फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   In the year 2027, you will be able to travel to Char Dham by train

Moradabad News: वर्ष 2027 मेें ट्रेन से कर सकेंगे चार धाम की यात्रा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 11 Aug 2025 01:33 AM IST
विज्ञापन
In the year 2027, you will be able to travel to Char Dham by train
मुरादाबाद। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन पर ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो गया है। मुरादाबाद मंडल के 125 किलोमीटर लंबे मार्ग पर ट्रैक पर 750 करोड़ रुपये की लागत से लाइन बिछा रहा है। रेलवे का दावा है कि दिसंबर 2026 तक यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। इसके बाद गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ (चार धाम) की यात्रा ट्रेन से हो पाएगी। इससे बार-बार सड़क बंद होने की परेशानी से छुटकारा मिलेगा।
विज्ञापन

भारतीय रेलवे के उपक्रम इरकॉन इंटरनेशनल ने कार्य की गति तेज कर दी है। बारिश बाधा बन रही है लेकिन कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई है। सुरंगों की खोदाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब सुरंगों को पक्का करने का काम चल रहा है। सुरंगों के अंदर बेलासलेस (बिना गिट्टी वाला ट्रैक) बिछाया जा रहा है। परियोजना में मुख्य और सहायक सुरंगों की कुल संख्या 16 है। इनकी कुल लंबाई 213 किमी है।
विज्ञापन

मुरादाबाद मंडल में आने वाली सुरंगों की लंबाई 125 किमी है, जिसमें से 100 किमी खोदाई का कार्य पूरा चुका है। परियोजना में कुल 19 पुल हैं। इनमें से चंद्रभागा, शिवपुरी, गूलर, ब्यासी, कोड़ियाला, पौड़ी नाला, लक्ष्मोली और श्रीनगर पुल बनकर तैयार हो चुके हैं। शेष 11 पुलों का निर्माण भी 75 फीसदी पूरा हो चुका है। वर्ष 2026 के अंत तक सभी पुलों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन



शिवपुरी और ब्यासी रेलवे स्टेशनों का निर्माण शुरू
इस प्रोजेक्ट में कुल 13 स्टेशन हैं। इनमें से वीरभद्र और योगनगरी रेलवे स्टेशन साल 2020 में बनकर तैयार हो चुके हैं। शिवपुरी और ब्यासी रेलवे स्टेशन का निर्माण शुरू हो गया है। इन दोनों स्टेशनों का निर्माण 61 करोड़ की लागत से किया जा रहा है। देवप्रयाग, जनासू, मलेथा और श्रीनगर स्टेशन के लिए जल्द ही टेंडर जारी होगा। धारीदेवी, घोलतीर, तिलड़ी, गौचर और कर्णप्रयाग स्टेशन का काम बाकी है। कर्णप्रयाग इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा और आखिरी स्टेशन है।


सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है रेल लाइन

यह रेल लाइन सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चीन सीमा तक भारतीय सेना का साजो सामान इस रेल लाइन के जरिए आसानी से पहुंच सकता है। इस रेल परियोजना में देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली जिले का हिस्सा आता है। सितंबर 2011 में ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन को बनाने का जिम्मा रेल विकास निगम लिमिटेड को सौंपा गया था। रेल मंत्रालय की ओर से तब 4295 करोड़ की मंजूरी दी गई थी। नवंबर 2016 में रेलवे बोर्ड ने 16216.31 करोड़ रुपये इस परियोजना के लिए स्वीकृत किए।


कोट
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है। पहाड़ों के अंदर सुंरग बनाकर रेल लाइन बिछाना जटिल कार्य है। इस कारण समय लग रहा है। उम्मीद है कि 2026 के अंत तक वर्ष यह कार्य पूरा हो जाएगा।
- आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed