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Moradabad News: नहीं आ रहा सात दिन में जीएसटी रिफंड, व्यापारी परेशान
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मुरादाबाद। व्यापारियों को सात दिन में जीएसटी रिफंड नहीं आने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों के मुताबिक पांच और 18 प्रतिशत की जीएसटी दर लागू होने के बाद 13 प्रतिशत का जीएसटी रिफंड होना है। यह रिटर्न दाखिल करने के सात दिनों के अंदर आ जाना चाहिए लेकिन अभी रिफंड होने में 15 से 20 दिन लग जा रहे हैं। इसकी वजह से लाखों रुपये सरकार के पास फंसे रहते हैं। व्यापारी कच्चे माल का आर्डर नहीं दे पाते हैं।
बर्तन बाजार, चौमुखा पुल समेत अन्य जगहों के व्यापारी मूर्ति, बर्तन समेत अन्य सामान बनाने के लिए पीतल, एल्युमिनियम, स्टील आदि का कच्चा माल खरीदते हैं। उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल जानी का कहना है कि बर्तन व मूर्तियां बनाने के लिए कच्चा माल खरीदने पर 18 प्रतिशत जीएसटी के साथ पूरी कीमत चुकानी पड़ती है। लेकिन जब इससे बर्तन समेत अन्य सामान बनाकर बेचा जाता है तो इस पर पांच प्रतिशत की जीएसटी लगता है। 13 प्रतिशत की जीएसटी रिटर्न भरने के बाद मिलता है। जीएसटी मिलने में 15 से 20 दिन लग जा रहे हैं। इसकी वजह से व्यापारियों का लाखों रुपया सरकार के पास पड़ा रहता है। व्यापारियों के पास फिर से कच्चा माल खरीदने के लिए रकम कम पड़ जाती है। जबकि जीएसटी की नई दर लागू होने के बाद से सात दिन में रिफंड होने का प्रावधान है। व्यापारी समय से सामानों का उत्पादन नहीं कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि जीएसटी की नई दर लागू होने के बाद से यह समस्या और बढ़ गई है।
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व्यापारी बोले-
-तीन से एक सप्ताह में जीएसटी रिटर्न मिल जाने से व्यापारियों को काफी सहूलियत मिलेगी। अभी जीएसटी रिटर्न होने में 15 से अधिक दिन लग जा रहे हैं। इसकी वजह से व्यापारियों को फिर से माल खरीदने में समस्या बढ़ जा रही है। कई बार मांग की गई है कि जीएसटी के बीच के गैप को कम किया जाए लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं होती नजर आ रही है। - अरविंद अग्रवाल जानी, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल
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-पांच से 18 प्रतिशत जीएसटी के बीच 13 प्रतिशत के गैप को घटाकर पांच प्रतिशत कर देना चाहिए। पांच और 18 प्रतिशत की जीएसटी के बीच अधिक गैप हो जा रहा है। इसकी वजह से व्यापारियों का पैसा फंसा रहता है। जीएसटी के बीच का अंतर कम होने से सरकार के पास कम पैसा फंसा रहेगा। - सुनील अग्रवाल, बर्तन कारोबारी
-एक ओर रा मेटेरियल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर कच्चा माल और तैयार सामान पर लगाए गए जीएसटी के बीच का अंतर 13 प्रतिशत है। अधिक पैसा लगातार माल खरीदना पड़ रहा है। जीएसटी आने में भी 15 से 20 दिन लग जा रहे है। इसकी वजह से व्यापारियों की समस्या और बढ़ गई है। - गौरव अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल
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बर्तन बाजार, चौमुखा पुल समेत अन्य जगहों के व्यापारी मूर्ति, बर्तन समेत अन्य सामान बनाने के लिए पीतल, एल्युमिनियम, स्टील आदि का कच्चा माल खरीदते हैं। उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल जानी का कहना है कि बर्तन व मूर्तियां बनाने के लिए कच्चा माल खरीदने पर 18 प्रतिशत जीएसटी के साथ पूरी कीमत चुकानी पड़ती है। लेकिन जब इससे बर्तन समेत अन्य सामान बनाकर बेचा जाता है तो इस पर पांच प्रतिशत की जीएसटी लगता है। 13 प्रतिशत की जीएसटी रिटर्न भरने के बाद मिलता है। जीएसटी मिलने में 15 से 20 दिन लग जा रहे हैं। इसकी वजह से व्यापारियों का लाखों रुपया सरकार के पास पड़ा रहता है। व्यापारियों के पास फिर से कच्चा माल खरीदने के लिए रकम कम पड़ जाती है। जबकि जीएसटी की नई दर लागू होने के बाद से सात दिन में रिफंड होने का प्रावधान है। व्यापारी समय से सामानों का उत्पादन नहीं कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि जीएसटी की नई दर लागू होने के बाद से यह समस्या और बढ़ गई है।
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व्यापारी बोले-
-तीन से एक सप्ताह में जीएसटी रिटर्न मिल जाने से व्यापारियों को काफी सहूलियत मिलेगी। अभी जीएसटी रिटर्न होने में 15 से अधिक दिन लग जा रहे हैं। इसकी वजह से व्यापारियों को फिर से माल खरीदने में समस्या बढ़ जा रही है। कई बार मांग की गई है कि जीएसटी के बीच के गैप को कम किया जाए लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं होती नजर आ रही है। - अरविंद अग्रवाल जानी, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल
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-पांच से 18 प्रतिशत जीएसटी के बीच 13 प्रतिशत के गैप को घटाकर पांच प्रतिशत कर देना चाहिए। पांच और 18 प्रतिशत की जीएसटी के बीच अधिक गैप हो जा रहा है। इसकी वजह से व्यापारियों का पैसा फंसा रहता है। जीएसटी के बीच का अंतर कम होने से सरकार के पास कम पैसा फंसा रहेगा। - सुनील अग्रवाल, बर्तन कारोबारी
-एक ओर रा मेटेरियल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर कच्चा माल और तैयार सामान पर लगाए गए जीएसटी के बीच का अंतर 13 प्रतिशत है। अधिक पैसा लगातार माल खरीदना पड़ रहा है। जीएसटी आने में भी 15 से 20 दिन लग जा रहे है। इसकी वजह से व्यापारियों की समस्या और बढ़ गई है। - गौरव अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संयुक्त व्यापार मंडल