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इंटर कालेज के शैक्षिक विकास को महाविद्यालय उदासीन

Wed, 22 Nov 2017 12:47 AM IST
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 22 Nov 2017 12:47 AM IST
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inert collage ke vikas par mahavidhalya udasin
स्टूडेंट्स। - फोटो : amar ujala
 इंटरमीडिएट के छात्रों को पाठ्यक्रम से हटकर देश, दुनिया, समाज और नैतिक शिक्षा का ज्ञान देने की जिम्मेदारी डिग्री कालेज के शिक्षकों ने ली थी। शासन की योजना के अनुरूप शहर के पांचों डिग्री कालेजों ने एक-एक इंटरमीडिएट कालेज गोद लिया था। इसके तहत क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी को भी रूपरेखा भेजी थी। करीब चार माह बीतने के बाद भी इसका पूर्ण रूप से क्रियान्वयन नहीं हो सका है।
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माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा के बीच संवाद बढ़ाने के उद्देश्य के तहत इसकी शुरुआत हुई थी। अनुभवों का लाभ देने के अलावा कालेजों के प्रति आकर्षण बढ़ाना भी इसका मकसद था। डिग्री कालेजों के शिक्षक छात्रों को नियमित शिक्षकों और पाठ्यक्रम से अलग हटकर कुछ सिखाना था, ताकि किताबों के प्रति उत्पन्न हो रही नीरसता को समाप्त करने के लिए शिक्षा का रूपांतरण किया जा सके।
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व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देना था जरूरी
कालेजों की कार्य योजना में सबसे पहले कार्य संस्कृति और शिक्षण संस्कृति में बदलाव करना था। किताबी पढ़ाई के अलावा उनके करियर और व्यक्तित्व विकास की काउंसिलिंग करनी थी, ताकि बच्चों के अंदर की छुपी हुई प्रतिभा को पहचाना जा सके। इसके अलावा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और स्वच्छ भारत अभियान से भी जोड़ना था।
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कालेज                 गोद लिए कालेज              कार्यक्रम संख्या
हिंदू कालेज            एसएस इंटर कालेज             दो

केजीके कालेज        दिव्य सरस्वती इंटर कालेज      शून्य

एमएच कालेज         पीएलजेएल इंटर कालेज         शून्य
गोकुलदास कालेज     मुरादाबाद इंटर कालेज           शून्य
दयानंद कालेज         कौशल्या कन्या इंटर कालेज      एक


डिग्री कालेज के प्राचार्य व शिक्षकों के इंटर कालेजों में जाने से शैक्षिक स्तर में बदलाव आएगा। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए भी लाभदायक है। यह कार्यक्रम नियमित चलना है। इसलिए इसकी कार्य योजना मांगी गई थी। अब शासन मांगेगा तो कालेजों को बताना होगा कि उन्होंने अब तक क्या किया।
डॉ. आरपी यादव, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, बरेली।
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