{"_id":"6a5d378d777090d38b02f178","slug":"leopard-launches-a-life-threatening-attack-on-a-young-woman-cutting-fodder-in-the-raibhud-forest-thakurdwara-news-c-279-1-mo11005-116337-2026-07-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: राईभूड़ के जंगल में चारा काट रही युवती पर तेंदुए ने किया जानलेवा हमला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: राईभूड़ के जंगल में चारा काट रही युवती पर तेंदुए ने किया जानलेवा हमला
विज्ञापन
माता-पिता ने ग्रामीणों की मदद से बचाया, जिला अस्पताल में भर्ती, गांव में दहशत, वन विभाग की टीम ने की कांबिंग
ठाकुरद्वारा। गांव राईभूड़ में रविवार को जंगल में माता-पिता के साथ चारा काटने गई युवती पर तेंदुए ने जानलेवा हमला कर दिया। माता-पिता ने शोर मचाकर बेटी को ग्रामीणों की मदद से उसके चंगुल से छुड़ाया। युवती का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
गांव निवासी मंजू (27) अपने पिता अमर सिंह सैनी और मां मुन्नी देवी के साथ दोपहर करीब 1:30 बजे जंगल में चारा काटने के लिए गई थी। वह अपने खेत में चारा काट रही थी। उसके माता-पिता भी कुछ दूरी पर काम कर रहे थे। इसी दाैरान अचानक तेंदुआ आया और मंजू पर पीछे से हमला कर दिया। मंजू की गर्दन, सिर, कनपटी और बांह पर पंजे और मुंह से कई बार किए। मंजू ने शोर मचाते हुए दरांती से बचाव के लिए तेंदुए से संघर्ष किया। उसकी चीख सुनकर उसके माता-पिता दौड़कर आए और उन्होंने शोर मचाया। आसपास खेतों में काम कर रहे किसान भी डंडे लेकर वहां पहुंच गए। उन्होंने किसी तरह मंजू को तेंदुए के चंगुल से छुड़ाया और उसको भगाया।
मंजू के चचेरे भाई जोगिंदर सिंह ने बताया कि हमले में घायल मंजू को पहले परिजन मलकपुर सेमली के निजी अस्पताल में ले गए, वहां उसे दिखाया। वहां से डायल 112 की पुलिस ने सीएचसी डिलारी में भर्ती कराया। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। घटना से राईभूड़ और आसपास के गांवों में दहशत है।
विज्ञापन
सूचना पर वन विभाग की टीम गांव में पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके पर तेंदुए के पंजों के निशान मिले। जिससे हमला तेंदुए के द्वारा करने की पुष्टि हुई। वन विभाग के दरोगा पीयूष जोशी और मदन सिंह की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर तेंदुए की तलाश में कांबिंग की। ग्रामीणों को तेंदुए से बचाव के लिए जागरूक किया। ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम से तेंदुए को पकड़ने और पिंजरा लगाने की मांग की है। वन विभाग के रेंजर रवि कुमार गंगवार ने बताया कि वन विभाग की टीम तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। शीघ्र वहां पर तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा।
मंजू भाई का फर्ज निभाते हुए माता-पिता के काम में बंटाती है हाथ
ठाकुरद्वारा। मंजू के कोई सगा भाई नहीं है। उसकी दो बड़ी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। मंजू के चचेरे भाई जोगिंदर सिंह ने बताया कि मंजू ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली है। माता-पिता वृद्ध हो गए हैं, इसलिए वह उनका खेती और अन्य कार्यों में सहयोग करती है। संवाद
एक वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने घर में कैद कर लिया था तेंदुए को
ठाकुरद्वारा। गांव राईभूड़ के मजरे में एक वर्ष पूर्व तेंदुआ गांव के मोहित यादव के घर में घुस गया था। उसने पशुशाला में घुसकर हमला करने की कोशिश की जिस पर उसे मोहित यादव ने कमरे में बंद कर दिया था। बाद में वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़ लिया था। ग्रामीणों का कहना है कि राईभूड़ रामगंगा नदी के पास स्थित है, इसलिए तेंदुए गांव और आसपास के जंगल में घूमते हुए देखे जाते हैं। संवाद
तेंदुए के हमले में हो चुकी है दो बच्चों की मौत
ठाकुरद्वारा। तेंदुए के हमले में क्षेत्र में 10 साल में दो बच्चों की मौत हो चुकी है। कई बच्चे और लोग घायल हो चुके हैं। तेंदुए ने करीब आठ वर्ष पहले गांव बहादुर नगर में घर के बाहर खेल रहे सुहेल पर हमला कर उसे मार दिया था। गांव बालापुर की मंडेया में ननिहाल में आए शिवा को घर में घुसकर मार दिया था। एक वर्ष पूर्व गांव तरफ दलपत में बाहर खेलते बच्चे को तेंदुआ उठाकर ले गया था। मां ने तेंदुए से संघर्ष कर अपने बेटे को मौत के मुंह से बचाया था। गांव मानपुर दत्ताराम में जंगल में काम कर रहे किसान परिवार पर एक वर्ष पूर्व तेंदुए ने हमला कर पांच लोगों को घायल कर दिया था। संवाद
