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Moradabad News: कैसे बढ़े कारोबार, निर्यातकों पर चार गुना हवाई किराये की मार
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मुरादाबाद। विमान कंपनियों के फ्यूल सरचार्ज बढ़ने की वजह से जर्मनी समेत अन्य यूरोपीय देशों का किराया करीब चार गुना बढ़ गया है। निर्यातक जर्मनी समेत अन्य देशों में खरीदारों के साथ ऑर्डर की डील के लिए बैठकें करने नहीं जा पा रहे हैं। निर्यातकों का कहना है कि इस समय उन्हें सबसे ज्यादा फ्रैंकफुर्त में ऑर्डर के लिए खरीदारों से डील करने जाना होता है लेकिन हवाई किराया बढ़ने की वजह से यूरोप जाना कम कर दिया है।
मुरादाबाद जिले से प्रतिमाह 50 से 60 निर्यातक हस्तशिल्प उत्पादों के ऑर्डर व उसकीडील करने के लिए फ्रैंकफुर्त जाते हैं। निर्यातकों का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की वजह से जर्मनी का किराया करीब चार गुना बढ़ गया है। यूरोप जाने के लिए करीब तीन से चार घंटा अधिक समय भी लग रहा है। जर्मनी का सफर करने वाले निर्यातक बताते हैं कि बिजनेस क्लास का हवाई किराया 1.82 लाख से बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दिया गया है।
वहीं अमेरिका का बिजनेस क्लास का हवाई किराया चार लाख से बढ़ाकर करीब 15 लाख रुपये किया गया। यह किराया फरवरी से अब तक की अवधि में बढ़ा है। दि हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर एसोसिएशन के सचिव सतपाल ने बताया कि किराया बढ़ने की वजह से करीब दो महीने के भीतर जर्मनी जाने वाले निर्यातकों की संख्या 80 प्रतिशत घट गई है।
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इसकी वजह से निर्यातक खरीदारों से हस्तशिल्प उत्पादों की फाइनल डील नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में खरीदारों से फोन पर बातचीत होती रहती है। लेकिन कई ऐसे भी ऑर्डर होते हैं जिनकी फाइनल डील करने के लिए यूरोप जाना ही पड़ता है।
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हवाई किराये में सब्सिडी की मांग
शहर के कई निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका व जर्मनी समेत अन्य यूरोपीय देशों में फाइनल ऑर्डर की डील करने जाना है। हवाई किराया अधिक होने की वजह से काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकार से हमारी मांग है कि हमें हवाई सफर में किराये पर सब्सिडी दी जाए।
निर्यातक बोले
यूरोप आने-जाने में सबसे अधिक समस्या छोटे निर्यातकों को है। जिनकी डील करोड़ों रुपये के ऑर्डर की हो रही है, केवल वहीं फ्रैंकफुर्त जा रहे हैं। दो महीने के भीतर जर्मनी का किराया करीब चार गुना बढ़ा है।- विनय गुलाटी, चेयरमैन, गुलाटी एक्सपोर्ट
हस्तशिल्प उत्पाद पहुंचाने के लिए प्रति कंटेनर 1.40 लाख रुपये अधिक किराया देना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की वजह अब ऑर्डर की फाइनल डील करने जाने के लिए हवाई सफर का किराया चार गुना देना है। समस्याएं घटने की जगह लगातार बढ़ती जा रही हैंं। -विशाल अग्रवाल, पूर्व नेशनल चेयरमैन, यस
जर्मनी की दो हजार से अधिक फ्लाइटें रद्द हुई हैं। यूरोप जाने में चार से पांच घंटे अधिक समय लग रहा है। चार गुना हवाई किराया बढ़ गया है। इसलिए जर्मनी जाना काफी मुश्किल हो गया है। पश्चिम एशिया के देशों की फ्लाइट चलने के बाद मई में हवाई किराया कम होने का अनुमान है। -सतपाल, सचिव, दि हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर एसोसिएशन
