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कल से शुरू होगा आईएचजीएफ दिल्ली मेला शरद ऋतु 2020
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मुरादाबाद। कोरोना महामारी के प्रकोप में आईएचजीएफ दिल्ली मेला 2020 के 50 वें संस्करण का आयोजन भी वर्चुअल प्लेटफार्म के जरिए ही होगा। चार नवंबर से यह मेला शुरू हो रहा है जो नौ नवंबर तक चलेगा। इस बाबत सोमवार को ईपीसीएच के चेयरमैन, महानिदेशक ने इसकी तमाम जानकारियां साझा की और कहा कि इस मेले को और ज्यादा प्रभावी बनाय जाएगा।
शरद ऋतु का यह मेला वर्चुअल फेयर की श्रंखला का एक और उदाहरण बनेगा। ईपीसीएच के अध्यक्ष रवि के पासी ने कहा कि वर्तमान के यात्रा प्रतिबंधों के कारण सभी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इसकी योजना तैयार की गई है। कहा कि प्रदर्शकों और खरीदारों को एक साथ लाने के उद्देश्य से एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) द्वारा शुरू किया गया वर्चुअल प्लेटफार्म का विकल्प बेहतर साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि 4 से 9 नवंबर 2020 तक इसका सीधा प्रसारण होगा।ं
25 वर्चुअल हॉल होंगे
अध्यक्ष के मुताबिक इसमें 12 उत्पाद खंडों में 25 वर्चुअल हॉल होंगे। इन श्रेणियों के लगभग 1400 प्रदर्शक, गिफ़्ट्स एंड डेकोरेटिवस 7 फर्नीचर और एसेसरीज़ 7 होम फ़र्निशिंग हाउसवेयर, 7 लैंप्स एंड लाइटिंग, 7 क्रिसमस और फेस्टिव डेकोर, 7 कार्पेट एंड रग, 7 बाथरूम एंड बाथ एसेसरीज़, 7 गार्डेन एंड आउट्डोर, 7 हैंडमेड पेपर प्रॉडक्ट्स एंड स्टेशनरी, 7 ईको फ्रेंडली/नेचुरल फ़ाइबर प्रॉडक्ट्स, 7 कैंडल्ज़ इंसेंस एंड पॉपरी, 7 फ़ैशन ज्वेलरी एसेसरीज़ एंड बैग्स आदि होंगे।
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ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने कहा कि कि भले ही यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है पर उम्मीद यह है कि इसमें दुनिया भर से बड़ी संख्या में विदेशी खरीदार जिनमें थोक व्यापारी, वितरक, चेन स्टोर, डिपार्टमेंटल स्टोर, रिटेलर्स, मेल ऑर्डर कंपनियां, ब्रांड मालिक, घरों और डिजाइनरों और प्रवृत्ति के पूर्वानुमान खरीदने वाले शामिल होंगे। वे अपनी आवश्यकताओं के मद्देनजर शो का दौरा करेंगे। खरीदारों को आमंत्रित करने के लिए, ईपीसीएच ने ईमेल, ऑनलाइन बैनर, सोशल मीडिया, टेली कॉलिंग के माध्यम से और शो को बढ़ावा देने के लिए और विदेशों में भारतीय मिशनों और दूतावासों को शामिल करके विशेष प्रचार किया है।
100 देशों का पंजीकरण
महानिदेशक के मुताबिक इसमें 100 से अधिक देशों के विदेशी खरीदारों ने शो का दौरा करने के लिए पंजीकरण किया है। ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, अंडोरा, अर्जेंटीना, बेल्जियम, बरमूडा, बोलीविया, ब्राजील, बुल्गारिया, कनाडा, चिली, कोलंबिया, कोस्टा रिका, साइप्रस, चेकिया, डेनमार्क, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वाडोर, मिस्र, अल साल्वाडोर, फिनलैंड, फ्रांस, जॉर्जिया, जर्मनी, घाना, ग्रीस, ग्वाडेलोप, हैती, जॉर्डन का हाशमी राज्य, होंडुरस, हांगकांग, इंडोनेशिया, ईरान, आयरलैंड, इजरायल, इटली, जापान, केन्या, कुवैत, लातविया, लेबनान, मलेशिया, मालदीव, माल्टा, मॉरीशस, मैक्सिको, मोरक्को, मोजाम्बिक, नामीबिया, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया, नॉर्वे, ओमान, फिलिस्तीन, पेरू, फिलीपींस, पोलैंड, पुर्तगाल, कतर, लिथुआनिया गणराज्य, मोल्दोवा गणराज्य, रोमानिया, रूस, सऊदी अरब, सर्बिया, सिंगापुर, स्लोवेनिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, श्रीलंका, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड, ट्यूनीशिया, तुर्की, यू?