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Moradabad News: मदरसा के फंडिंग की जांच अन्य एजेंसी करेगी, शासन को भेजी सिफारिश
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मुरादाबाद। विवादों में घिरे पाकबड़ा स्थित मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराने के लिए जिला प्रशासन ने शासन को सिफारिश भेजी है। बताया जा रहा है कि पेटीएम सहित अन्य लेनदेन का रिकाॅर्ड स्थानीय स्तर पर नहीं मिल रहा है। इस मामले में सक्षम एजेंसी ही लेनदेन का पता लगा सकती है।
पाकबड़ा के लोधीपुर राजपूत स्थित मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात के प्रबंधन पर छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगने के आरोप की जांच के दौरान विदेशी फंडिंग की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद डीएम अनुज सिंह ने एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में कमेटी एक गठित कर दी। कमेटी ने मदरसा प्रबंधक से पहले तीन साल का ब्यौरा मांगा था। चार खातों की जांच में कमेटी के हाथ कुछ खास नहीं लगा। इसके बाद समिति ने मदरसा संचालक से पैन कार्ड मांगकर जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान समिति ने मदरसे का दस साल का ब्यौरा बैंकों से मंगाए गए। इसमें पेटीएम का काफी धन खातों के रिकाॅर्ड में दर्शाया गया है। एक बार में 50 हजार से अधिक कैश खाते में जमा किए गए थे, जबकि नगद पैसा समिति में नहीं लिए जा सकते है। पैसा किन लोगों ने मदरसे को दिया है। इस बारे में बैंकों से पूरा रिकाॅर्ड नहीं मिल सका। समिति का आकलन है कि मदरसा प्रबंधन ने करोड़ों का लेनदेन किया है।
इस मामले में ईडी सहित अन्य सक्षम एजेंसी ही पूरा रिकार्ड खंगाल सकती है। कमेटी में शामिल मुख्य कोषाधिकारी रेनू बौद्ध, एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बैठक करने के बाद पूरा मामला शासन को भेजने का निर्णय लिया। एडीएम प्रशासन संगीता गौतम ने बताया कि इस मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। शासन ही इस मामले में अंतिम निर्णय लेगा।
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पाकबड़ा के लोधीपुर राजपूत स्थित मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात के प्रबंधन पर छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगने के आरोप की जांच के दौरान विदेशी फंडिंग की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद डीएम अनुज सिंह ने एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में कमेटी एक गठित कर दी। कमेटी ने मदरसा प्रबंधक से पहले तीन साल का ब्यौरा मांगा था। चार खातों की जांच में कमेटी के हाथ कुछ खास नहीं लगा। इसके बाद समिति ने मदरसा संचालक से पैन कार्ड मांगकर जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान समिति ने मदरसे का दस साल का ब्यौरा बैंकों से मंगाए गए। इसमें पेटीएम का काफी धन खातों के रिकाॅर्ड में दर्शाया गया है। एक बार में 50 हजार से अधिक कैश खाते में जमा किए गए थे, जबकि नगद पैसा समिति में नहीं लिए जा सकते है। पैसा किन लोगों ने मदरसे को दिया है। इस बारे में बैंकों से पूरा रिकाॅर्ड नहीं मिल सका। समिति का आकलन है कि मदरसा प्रबंधन ने करोड़ों का लेनदेन किया है।
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इस मामले में ईडी सहित अन्य सक्षम एजेंसी ही पूरा रिकार्ड खंगाल सकती है। कमेटी में शामिल मुख्य कोषाधिकारी रेनू बौद्ध, एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बैठक करने के बाद पूरा मामला शासन को भेजने का निर्णय लिया। एडीएम प्रशासन संगीता गौतम ने बताया कि इस मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। शासन ही इस मामले में अंतिम निर्णय लेगा।
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