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Moradabad News: अब झुंड पर भी हमला कर रहे तेंदुए...गर्दन बचाना मुश्किल
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मुरादाबाद। तेंदुओं के बढ़ते हमलों को देख ग्रामीण खेतों पर समूह में जाने लगे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी आदमखोर के हमले थम नहीं रहे हैं। मंगलवार को बहापुर बलिया गांव में जब तेंदुए ने खेत में काम कर रहीं मिथिलेश पर हमला किया तो उस समय उनके पति समेत आसपास नौ लोग थे। 18 अगस्त को इसी गांव में जब ब्रह्मो देवी पर हमला किया था तब भी बीस लोग आसपास थे। लेकिन आदमखोर तेंदुआ फिर भी नहीं घबराया। तेंदुआ गर्दन पकड़ता है और स्वांस नली को तोड़ देता है। तीन अगस्त से 25 अगस्त तक तेंदुए ने तीन महिलाओं की जान ली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक तीनों की ही गर्दन पकड़ी और स्वांस नली तोड़ डाली।
ठाकुरद्वारा को तेंदुआ प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। इस इलाके के 36 गांव ऐसे हैं जहां तेंदुआ अक्सर आबादी या जंगल में नजर आता है। वन विभाग भी इन गांवों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है कि समूह बनाकर खेतों पर जाएं। शोर करते रहें। तेंदुओं की बढ़ती दहशत के बीच ग्रामीणों ने समूह बनाकर जाना भी शुरू कर दिया है। लोग अब अकेले खेतों पर जाने से बच रहे हैं। लेकिन तेंदुए फिर भी नहीं डर रहे। बाहपुर बलिया गांव निवासी बृजपाल सिंह ने बताया कि खेत पर नौ लोग थे। लेकिन तेंदुए ने फिर भी मिथिलेश पर हमला कर दिया । दीवान सिंह और नन्हें सिंह ने बताया कि सभी पास-पास खड़े थे। ऐसा भी नहीं है कि कोई दूरी रही हो। तेजी से हमला किया है। तेंदुए ने मिथिलेस की गर्दन पकड़ ली थी और खेत के भीतर ले जाने लगा था। जब लोग दौड़े तो वह छोेड़कर भाग गया। लेकिन तब तक मौत हो गई थी।
गर्दन पर मोटा कपड़ा बांधकर जाएं लोग
मुरादाबाद। लगातार बढ़ते हमलों के बीच वन विभाग के अफसर लोगों को बता रहे हैं कि जब भी खेतों पर जाएं तो मोटा कपड़ा बांधकर जाएं। क्योंकि तेंदुआ गर्दन ही पकड़ रहा है। जब कपड़ा मोटा होगा तो उसके दांत स्वांस नली तक नहीं पहुंच सकेंगे। डीएफओ डा. विनय कुमार सिंह का कहना है कि तेंदुआ गर्दन ही पकड़ता है। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि खेतों पर काम करते समय गर्दन पर मोटा कपड़ा पहने रहें। साथ ही शोेर भी मचाते रहें। खेतों पर काम करते समय एक-दूसरे से दूरी न बनाएं। लगातार आवाज करते रहें और आसपास नजर बनाए रखें।
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वर्जन
मंगलवार की घटना दुखद है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि बरसात के बाद समूह बनाकर भी खेतों में न जाएं। मौसम गर्म होने पर ही खेतों में जाएं। हाथ में दरांत या लाठी जरूर रखें। खेतों में लगातार शोर करते रहें। ठाकुरद्वारा के 15 गांवों में 21 पिंजरे लगाए गए हैं।
- डॉ. विनय कुमार सिंह, डीएफओ
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ठाकुरद्वारा को तेंदुआ प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। इस इलाके के 36 गांव ऐसे हैं जहां तेंदुआ अक्सर आबादी या जंगल में नजर आता है। वन विभाग भी इन गांवों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है कि समूह बनाकर खेतों पर जाएं। शोर करते रहें। तेंदुओं की बढ़ती दहशत के बीच ग्रामीणों ने समूह बनाकर जाना भी शुरू कर दिया है। लोग अब अकेले खेतों पर जाने से बच रहे हैं। लेकिन तेंदुए फिर भी नहीं डर रहे। बाहपुर बलिया गांव निवासी बृजपाल सिंह ने बताया कि खेत पर नौ लोग थे। लेकिन तेंदुए ने फिर भी मिथिलेश पर हमला कर दिया । दीवान सिंह और नन्हें सिंह ने बताया कि सभी पास-पास खड़े थे। ऐसा भी नहीं है कि कोई दूरी रही हो। तेजी से हमला किया है। तेंदुए ने मिथिलेस की गर्दन पकड़ ली थी और खेत के भीतर ले जाने लगा था। जब लोग दौड़े तो वह छोेड़कर भाग गया। लेकिन तब तक मौत हो गई थी।
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गर्दन पर मोटा कपड़ा बांधकर जाएं लोग
मुरादाबाद। लगातार बढ़ते हमलों के बीच वन विभाग के अफसर लोगों को बता रहे हैं कि जब भी खेतों पर जाएं तो मोटा कपड़ा बांधकर जाएं। क्योंकि तेंदुआ गर्दन ही पकड़ रहा है। जब कपड़ा मोटा होगा तो उसके दांत स्वांस नली तक नहीं पहुंच सकेंगे। डीएफओ डा. विनय कुमार सिंह का कहना है कि तेंदुआ गर्दन ही पकड़ता है। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि खेतों पर काम करते समय गर्दन पर मोटा कपड़ा पहने रहें। साथ ही शोेर भी मचाते रहें। खेतों पर काम करते समय एक-दूसरे से दूरी न बनाएं। लगातार आवाज करते रहें और आसपास नजर बनाए रखें।
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मंगलवार की घटना दुखद है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि बरसात के बाद समूह बनाकर भी खेतों में न जाएं। मौसम गर्म होने पर ही खेतों में जाएं। हाथ में दरांत या लाठी जरूर रखें। खेतों में लगातार शोर करते रहें। ठाकुरद्वारा के 15 गांवों में 21 पिंजरे लगाए गए हैं।
- डॉ. विनय कुमार सिंह, डीएफओ