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आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म में दोषी को आजीवन कारावास
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मुरादाबाद। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/ एडीजे कोर्ट-3 सुभाष सिंह की अदालत ने बुधवार को ठाकुरद्वारा के पौने छह साल पुराने आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने मुलजिम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि दोषी को 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित भी किया है।
समाज को झकझोर देने वाली यह घटना ठाकुरद्वारा थानाक्षेत्र के एक गांव में पांच फरवरी 2015 की रात दस बजे की है। घटना के समय आठ साल की बच्ची अपनी मां के साथ घर में सो रही थी। उसके पिता अपने चाचा के घर मोबाइल चार्ज करने गए थे। मोबाइल चार्ज करने के बाद पिता घर लौटे तो बेटी गायब थी। इसके बाद बेटी की तलाश की गई। गांव के बाहर नहर किनारे बच्ची बेहोशी की हालत में पड़ी मिली थी। परिजनों की सूचना पर 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची थी और बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई थी। मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। पिता की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया था। पुलिस की जांच पड़ताल और तफ्तीश में गांव का ही परचून की दुकान चलाने वाले योगेश का नाम सामने आया था। पुलिस ने योगेश को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया था। उसने पुलिस को बताया था कि बच्ची उसकी दुकान पर सामान लेने आती थी। तब से ही वह उस पर बदनियत रखता था। वह बच्ची को घर से उठाकर नहर किनारे ले गया और वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया। तब से आरोपी जेल में बंद है। पुलिस ने तफ्तीश पूरी करने के बाद आरोप पत्र भी अदालत में दाखिल कर दिया था। इस केस की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/ एडीजे कोर्ट-3 सुभाष सिंह की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर से एडीजीसी सुरेश सिंह ने पक्ष रखा और मुलजिम को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने, मेडिकल रिपोर्ट, साक्ष्य, विवेचना, गवाहों की गवाही और पीड़िता के बयानों के आधार पर मुलजिम योगेश को दुष्कर्म की घटना में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास व पचास हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके अलावा अदालत ने कहा है कि दुष्कर्म की घटना से पीड़ित को मानसिक व भावनात्मक क्षति हुई है। उसके एवज में अर्थदंड जमा होने पर संपूर्ण धनराशि बतौर प्रतिकूल के रूप में केस के वादी एवं पीड़ित के पिता को दी जाएगा। वो पीड़ित की देखरेख के लिए अर्थदंड की धनराशि प्राप्त करने का हकदार होगा।
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समाज को झकझोर देने वाली यह घटना ठाकुरद्वारा थानाक्षेत्र के एक गांव में पांच फरवरी 2015 की रात दस बजे की है। घटना के समय आठ साल की बच्ची अपनी मां के साथ घर में सो रही थी। उसके पिता अपने चाचा के घर मोबाइल चार्ज करने गए थे। मोबाइल चार्ज करने के बाद पिता घर लौटे तो बेटी गायब थी। इसके बाद बेटी की तलाश की गई। गांव के बाहर नहर किनारे बच्ची बेहोशी की हालत में पड़ी मिली थी। परिजनों की सूचना पर 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची थी और बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई थी। मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। पिता की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया था। पुलिस की जांच पड़ताल और तफ्तीश में गांव का ही परचून की दुकान चलाने वाले योगेश का नाम सामने आया था। पुलिस ने योगेश को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया था। उसने पुलिस को बताया था कि बच्ची उसकी दुकान पर सामान लेने आती थी। तब से ही वह उस पर बदनियत रखता था। वह बच्ची को घर से उठाकर नहर किनारे ले गया और वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया। तब से आरोपी जेल में बंद है। पुलिस ने तफ्तीश पूरी करने के बाद आरोप पत्र भी अदालत में दाखिल कर दिया था। इस केस की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/ एडीजे कोर्ट-3 सुभाष सिंह की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर से एडीजीसी सुरेश सिंह ने पक्ष रखा और मुलजिम को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने, मेडिकल रिपोर्ट, साक्ष्य, विवेचना, गवाहों की गवाही और पीड़िता के बयानों के आधार पर मुलजिम योगेश को दुष्कर्म की घटना में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास व पचास हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके अलावा अदालत ने कहा है कि दुष्कर्म की घटना से पीड़ित को मानसिक व भावनात्मक क्षति हुई है। उसके एवज में अर्थदंड जमा होने पर संपूर्ण धनराशि बतौर प्रतिकूल के रूप में केस के वादी एवं पीड़ित के पिता को दी जाएगा। वो पीड़ित की देखरेख के लिए अर्थदंड की धनराशि प्राप्त करने का हकदार होगा।
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