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खून की कमी से जूझ रही ‘मां की ममता’
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Nov 2017 01:15 AM IST
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blood
- फोटो : अमर उजाला
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मुरादाबाद खून की कमी से जूझ रहा है, खासकर महिलाएं और बच्चे। छह महीने से 59 महीने के एक तिहाई बच्चों में खून की कमी है। वहीं आधे से अधिक महिलाएं एनीमिया से जूझ रही हैं। इसका खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस)-4 की रिपोर्ट में हुआ है। ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशुओं और दुनिया में कदम रख चुके बच्चों का भविष्य संकट में है। इसका कारण खानपान में कमी और गरीबी है।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के बावजूद यहां की महिलाओं और बच्चों में खून की कमी पाई गई है। एनएफएचएस-4 सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 62 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। 69.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं।
जबकि 61.4 फीसदी सामान्य महिलाएं भी खून की कमी से जूझ रहीं हैं। वहीं बच्चों में भी खून की कमी पाई गई है। 6 महीने से 59 महीने के 74.8 प्रतिशत बच्चे भी एनीमिक हैं। खून की कमी इनके शारीरिक विकास में बाधा बनी हुई है। ऐसे में बच्चे गर्भ और गर्भ के बाहर भी खून की कमी से लड़ रहे हैं। जो चिंता का विषय है।
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मुरादाबाद में देश-प्रदेश से अधिक एनीमिक महिलाएं
मुरादाबाद में देश और प्रदेश से अधिक एनीमिक महिलाएं हैै। देश में 50 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। वहीं प्रदेश में 60 फीसदी महिलाएं खून की कमी से जूझ रहीं है। जबकि एनएफएचएस-4 के मुताबिक मुरादाबाद में 62 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। जो देश और प्रदेश के आंकड़े से अधिक है।
गांव के बच्चों और महिलाओं में खून की कमी अधिक
शहरी-----ग्रामीण------कुल
बच्चे (6 से 59 माह)-------------75.2-----74.6------74.8
सामान्य महिला (15 से 49 साल)---57.1-----64.0------61.4
गर्भवती महिला (15 से 49 साल)---57.3-----75.6------69.8
दोनों मिलाकर--------------------57.1------64.8------62.0
नोट : नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के ये आंकड़े प्रतिशत में है।
जागरूकता से दूर होगी खून की कमी
। एसीएमओ डा. रंजन गौतम का कहना है कि महिलाएं खून की कमी से जूझ रही है, इसका बड़ा कारण जागरूकता की कमी है। गर्भवती को कब और कितने समय कौन सी दवा खानी है। महिलाओं को परिवार का बचा हुआ खाना नहीं पर्याप्त भोजन देना चाहिए।
इस तरह से कई बातें हैं, जिसकी ग्रामीण इलाकों में नहीं है। सरकार कई योजनाएं चला रही है लेकिन जब तक इन बातों का ध्यान नहीं दिया जाएगा तब तक महिलाएं खून की कमी से जूझती रहेंगी।
खून की कमी गर्भवतियों के लिए काफी जटिल
स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. मोना अग्रवाल का कहना कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में खून की कमी का प्रतिशत शहर की महिलाओं की तुलना में अधिक है। यह समस्या गर्भवती महिलाओं के लिए काफी जटिल है। खाना कम और जागरूकता के अभाव में गर्भवती के साथ उसके शिशु पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
प्रसव के दौरान महिलाओं की जान खतरे में रहती है। साथ ही नवजात का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रहता है।
खून की कमी के कारण
- संतुलित आहार नहीं लेना
- पेट में कीड़े होना
- नाखून बड़ा होना
- खाने और पानी में स्वच्छता न होना
- जंक फूड पर निर्भर होना
- शरीर में संक्रामण होना
गर्भावस्था के दौरान एचआपी के लक्षण
- पेट में तेज दर्द होना
- कमजोरी महसूस करना
- जल्दी थक जाना
- सांस फूलना
- योनि से खून बहना
- पैरों में बेहद सूजन होना
- दौरे पड़ना
- बुखार आना
डाक्टर की सलाह
- हर महीने गर्भवती जांच कराए
- टीटनेस के टीके लगवाए
- डाक्टर की सलाह पर गर्भवती को आयरन और कैल्शियम की गोली खिलाए
- शुरुआत के तीन महीने गर्भवतियों को धूम्रपान से दूर रखे
- हिमोग्लोबीन की जांच कराएं
- गर्भवतियों उचित देखभाल करें
- गर्भवतियों के खानपान पर ध्यान दें
बीस फीसदी पुरुषों में भी खून की कमी
जिले की 62 फीसदी महिलाएं ही नहीं बल्कि 20 फीसदी पुरुष भी खून की कमी से जूझ रहे हैं। 19.2 फीसदी पुरुषों में भी खून की कमी पाई गई है। इसमें शहरी क्षेत्र 17.9 प्रतिशत तो ग्रामीण क्षेत्र के 20.8 पुरुष शामिल हैं।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के बावजूद यहां की महिलाओं और बच्चों में खून की कमी पाई गई है। एनएफएचएस-4 सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 62 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। 69.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं।
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जबकि 61.4 फीसदी सामान्य महिलाएं भी खून की कमी से जूझ रहीं हैं। वहीं बच्चों में भी खून की कमी पाई गई है। 6 महीने से 59 महीने के 74.8 प्रतिशत बच्चे भी एनीमिक हैं। खून की कमी इनके शारीरिक विकास में बाधा बनी हुई है। ऐसे में बच्चे गर्भ और गर्भ के बाहर भी खून की कमी से लड़ रहे हैं। जो चिंता का विषय है।
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मुरादाबाद में देश-प्रदेश से अधिक एनीमिक महिलाएं
मुरादाबाद में देश और प्रदेश से अधिक एनीमिक महिलाएं हैै। देश में 50 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। वहीं प्रदेश में 60 फीसदी महिलाएं खून की कमी से जूझ रहीं है। जबकि एनएफएचएस-4 के मुताबिक मुरादाबाद में 62 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है। जो देश और प्रदेश के आंकड़े से अधिक है।
गांव के बच्चों और महिलाओं में खून की कमी अधिक
शहरी-----ग्रामीण------कुल
बच्चे (6 से 59 माह)-------------75.2-----74.6------74.8
सामान्य महिला (15 से 49 साल)---57.1-----64.0------61.4
गर्भवती महिला (15 से 49 साल)---57.3-----75.6------69.8
दोनों मिलाकर--------------------57.1------64.8------62.0
नोट : नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के ये आंकड़े प्रतिशत में है।
जागरूकता से दूर होगी खून की कमी
। एसीएमओ डा. रंजन गौतम का कहना है कि महिलाएं खून की कमी से जूझ रही है, इसका बड़ा कारण जागरूकता की कमी है। गर्भवती को कब और कितने समय कौन सी दवा खानी है। महिलाओं को परिवार का बचा हुआ खाना नहीं पर्याप्त भोजन देना चाहिए।
इस तरह से कई बातें हैं, जिसकी ग्रामीण इलाकों में नहीं है। सरकार कई योजनाएं चला रही है लेकिन जब तक इन बातों का ध्यान नहीं दिया जाएगा तब तक महिलाएं खून की कमी से जूझती रहेंगी।
खून की कमी गर्भवतियों के लिए काफी जटिल
स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. मोना अग्रवाल का कहना कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में खून की कमी का प्रतिशत शहर की महिलाओं की तुलना में अधिक है। यह समस्या गर्भवती महिलाओं के लिए काफी जटिल है। खाना कम और जागरूकता के अभाव में गर्भवती के साथ उसके शिशु पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
प्रसव के दौरान महिलाओं की जान खतरे में रहती है। साथ ही नवजात का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रहता है।
खून की कमी के कारण
- संतुलित आहार नहीं लेना
- पेट में कीड़े होना
- नाखून बड़ा होना
- खाने और पानी में स्वच्छता न होना
- जंक फूड पर निर्भर होना
- शरीर में संक्रामण होना
गर्भावस्था के दौरान एचआपी के लक्षण
- पेट में तेज दर्द होना
- कमजोरी महसूस करना
- जल्दी थक जाना
- सांस फूलना
- योनि से खून बहना
- पैरों में बेहद सूजन होना
- दौरे पड़ना
- बुखार आना
डाक्टर की सलाह
- हर महीने गर्भवती जांच कराए
- टीटनेस के टीके लगवाए
- डाक्टर की सलाह पर गर्भवती को आयरन और कैल्शियम की गोली खिलाए
- शुरुआत के तीन महीने गर्भवतियों को धूम्रपान से दूर रखे
- हिमोग्लोबीन की जांच कराएं
- गर्भवतियों उचित देखभाल करें
- गर्भवतियों के खानपान पर ध्यान दें
बीस फीसदी पुरुषों में भी खून की कमी
जिले की 62 फीसदी महिलाएं ही नहीं बल्कि 20 फीसदी पुरुष भी खून की कमी से जूझ रहे हैं। 19.2 फीसदी पुरुषों में भी खून की कमी पाई गई है। इसमें शहरी क्षेत्र 17.9 प्रतिशत तो ग्रामीण क्षेत्र के 20.8 पुरुष शामिल हैं।