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Moradabad News: हस्तशिल्प निर्यात तीन महीने में 300 करोड़ का झटका
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मुरादाबाद। पश्चिम एशिया की जंग से झटका खाए पीतलनगरी के निर्यात को तीन माह में करीब 300 करोड़ रुपये की कारोबारी चोट मिली है। इस बीच करोड़ों रुपये के ऑर्डर रद्द होने, शिपमेंट प्रभावित रहने और भुगतान में देरी से निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।
निर्यातकों के अनुसार मुरादाबाद से जनवरी में करीब 200 करोड़ और फरवरी में 208 करोड़ रुपये का निर्यात कारोबार हुआ था। इसके बाद युद्ध के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने लगीं। मार्च, अप्रैल और मई में निर्यात लगभग आधा रह गया, जिससे तीन महीनों में करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
दूसरी ओर विदेशों से आयात होने वाले कच्चे माल की महंगाई, विदेश जाने वाले कंटेनरों के भाड़े में वृद्धि और बिजली संकट के बीच फर्म संचालन में महंगे डीजल खर्च की मार पूरे कारोबारी चक्र को बिगाड़ रही है। निर्यातकों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में कारोबार और प्रभावित हो सकता है।
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निर्यातक बोले
फरवरी से पहले मिले ऑर्डरों की ही आपूर्ति हो सकी है। युद्ध शुरू होने के बाद नए ऑर्डर लगभग बंद हो गए हैं। ऑर्डर रद्द होने की भी समस्या है। निर्यात में सबसे ज्यादा गिरावट आई है।
- अजय गुप्ता, निर्यातक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती
मिडिल ईस्ट का करीब 50 प्रतिशत कारोबार ही बचा है। पिछले तीन महीनों से ऑर्डर लगातार कम हो रहे हैं। भुगतान, शिपमेंट और नए ऑर्डरों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
- सतपाल, निर्यातक एवं सचिव, दि हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
मिडिल ईस्ट के कई बड़े ऑर्डर निरस्त हो चुके हैं। पिछले तीन महीनों में बहुत कम नए ऑर्डर मिले हैं। मौजूदा हालात में निर्यातकों को कारोबारी माहौल बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
-अवधेश अग्रवाल, सीओए सदस्य, ईपीसीएच
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निर्यातकों के अनुसार मुरादाबाद से जनवरी में करीब 200 करोड़ और फरवरी में 208 करोड़ रुपये का निर्यात कारोबार हुआ था। इसके बाद युद्ध के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने लगीं। मार्च, अप्रैल और मई में निर्यात लगभग आधा रह गया, जिससे तीन महीनों में करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
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दूसरी ओर विदेशों से आयात होने वाले कच्चे माल की महंगाई, विदेश जाने वाले कंटेनरों के भाड़े में वृद्धि और बिजली संकट के बीच फर्म संचालन में महंगे डीजल खर्च की मार पूरे कारोबारी चक्र को बिगाड़ रही है। निर्यातकों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में कारोबार और प्रभावित हो सकता है।
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निर्यातक बोले
फरवरी से पहले मिले ऑर्डरों की ही आपूर्ति हो सकी है। युद्ध शुरू होने के बाद नए ऑर्डर लगभग बंद हो गए हैं। ऑर्डर रद्द होने की भी समस्या है। निर्यात में सबसे ज्यादा गिरावट आई है।
- अजय गुप्ता, निर्यातक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती
मिडिल ईस्ट का करीब 50 प्रतिशत कारोबार ही बचा है। पिछले तीन महीनों से ऑर्डर लगातार कम हो रहे हैं। भुगतान, शिपमेंट और नए ऑर्डरों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
- सतपाल, निर्यातक एवं सचिव, दि हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
मिडिल ईस्ट के कई बड़े ऑर्डर निरस्त हो चुके हैं। पिछले तीन महीनों में बहुत कम नए ऑर्डर मिले हैं। मौजूदा हालात में निर्यातकों को कारोबारी माहौल बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
-अवधेश अग्रवाल, सीओए सदस्य, ईपीसीएच