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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Tickets not confirmed, the train passed and 60 workers left standing, went on foot to Samastipur

टिकट नहीं हुए कन्फर्म, ट्रेन गुजर गई और खड़े रह गए 60 मजदूर, पैदल ही हो गए समस्तीपुर के लिए रवाना

Thu, 11 Jun 2020 03:15 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Thu, 11 Jun 2020 03:15 AM IST
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Tickets not confirmed, the train passed and 60 workers left standing, went on foot to Samastipur
demo pic - फोटो : demo pic

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का सिलसिला थम सा गया है लेकिन प्रवासी मजदूरों का सफर जारी है। रेलवे ने दो सौ स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं लेकिन उनमें से अधिकांश में सीट उपलब्ध नहीं हैं। वेटिंग टिकट लेकर इंतजार के अलावा और कोई रास्ता नहीं हैं। बुधवार को सुबह सात बजे रेलवे स्टेशन परिसर पर लगभग साठ मजदूरों का टिकट कन्फर्म नहीं हो पाया और वे गुजरती ट्रेन को बस देखते ही रह गए। बाद में उन्होंने पैदल ही समस्तीपुर की राह पकड़ी।

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बुधवार को रेलवे स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों का तांता लगा रहा। अधिकतर मजदूर हरिद्वार से आए थे और उन्हें बिहार जाना था। मजदूरों ने बताया कि वे सभी हरिद्वार से मुरादाबाद नौ जून शाम साढ़े सात बजे ट्रेन से आए थे। मुरादाबाद से बिहार जाने के लिए रात को ही दूसरी ट्रेन में बैठना था। लेकिन उनके वेटिंग टिकट अभी तक कन्फर्म नहीं हुए थे। जिसके कारण ट्रेन निकल गई।
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फिर टिकट रद्द करवाकर बकाया लेना चाहा तो काउंटर तक नहीं जाने दिया गया। मजदूरों ने कहा कि बहुत देर बाद जब टिकट काउंटर पर पहुंचे तो वहां कोई नहीं था। रेलवे पुलिस के जवानों ने समझाया कि कल सुबह टिकट रद्द करवा लेना। पूरी रात स्टेशन पर बिताने के बाद जब टिकट काउंटर पहुंचे तो टिकट रद्द कराने का समय निकल चुका था। साथ ही बताया गया कि बिहार जाने वाली किसी ट्रेन में सीट खाली नहीं है।
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जुलाई माह से पहले सीट कन्फर्म नहीं हो पाएगी। स्टेशन मास्टर के केबिन में समस्या बताने पर कहा गया कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराइए। यदि टिकट वेटिंग में है तो इसके लिए हमारे पास कोई समाधान नहीं है। बिहार के समस्तीपुर के श्रमिक संदीप पंडित, राकेश सिंह, कामेश्वर तिवारी व मलखान सिंह ने बताया कि अब न तो बस का किराया बचा है और न ही खाने को कुछ है। यहां भूखे कब तक इंतजार करेंगे। इससे बेहतर है कि पैदल ही घर की राह पकड़ें।

हरिद्वार में जहां काम करते हैं वहां के मालिक से उधार लेकर टिकट कराया था। अब टिकट रद्द न हो पाने की वजह से पैसे भी नहीं हैं। यदि हम भूखे रहकर प्रदर्शन करेंगे तब भी रेलवे पर कोई असर नहीं होगा। हम तो भूखे रह सकते हैं लेकिन बच्चों को कैसे समझाएं। - संतोष कुमार प्रवासी श्रमिक

साहब ने कहा है कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराइए लेकिन पैसे नहीं नहीं हैं। अब क्या करें कुछ समझ नहीं आता। पूरी रात परेशानी में बिताने के बाद उम्मीद थी सुबह टिकट रद्द करवाकर पैसे मिल जाएंगे। अब तो पैदल ही जाना पड़ेगा। - संदीप पंडित प्रवासी श्रमिक

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