एस? वर्जिन आइलैंड्स, यूक्त्रस्ेन, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट्स, उरुग्वे, वेनेजुएला, जाम्बिया इत्यादि और कई अन्य देश शामिल हैं। कार्यकारी निदेशक आरके वर्मा ने बताया कि प्रजेंट कंपनी, यूके, कारिबू, अर्जेंटीना, कोपेनट्राट, जर्मनी, डोलन डिज़ाइन्स, यूएसए, सिंपली होम, कनाडा, कॉस्ट प्लस वर्ल्ड मार्केट, यूएसए, कोस्टका, यूएसए, एल कॉर्टे, स्पेन, केआईएफ केआईएफ़ इम्पोर्ट्स, कनाडा, माइग्रोस, स्विट्जरलैंड, रिवेरा मैसन, नीदरलैंड, रॉस, , वीसीएनवाई, , लंदन ऑर्नमेंट्स, उरुग्वे जैसे विदेशी खरीदारों ने आईएचजीएफ की अपनी यात्रा की पुष्टि की है।
यह होगा खास
आईएचजीएफ़ दिल्ली मेले के इस संस्करण में, कलात्मक ब्लू पॉटरी, महाराष्ट्र के पालगढ़ की वरली आर्ट, केरल का स्क्रूपिन शिल्प, जयपुर की पारंपरिक मीनाकारी, वाराणसी के लकड़ी और लाह के सामान और खिलौने, जम्मू और कश्मीर का पारंपरिक शॉल शिल्प, वाराणसी की पारंपरिक कलात्मक गुलाबी मीनाकारी, कच्छ की हाथ की कढ़ाई, गुजरात और मंडी के पारंपरिक कलात्मक कुल्लू शॉल, हिमाचल प्रदेश के जीआई क्राफ्ट (भौगोलिक पहचान) का राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं द्वारा आईएचजीएफ़ में विषयगत प्रदर्शन भी मुख्य आकर्षणों में से एक होगा।
लोकल के लिए वोकल्र
कहा कि वोकल फॉर लोकल का पूर ध्यान रखा गया है। जैसे कि कोंडापल्ली टॉयज़, निर्मल टॉयज़, एटिकोप्पाका वुडन टॉयज़, चन्नपटना लैक्वर टॉयज़, राजा रानी डाल्ज़, टेराकोटा टॉयज़, किन्नल वुडन टॉयज़ इत्यादि के पास वर्चूअल आईएचजीएफ़ दिल्ली मेला, शरद ऋतु, 2020, में भागीदारी द्वारा भारतीय खिलौना निर्माताओं को विदेशी ख़रीदारों से जोड़ने के लिए निर्यात के मौके हैं। महानिदेशक ने बताया कि वर्ष 2019-20 के दौरान हस्तशिल्प निर्यात 25,270.14 करोड़ रुपये था और शुरू के छह महीनों के दौरान अर्थात् अप्रैल-सितंबर 2020-21 के दौरान 8425.64 करोड़ रुपए और 1121.38 मिलियन यूएस डालर का है।
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शरद ऋतु का यह मेला वर्चुअल फेयर की श्रंखला का एक और उदाहरण बनेगा। ईपीसीएच के अध्यक्ष रवि के पासी ने कहा कि वर्तमान के यात्रा प्रतिबंधों के कारण सभी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इसकी योजना तैयार की गई है। कहा कि प्रदर्शकों और खरीदारों को एक साथ लाने के उद्देश्य से एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) द्वारा शुरू किया गया वर्चुअल प्लेटफार्म का विकल्प बेहतर साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि 4 से 9 नवंबर 2020 तक इसका सीधा प्रसारण होगा।ं
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25 वर्चुअल हॉल होंगे
अध्यक्ष के मुताबिक इसमें 12 उत्पाद खंडों में 25 वर्चुअल हॉल होंगे। इन श्रेणियों के लगभग 1400 प्रदर्शक, गिफ़्ट्स एंड डेकोरेटिवस 7 फर्नीचर और एसेसरीज़ 7 होम फ़र्निशिंग हाउसवेयर, 7 लैंप्स एंड लाइटिंग, 7 क्रिसमस और फेस्टिव डेकोर, 7 कार्पेट एंड रग, 7 बाथरूम एंड बाथ एसेसरीज़, 7 गार्डेन एंड आउट्डोर, 7 हैंडमेड पेपर प्रॉडक्ट्स एंड स्टेशनरी, 7 ईको फ्रेंडली/नेचुरल फ़ाइबर प्रॉडक्ट्स, 7 कैंडल्ज़ इंसेंस एंड पॉपरी, 7 फ़ैशन ज्वेलरी एसेसरीज़ एंड बैग्स आदि होंगे।