-- -- -- -- -- -- -- -- -
विज्ञापन
ठाकुरद्वारा। गांव राईभूड़ में रविवार को जंगल में माता-पिता के साथ चारा काटने गई युवती पर तेंदुए ने जानलेवा हमला कर दिया। माता-पिता ने शोर मचाकर बेटी को ग्रामीणों की मदद से उसके चंगुल से छुड़ाया। युवती का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
गांव निवासी मंजू (27) अपने पिता अमर सिंह सैनी और मां मुन्नी देवी के साथ दोपहर करीब 1:30 बजे जंगल में चारा काटने के लिए गई थी। वह अपने खेत में चारा काट रही थी। उसके माता-पिता भी कुछ दूरी पर काम कर रहे थे। इसी दाैरान अचानक तेंदुआ आया और मंजू पर पीछे से हमला कर दिया। मंजू की गर्दन, सिर, कनपटी और बांह पर पंजे और मुंह से कई बार किए। मंजू ने शोर मचाते हुए दरांती से बचाव के लिए तेंदुए से संघर्ष किया। उसकी चीख सुनकर उसके माता-पिता दौड़कर आए और उन्होंने शोर मचाया। आसपास खेतों में काम कर रहे किसान भी डंडे लेकर वहां पहुंच गए। उन्होंने किसी तरह मंजू को तेंदुए के चंगुल से छुड़ाया और उसको भगाया।
विज्ञापन
मंजू के चचेरे भाई जोगिंदर सिंह ने बताया कि हमले में घायल मंजू को पहले परिजन मलकपुर सेमली के निजी अस्पताल में ले गए, वहां उसे दिखाया। वहां से डायल 112 की पुलिस ने सीएचसी डिलारी में भर्ती कराया। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। घटना से राईभूड़ और आसपास के गांवों में दहशत है।
विज्ञापन
सूचना पर वन विभाग की टीम गांव में पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके पर तेंदुए के पंजों के निशान मिले। जिससे हमला तेंदुए के द्वारा करने की पुष्टि हुई। वन विभाग के दरोगा पीयूष जोशी और मदन सिंह की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर तेंदुए की तलाश में कांबिंग की। ग्रामीणों को तेंदुए से बचाव के लिए जागरूक किया। ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम से तेंदुए को पकड़ने और पिंजरा लगाने की मांग की है। वन विभाग के रेंजर रवि कुमार गंगवार ने बताया कि वन विभाग की टीम तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। शीघ्र वहां पर तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा।
मंजू भाई का फर्ज निभाते हुए माता-पिता के काम में बंटाती है हाथ
ठाकुरद्वारा। मंजू के कोई सगा भाई नहीं है। उसकी दो बड़ी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। मंजू के चचेरे भाई जोगिंदर सिंह ने बताया कि मंजू ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली है। माता-पिता वृद्ध हो गए हैं, इसलिए वह उनका खेती और अन्य कार्यों में सहयोग करती है। संवाद
एक वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने घर में कैद कर लिया था तेंदुए को
ठाकुरद्वारा। गांव राईभूड़ के मजरे में एक वर्ष पूर्व तेंदुआ गांव के मोहित यादव के घर में घुस गया था। उसने पशुशाला में घुसकर हमला करने की कोशिश की जिस पर उसे मोहित यादव ने कमरे में बंद कर दिया था। बाद में वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़ लिया था। ग्रामीणों का कहना है कि राईभूड़ रामगंगा नदी के पास स्थित है, इसलिए तेंदुए गांव और आसपास के जंगल में घूमते हुए देखे जाते हैं। संवाद
तेंदुए के हमले में हो चुकी है दो बच्चों की मौत
ठाकुरद्वारा। तेंदुए के हमले में क्षेत्र में 10 साल में दो बच्चों की मौत हो चुकी है। कई बच्चे और लोग घायल हो चुके हैं। तेंदुए ने करीब आठ वर्ष पहले गांव बहादुर नगर में घर के बाहर खेल रहे सुहेल पर हमला कर उसे मार दिया था। गांव बालापुर की मंडेया में ननिहाल में आए शिवा को घर में घुसकर मार दिया था। एक वर्ष पूर्व गांव तरफ दलपत में बाहर खेलते बच्चे को तेंदुआ उठाकर ले गया था। मां ने तेंदुए से संघर्ष कर अपने बेटे को मौत के मुंह से बचाया था। गांव मानपुर दत्ताराम में जंगल में काम कर रहे किसान परिवार पर एक वर्ष पूर्व तेंदुए ने हमला कर पांच लोगों को घायल कर दिया था। संवाद