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कांवड़ियों के उत्साह से शिवमय हुआ शहर
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मुरादाबाद। सावन के तीसरे सोमवार में अभी तीन दिन का समय है, लेकिन शहर की प्रमुख सड़कें भगवा रंग में रंग गई हैं। भोलेबाबा के जयकारों से शहर गूंज रहा है। भोले के भक्तों की टोलियां नजर आ रही हैं। कांठ रोड और दिल्ली रोड पर शिविर भी लगाए जा रहे हैं। उनके आराम और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए शिविरों में पूरा ध्यान रखा जा रहा है। भोले बाबा की टोली में युवा ही नहीं, बल्कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं का उत्साह भी देखने लायक है।
मुरादाबाद में तीसरे और चौथे सोमवार को हरिद्वार और ब्रजघाट से गंगाजल लाकर भोलेबाबा का जलाभिषेक करने का प्रचलन है। इसके लिए शुक्रवार को शहर की प्रत्येक कालोनी से कांवड़ियों का जत्था निकला। छोटे-बड़े ट्रकों पर सजे डीजे और खाने-पीने के इंतजाम किए गए थे। परिवार की महिलाओं ने रोली-तिलक लगाकर उन्हें विदा किया। इसके अलावा रामपुर और बरेली जाने वाली कांवड़ों की कांठ रोड पर लाइन लग गईं। डीजे पर बजते भोलेबाबा के भजन उनके उत्साह को दोगुना कर रहे थे। दोपहर में भीषण गर्मी होने के बावजूद उनके कदमों में थकान नहीं थी। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर एक भोले का बेड़ा था। प्रत्येक बेड़े में 50 से 60 सदस्यों का जत्था था। कंधे पर कांवड़, पैरों में घुंघरू और तन पर भगवा वस्त्र पहने भक्त भोले की भक्ति में झूमते हुए अपने गंतव्य को गए। कांवड़ियों के नंगे पैरों में कंकड़-पत्थर चुभ रहे हैं, लेकिन शिवशंकर की धुन में वह यह दर्द भी हंसते-हंसते सहकर आगे बढ़ रहे हैं। भक्तिभाव में डूबे श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में देशभक्ति का संदेश भी दे रहे हैं। उनकी कांवड़ से लेकर ट्रैक्टर और ट्रक पर तिरंगा लगाकर चल रहे हैं। छोटे से बड़े तिरंगा की वजह से माहौल देशभक्ति का बन रहा है।
अस्थायी दुकानों पर सजे भगवा ध्वज
भोले की बारात की तैयारियों के तहत दुकानों के अलावा सड़क किनारे भी अस्थायी दुकानें सज गई हैं। वहां पर भोले की टी-शर्ट, टोपी, घुंघरू, तिरंगा और भगवा ध्वज लहरा रहा है। इन दुकानों में कांवड़ की भी बिक्री की जा रही है। गंगाजल लेने जाने वाले भोले के भक्त सामान खरीदने में खूब उत्साह दिखा रहे हैं।
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मुरादाबाद में तीसरे और चौथे सोमवार को हरिद्वार और ब्रजघाट से गंगाजल लाकर भोलेबाबा का जलाभिषेक करने का प्रचलन है। इसके लिए शुक्रवार को शहर की प्रत्येक कालोनी से कांवड़ियों का जत्था निकला। छोटे-बड़े ट्रकों पर सजे डीजे और खाने-पीने के इंतजाम किए गए थे। परिवार की महिलाओं ने रोली-तिलक लगाकर उन्हें विदा किया। इसके अलावा रामपुर और बरेली जाने वाली कांवड़ों की कांठ रोड पर लाइन लग गईं। डीजे पर बजते भोलेबाबा के भजन उनके उत्साह को दोगुना कर रहे थे। दोपहर में भीषण गर्मी होने के बावजूद उनके कदमों में थकान नहीं थी। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर एक भोले का बेड़ा था। प्रत्येक बेड़े में 50 से 60 सदस्यों का जत्था था। कंधे पर कांवड़, पैरों में घुंघरू और तन पर भगवा वस्त्र पहने भक्त भोले की भक्ति में झूमते हुए अपने गंतव्य को गए। कांवड़ियों के नंगे पैरों में कंकड़-पत्थर चुभ रहे हैं, लेकिन शिवशंकर की धुन में वह यह दर्द भी हंसते-हंसते सहकर आगे बढ़ रहे हैं। भक्तिभाव में डूबे श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में देशभक्ति का संदेश भी दे रहे हैं। उनकी कांवड़ से लेकर ट्रैक्टर और ट्रक पर तिरंगा लगाकर चल रहे हैं। छोटे से बड़े तिरंगा की वजह से माहौल देशभक्ति का बन रहा है।
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अस्थायी दुकानों पर सजे भगवा ध्वज
भोले की बारात की तैयारियों के तहत दुकानों के अलावा सड़क किनारे भी अस्थायी दुकानें सज गई हैं। वहां पर भोले की टी-शर्ट, टोपी, घुंघरू, तिरंगा और भगवा ध्वज लहरा रहा है। इन दुकानों में कांवड़ की भी बिक्री की जा रही है। गंगाजल लेने जाने वाले भोले के भक्त सामान खरीदने में खूब उत्साह दिखा रहे हैं।
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