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ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने कहा कि कि भले ही यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है पर उम्मीद यह है कि इसमें दुनिया भर से बड़ी संख्या में विदेशी खरीदार जिनमें थोक व्यापारी, वितरक, चेन स्टोर, डिपार्टमेंटल स्टोर, रिटेलर्स, मेल ऑर्डर कंपनियां, ब्रांड मालिक, घरों और डिजाइनरों और प्रवृत्ति के पूर्वानुमान खरीदने वाले शामिल होंगे। वे अपनी आवश्यकताओं के मद्देनजर शो का दौरा करेंगे। खरीदारों को आमंत्रित करने के लिए, ईपीसीएच ने ईमेल, ऑनलाइन बैनर, सोशल मीडिया, टेली कॉलिंग के माध्यम से और शो को बढ़ावा देने के लिए और विदेशों में भारतीय मिशनों और दूतावासों को शामिल करके विशेष प्रचार किया है।
100 देशों का पंजीकरण
महानिदेशक के मुताबिक इसमें 100 से अधिक देशों के विदेशी खरीदारों ने शो का दौरा करने के लिए पंजीकरण किया है। ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, अंडोरा, अर्जेंटीना, बेल्जियम, बरमूडा, बोलीविया, ब्राजील, बुल्गारिया, कनाडा, चिली, कोलंबिया, कोस्टा रिका, साइप्रस, चेकिया, डेनमार्क, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वाडोर, मिस्र, अल साल्वाडोर, फिनलैंड, फ्रांस, जॉर्जिया, जर्मनी, घाना, ग्रीस, ग्वाडेलोप, हैती, जॉर्डन का हाशमी राज्य, होंडुरस, हांगकांग, इंडोनेशिया, ईरान, आयरलैंड, इजरायल, इटली, जापान, केन्या, कुवैत, लातविया, लेबनान, मलेशिया, मालदीव, माल्टा, मॉरीशस, मैक्सिको, मोरक्को, मोजाम्बिक, नामीबिया, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया, नॉर्वे, ओमान, फिलिस्तीन, पेरू, फिलीपींस, पोलैंड, पुर्तगाल, कतर, लिथुआनिया गणराज्य, मोल्दोवा गणराज्य, रोमानिया, रूस, सऊदी अरब, सर्बिया, सिंगापुर, स्लोवेनिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, श्रीलंका, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड, ट्यूनीशिया, तुर्की, यू?एस? वर्जिन आइलैंड्स, यूक्त्रस्ेन, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट्स, उरुग्वे, वेनेजुएला, जाम्बिया इत्यादि और कई अन्य देश शामिल हैं। कार्यकारी निदेशक आरके वर्मा ने बताया कि प्रजेंट कंपनी, यूके, कारिबू, अर्जेंटीना, कोपेनट्राट, जर्मनी, डोलन डिज़ाइन्स, यूएसए, सिंपली होम, कनाडा, कॉस्ट प्लस वर्ल्ड मार्केट, यूएसए, कोस्टका, यूएसए, एल कॉर्टे, स्पेन, केआईएफ केआईएफ़ इम्पोर्ट्स, कनाडा, माइग्रोस, स्विट्जरलैंड, रिवेरा मैसन, नीदरलैंड, रॉस, , वीसीएनवाई, , लंदन ऑर्नमेंट्स, उरुग्वे जैसे विदेशी खरीदारों ने आईएचजीएफ की अपनी यात्रा की पुष्टि की है।
यह होगा खास
आईएचजीएफ़ दिल्ली मेले के इस संस्करण में, कलात्मक ब्लू पॉटरी, महाराष्ट्र के पालगढ़ की वरली आर्ट, केरल का स्क्रूपिन शिल्प, जयपुर की पारंपरिक मीनाकारी, वाराणसी के लकड़ी और लाह के सामान और खिलौने, जम्मू और कश्मीर का पारंपरिक शॉल शिल्प, वाराणसी की पारंपरिक कलात्मक गुलाबी मीनाकारी, कच्छ की हाथ की कढ़ाई, गुजरात और मंडी के पारंपरिक कलात्मक कुल्लू शॉल, हिमाचल प्रदेश के जीआई क्राफ्ट (भौगोलिक पहचान) का राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं द्वारा आईएचजीएफ़ में विषयगत प्रदर्शन भी मुख्य आकर्षणों में से एक होगा।
लोकल के लिए वोकल्र
कहा कि वोकल फॉर लोकल का पूर ध्यान रखा गया है। जैसे कि कोंडापल्ली टॉयज़, निर्मल टॉयज़, एटिकोप्पाका वुडन टॉयज़, चन्नपटना लैक्वर टॉयज़, राजा रानी डाल्ज़, टेराकोटा टॉयज़, किन्नल वुडन टॉयज़ इत्यादि के पास वर्चूअल आईएचजीएफ़ दिल्ली मेला, शरद ऋतु, 2020, में भागीदारी द्वारा भारतीय खिलौना निर्माताओं को विदेशी ख़रीदारों से जोड़ने के लिए निर्यात के मौके हैं। महानिदेशक ने बताया कि वर्ष 2019-20 के दौरान हस्तशिल्प निर्यात 25,270.14 करोड़ रुपये था और शुरू के छह महीनों के दौरान अर्थात् अप्रैल-सितंबर 2020-21 के दौरान 8425.64 करोड़ रुपए और 1121.38 मिलियन यूएस डालर का है।