जर्मनी जाने पर कई यूरोपीय देशों के खरीदारों से डील हो जाती है। लेकिन अब जर्मनी का किराया कई गुना बढ़ गया है। जब बड़े ऑर्डर मिलेंगे तभी वहां जाएंगे। सरकार से हमारी मांग है कि हवाई सफर के किराये पर सब्सिडी दी जाए। -नावेद उर रहमान, निर्यातक व प्रेसिडेंट, एमएचईए
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मुरादाबाद जिले से प्रतिमाह 50 से 60 निर्यातक हस्तशिल्प उत्पादों के ऑर्डर व उसकीडील करने के लिए फ्रैंकफुर्त जाते हैं। निर्यातकों का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की वजह से जर्मनी का किराया करीब चार गुना बढ़ गया है। यूरोप जाने के लिए करीब तीन से चार घंटा अधिक समय भी लग रहा है। जर्मनी का सफर करने वाले निर्यातक बताते हैं कि बिजनेस क्लास का हवाई किराया 1.82 लाख से बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दिया गया है।
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वहीं अमेरिका का बिजनेस क्लास का हवाई किराया चार लाख से बढ़ाकर करीब 15 लाख रुपये किया गया। यह किराया फरवरी से अब तक की अवधि में बढ़ा है। दि हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर एसोसिएशन के सचिव सतपाल ने बताया कि किराया बढ़ने की वजह से करीब दो महीने के भीतर जर्मनी जाने वाले निर्यातकों की संख्या 80 प्रतिशत घट गई है।
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इसकी वजह से निर्यातक खरीदारों से हस्तशिल्प उत्पादों की फाइनल डील नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में खरीदारों से फोन पर बातचीत होती रहती है। लेकिन कई ऐसे भी ऑर्डर होते हैं जिनकी फाइनल डील करने के लिए यूरोप जाना ही पड़ता है।
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हवाई किराये में सब्सिडी की मांग
शहर के कई निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका व जर्मनी समेत अन्य यूरोपीय देशों में फाइनल ऑर्डर की डील करने जाना है। हवाई किराया अधिक होने की वजह से काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकार से हमारी मांग है कि हमें हवाई सफर में किराये पर सब्सिडी दी जाए।
निर्यातक बोले
यूरोप आने-जाने में सबसे अधिक समस्या छोटे निर्यातकों को है। जिनकी डील करोड़ों रुपये के ऑर्डर की हो रही है, केवल वहीं फ्रैंकफुर्त जा रहे हैं। दो महीने के भीतर जर्मनी का किराया करीब चार गुना बढ़ा है।- विनय गुलाटी, चेयरमैन, गुलाटी एक्सपोर्ट
हस्तशिल्प उत्पाद पहुंचाने के लिए प्रति कंटेनर 1.40 लाख रुपये अधिक किराया देना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की वजह अब ऑर्डर की फाइनल डील करने जाने के लिए हवाई सफर का किराया चार गुना देना है। समस्याएं घटने की जगह लगातार बढ़ती जा रही हैंं। -विशाल अग्रवाल, पूर्व नेशनल चेयरमैन, यस
जर्मनी की दो हजार से अधिक फ्लाइटें रद्द हुई हैं। यूरोप जाने में चार से पांच घंटे अधिक समय लग रहा है। चार गुना हवाई किराया बढ़ गया है। इसलिए जर्मनी जाना काफी मुश्किल हो गया है। पश्चिम एशिया के देशों की फ्लाइट चलने के बाद मई में हवाई किराया कम होने का अनुमान है। -सतपाल, सचिव, दि हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर एसोसिएशन
जर्मनी जाने पर कई यूरोपीय देशों के खरीदारों से डील हो जाती है। लेकिन अब जर्मनी का किराया कई गुना बढ़ गया है। जब बड़े ऑर्डर मिलेंगे तभी वहां जाएंगे। सरकार से हमारी मांग है कि हवाई सफर के किराये पर सब्सिडी दी जाए। -नावेद उर रहमान, निर्यातक व प्रेसिडेंट, एमएचईए