबाद। मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए अच्छी खबर है। अब अमेरिकी खरीदारों से निर्यात का भुगतान भारतीय रुपये में लिया जा सकेगा। निर्यातकों को केवल डॉलर, यूरो या पाउंड पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने विदेश व्यापार नीति-2023 में बदलाव किया है। इसके तहत तय नियमों के अनुसार रुपये में मिली निर्यात की रकम को विदेशी मुद्रा में मिली रकम के बराबर माना जाएगा।



मुरादाबाद से हर साल 10 हजार करोड़ का निर्यात होता है। इसमें से करीब सात हजार करोड़ का निर्यात अमेरिका के साथ होता है। ऐसे में नए बदलाव का फायदा उन निर्यातकों को मिलेगा, जिनका ग्राहक और बैंक रुपये में भुगतान की व्यवस्था के लिए तैयार हों। भुगतान भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार अधिकृत बैंक के माध्यम से ही होगा। इसलिए हर विदेशी खरीदार से सीधे रुपये में भुगतान लेना संभव नहीं होगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने जुलाई 2022 में विशेष रुपया वोस्ट्रो खाता व्यवस्था शुरू की थी। इसके जरिये रूस, मलेशिया, सिंगापूर समेत 34 देशों के बैंकों के साथ रुपये में लेनदेन किया जा सकता है, लेकिन मुरादाबाद का अधिकांश कारोबार अमेरिका व यूरोप के साथ है। ऐसे में अब डीजीएफटी ने विदेश व्यापार नीति के नियमों को भी इस व्यवस्था के अनुरूप कर दिया है। नए बदलाव में निर्यातक और विदेशी खरीदार चाहें तो तय नियमों के तहत निर्यात का सौदा और बिल भारतीय रुपये में भी तय कर सकते हैं। भुगतान भी निर्धारित बैंकिंग व्यवस्था के जरिये रुपये में लिया जा सकेगा।
विज्ञापन




डॉलर की दर बदलने से होने वाला नुकसान घटेगा

मुरादाबाद से अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन और मध्य-पूर्व समेत कई देशों में हस्तशिल्प का निर्यात होता है। आमतौर पर भुगतान डॉलर, यूरो या पाउंड में मिलता है। कई बार माल भेजने के 90 से 120 दिन बाद भुगतान आता है। इस बीच विदेशी मुद्रा की दर बदलने से निर्यातक को मिलने वाली रकम घट-बढ़ सकती है। अगर खरीदार रुपये में भुगतान करने को तैयार है तो इस उतार-चढ़ाव का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए खरीदार के बैंक और भारतीय बैंक के बीच रुपये में भुगतान की सुविधा होना जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन




हर खरीदार रुपये में भुगतान नहीं कर सकेगा

नई व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका, ब्रिटेन या किसी दूसरे देश का हर खरीदार अब आसानी से रुपये में भुगतान कर देगा। रुपये में भुगतान के लिए बैंकिंग व्यवस्था जरूरी है। निर्यातक को नया सौदा करने से पहले अपने अधिकृत बैंक से जानकारी लेनी होगी कि संबंधित खरीदार और उसके बैंक से रुपये में भुगतान लिया जा सकता है या नहीं। भारतीय बैंक दूसरे देशों के बैंकों के लिए विशेष रुपया वोस्ट्रो खाते खोल सकते हैं। इन खातों में रखी रुपये की रकम से भारतीय निर्यातकों को भुगतान किया जा सकता है। इसके बावजूद निर्यात के कागजात और बैंक से जुड़ी दूसरी जरूरी प्रक्रिया पहले की तरह पूरी करनी होगी।



-------------------

निर्यातकों के कोट्स (फोटो)



रुपये में भुगतान का विकल्प हमारे लिए उपयोगी हो सकता है। खासकर तब, जब ऑर्डर मिलने और भुगतान आने के बीच काफी समय हो। इस दौरान डॉलर की दर बदलती रहती है। अगर खरीदार और बैंक दोनों तैयार हों तो रुपये में भुगतान लेने से जोखिम कम करने में मदद मिलेगी।

- विशाल अग्रवाल, महासचिव, ईवीए


छोटे निर्यातकों के लिए विदेशी मुद्रा की दर में बदलाव हमेशा चिंता का विषय रहता है। रुपये में भुगतान का विकल्प मिलने से कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन बैंक को पूरी प्रक्रिया आसान तरीके से समझानी होगी। खरीदार के बैंक से भुगतान कैसे आएगा और उसका हिसाब कैसे दर्ज होगा, यह साफ होना जरूरी है।

- आलोक अग्रवाल, प्रमुख, फियो
डॉलर में कारोबार अचानक बंद नहीं होगा और इसकी जरूरत भी नहीं है। रुपये में भुगतान को एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में देखना चाहिए। जिस खरीदार को डॉलर में भुगतान करना सुविधाजनक है, उसके साथ वही व्यवस्था रहेगी। जहां खरीदार रुपये में भुगतान स्वीकार करे, वहां नया विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है।




- अब्दुल अजीम, निर्यातक



नीति में बदलाव अच्छी शुरुआत है, लेकिन असली फायदा तभी मिलेगा जब इसकी प्रक्रिया जमीन पर आसान हो। निर्यातकों को चालान बनाने, बैंक के जरिये भुगतान लेने और निर्यात का प्रमाण दर्ज कराने की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। बैंक और निर्यात संगठनों को इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम कराने चाहिए।

- जेपी सिंह, अध्यक्ष, यस
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed