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केजीके कॉलेज: निलंबित प्राचार्य व दोनों शिक्षकों के साथ कल होगी प्रबंधन की बैठक
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क्रासर...
- निलंबित दोनों शिक्षकों ने कुलपति के समक्ष की है अपील
अमर उजाला ब्यूरोमुरादाबाद। केजीके कॉलेज में निलंबित प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी और निलंबित शिक्षक प्रो. अजय सिंह व प्रो. अनिल चौहान की प्रबंधन के साथ बृहस्पतिवार को बैठक होगी। प्रबंधक का कहना है कि बैठक में तीनों लोग अपना पक्ष रखेंगे।
प्रबंधक विवेक खन्ना ने दस सितंबर को कॉलेज के भवनों की अवैध तोड़फोड़ और करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में भवन प्रभारी प्रो. अजय सिंह को और खेल मैदान निजी अकादमियों और व्यक्तियों को देने, खेल निधि के उपयोग में अनियमितता बरतने के आरोप में खेल सचिव प्रो. अनिल चौहान को निलंबित कर दिया था। यह निलंबन 15 जुलाई को प्रबंधक विवेक खन्ना द्वारा गठित की गई तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर हुआ था। इस समिति में प्रो. गिरीश चंद्र पांडे, प्रो. विनोद कुमार पांडे और प्रो. प्रदीप कुमार शुक्ला शामिल थे। इस मामले में दोनों शिक्षक प्रो. अजय सिंह और प्रो. अनिल चौहान ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई के खिलाफ प्रबंधक विवेक खन्ना और कुलपति गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय प्रो. सचिन माहेश्वरी के समक्ष अपील की है। प्रो. अजय सिंह का कहना है कि निलंबन आदेश का प्रतिउत्तर प्रबंधक और कुलपति को भेजा जा चुका है। उनसे निलंबन को रद्द करने की मांग की गई है। उनके निर्णय की प्रतीक्षा है।
प्रो. अनिल चौहान ने कहा कि कॉलेज में कुछ लोगों की राजनीति की वजह से अभी तक मेरी प्रबंधक विवेक खन्ना से वार्ता नहीं हो पाई थी। मैंने प्रबंधक और कुलपति के समक्ष अपील की है। मुझ पर आरोप लगाए हैं, उनका जवाब तथ्यों और सबूतों के साथ दिया है। मेरे ऊपर आरोप हैं कि मैंने खिलाड़ियों को कैश बांटा, जबकि मैं प्राचार्य और प्रबंधक नॉमिनी के हस्ताक्षर वाले चेक देता था। इसके अलावा सेल्फ फाइनेंस अकादमी खोलने के लिए प्रबंधक द्वारा पत्र दिया गया था। उसे बैठक कर पास किया गया। समिति के एक सदस्य उस वक्त भी खेल समिति के सदस्य थे और उनके हस्ताक्षर हैं, जबकि समिति के दूसरे सदस्य उस वक्त प्राचार्य थे। यदि मैं गलत था तो उन्होंने मना क्यों नहीं किया। वर्ष 2024 में खेल निधि की इलाहबाद से आई ऑडिट टीम ने जांच की थी और उन्होंने भी आपत्ति नहीं व्यक्त की। मैं हाईकोर्ट नहीं गया हूं, क्योंकि अभी तक मामला कुलपति के यहां प्रक्रियाधीन है। मुलाकात के दौरान उन्होंने सकारात्मक रुझान दिखाया है।
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वर्जन...
प्रो. सुनील चौधरी और दोनों शिक्षक हमारे कॉलेज परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने अपने निलंबन के संबंध में अपना पक्ष रखने का अनुरोध किया था। इसलिए बृहस्पतिवार को उनके साथ बैठक कर उनका पक्ष सुना जाएगा।
विवेक खन्ना, प्रबंधक केजीके कॉलेज
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- निलंबित दोनों शिक्षकों ने कुलपति के समक्ष की है अपील
अमर उजाला ब्यूरोमुरादाबाद। केजीके कॉलेज में निलंबित प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी और निलंबित शिक्षक प्रो. अजय सिंह व प्रो. अनिल चौहान की प्रबंधन के साथ बृहस्पतिवार को बैठक होगी। प्रबंधक का कहना है कि बैठक में तीनों लोग अपना पक्ष रखेंगे।
प्रबंधक विवेक खन्ना ने दस सितंबर को कॉलेज के भवनों की अवैध तोड़फोड़ और करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में भवन प्रभारी प्रो. अजय सिंह को और खेल मैदान निजी अकादमियों और व्यक्तियों को देने, खेल निधि के उपयोग में अनियमितता बरतने के आरोप में खेल सचिव प्रो. अनिल चौहान को निलंबित कर दिया था। यह निलंबन 15 जुलाई को प्रबंधक विवेक खन्ना द्वारा गठित की गई तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर हुआ था। इस समिति में प्रो. गिरीश चंद्र पांडे, प्रो. विनोद कुमार पांडे और प्रो. प्रदीप कुमार शुक्ला शामिल थे। इस मामले में दोनों शिक्षक प्रो. अजय सिंह और प्रो. अनिल चौहान ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई के खिलाफ प्रबंधक विवेक खन्ना और कुलपति गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय प्रो. सचिन माहेश्वरी के समक्ष अपील की है। प्रो. अजय सिंह का कहना है कि निलंबन आदेश का प्रतिउत्तर प्रबंधक और कुलपति को भेजा जा चुका है। उनसे निलंबन को रद्द करने की मांग की गई है। उनके निर्णय की प्रतीक्षा है।
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प्रो. अनिल चौहान ने कहा कि कॉलेज में कुछ लोगों की राजनीति की वजह से अभी तक मेरी प्रबंधक विवेक खन्ना से वार्ता नहीं हो पाई थी। मैंने प्रबंधक और कुलपति के समक्ष अपील की है। मुझ पर आरोप लगाए हैं, उनका जवाब तथ्यों और सबूतों के साथ दिया है। मेरे ऊपर आरोप हैं कि मैंने खिलाड़ियों को कैश बांटा, जबकि मैं प्राचार्य और प्रबंधक नॉमिनी के हस्ताक्षर वाले चेक देता था। इसके अलावा सेल्फ फाइनेंस अकादमी खोलने के लिए प्रबंधक द्वारा पत्र दिया गया था। उसे बैठक कर पास किया गया। समिति के एक सदस्य उस वक्त भी खेल समिति के सदस्य थे और उनके हस्ताक्षर हैं, जबकि समिति के दूसरे सदस्य उस वक्त प्राचार्य थे। यदि मैं गलत था तो उन्होंने मना क्यों नहीं किया। वर्ष 2024 में खेल निधि की इलाहबाद से आई ऑडिट टीम ने जांच की थी और उन्होंने भी आपत्ति नहीं व्यक्त की। मैं हाईकोर्ट नहीं गया हूं, क्योंकि अभी तक मामला कुलपति के यहां प्रक्रियाधीन है। मुलाकात के दौरान उन्होंने सकारात्मक रुझान दिखाया है।
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प्रो. सुनील चौधरी और दोनों शिक्षक हमारे कॉलेज परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने अपने निलंबन के संबंध में अपना पक्ष रखने का अनुरोध किया था। इसलिए बृहस्पतिवार को उनके साथ बैठक कर उनका पक्ष सुना जाएगा।
विवेक खन्ना, प्रबंधक केजीके कॉलेज