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गाड़ीखाना प्राथमिक स्कूल पर कब्जा
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Fri, 04 Nov 2016 02:05 AM IST
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कटघर स्थित गाडीखाना प्राथमिक विद्यालय में दबंग ने स्कूल के एक कमरे में अपना सामान रख लिया है।
- फोटो : अमर उजाला
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महानगर के कुल 68 प्राथमिक विद्यालयों में से एक स्कूल ऐसा भी है जिस पर एक व्यक्ति खुलेआम कब्जा कर रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग ने उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया है। पांच साल पहले दबंग व्यकि्त ने स्कूल परिसर में अपनी बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी।
अब स्कूूूल के दो कमरों में से एक पर कब्जा भी कर लिया है, लेकिन विभाग अपनी आंखें बंद किए बैठा है। गाड़ीखाना प्राथमिक विद्यालय पचास साल से भी अधिक पुराना स्कूल है। इस स्कूल का रास्ता यहां के शिव दुर्गा मंदिर से होकर जाता है। मंदिर और विद्यालय एक-दूसरे से लगे हुए हैं। स्कूल की बाउंड़ी से लगा हुआ मकान भी है।
इस परिवार ने करीब पांच साल पहले आधे प्रांगण में बाउंड्री वॉल बनाकर उसे अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से इस पर आपत्ति तक नहीं जताई गई। जिसके चलते उक्त परिवार का हौसला बढ़ता गया और उसने विद्यालय के कुल दो कमरों में से एक पर अपना कब्जा कर लिया।
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उस कमरे में उस परिवार ने अपना कबाड़ का सामान डाल दिया है। वहीं इस कमरे के बाहर अपने घर का मलवा भी डालना शुरू कर अब स्कूल एक ही कमरे में संचालित होता है। स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण यहां माता-पिता अपने बच्चों को भेजने में डरते हैं। स्कूल में मात्र मात्र पच्चीस से 30 बच्चे ही पंजीकृत हैं।
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अब स्कूूूल के दो कमरों में से एक पर कब्जा भी कर लिया है, लेकिन विभाग अपनी आंखें बंद किए बैठा है। गाड़ीखाना प्राथमिक विद्यालय पचास साल से भी अधिक पुराना स्कूल है। इस स्कूल का रास्ता यहां के शिव दुर्गा मंदिर से होकर जाता है। मंदिर और विद्यालय एक-दूसरे से लगे हुए हैं। स्कूल की बाउंड़ी से लगा हुआ मकान भी है।
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इस परिवार ने करीब पांच साल पहले आधे प्रांगण में बाउंड्री वॉल बनाकर उसे अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से इस पर आपत्ति तक नहीं जताई गई। जिसके चलते उक्त परिवार का हौसला बढ़ता गया और उसने विद्यालय के कुल दो कमरों में से एक पर अपना कब्जा कर लिया।
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उस कमरे में उस परिवार ने अपना कबाड़ का सामान डाल दिया है। वहीं इस कमरे के बाहर अपने घर का मलवा भी डालना शुरू कर अब स्कूल एक ही कमरे में संचालित होता है। स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण यहां माता-पिता अपने बच्चों को भेजने में डरते हैं। स्कूल में मात्र मात्र पच्चीस से 30 बच्चे ही पंजीकृत हैं।