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आपराधिक इतिहास छिपाकर डाक विभाग में हासिल कर ली नौकरी
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मुरादाबाद। आपराधिक इतिहास छिपाकर सरकारी में नौकरी हासिल करने के मामले में अदालत ने प्रार्थनापत्र को स्वीकार करते हुए परिवाद दायर कर लिया है। इस मामले में अब तीन फरवरी को सुनवाई होगी।
सिविल लाइंस थानाक्षेत्र के आशियाना कालोनी निवासी कृष्ण गोपाल ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थनापत्र दाखिल किया था। जिसमें उन्होंने बताया कि मझोला के प्रकाश नगर लाइन निवासी विजय कुमार भारतीय डाक विभाग में पोस्टल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है। विजय कुमार की तैनाती बरेली डाक मंडल के आंवला क्षेत्र के रामनगर उप डाकघर में है। उसकी नियुक्ति 26 नवंबर 2018 को हुई थी, जबकि विजय कुमार के खिलाफ मुरादाबाद के सिविल लाइंस में दो आपराधिक मुकदमे 2016 में ही दर्ज हो चुके थे। जिनमें चोरी, बलवा समेत अन्य धाराओं के मुकदमे लंबित थे। ऐसी स्थिति में विजय कुमार का चरित्र प्रमाणपत्र और पिछले जीवन के बारे में पुलिस ने किस आधार पर सत्यापन किया। उन्होंने अपने प्रार्थनापत्र में बताया कि सत्यापन से चरित्र प्रमाणपत्र के लिए एलआईयू समेत डीसीआरबी की रिपोर्ट अनिवार्य होती है।
उन्होंने डाक विभाग से भी विजय कुमार की नौकरी के विषय में जानकारी लेनी चाही, तब विभाग ने पुलिस द्वारा जारी चरित्र प्रमाणपत्र को आधार बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद कृष्ण गोपाल ने अदालत की शरण ली। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विमल वर्मा की अदालत में की गई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विजय के मामले को दर्ज करते हुए अग्रिम सुनवाई के लिए 3 फरवरी नियत की है।
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सिविल लाइंस थानाक्षेत्र के आशियाना कालोनी निवासी कृष्ण गोपाल ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थनापत्र दाखिल किया था। जिसमें उन्होंने बताया कि मझोला के प्रकाश नगर लाइन निवासी विजय कुमार भारतीय डाक विभाग में पोस्टल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है। विजय कुमार की तैनाती बरेली डाक मंडल के आंवला क्षेत्र के रामनगर उप डाकघर में है। उसकी नियुक्ति 26 नवंबर 2018 को हुई थी, जबकि विजय कुमार के खिलाफ मुरादाबाद के सिविल लाइंस में दो आपराधिक मुकदमे 2016 में ही दर्ज हो चुके थे। जिनमें चोरी, बलवा समेत अन्य धाराओं के मुकदमे लंबित थे। ऐसी स्थिति में विजय कुमार का चरित्र प्रमाणपत्र और पिछले जीवन के बारे में पुलिस ने किस आधार पर सत्यापन किया। उन्होंने अपने प्रार्थनापत्र में बताया कि सत्यापन से चरित्र प्रमाणपत्र के लिए एलआईयू समेत डीसीआरबी की रिपोर्ट अनिवार्य होती है।
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उन्होंने डाक विभाग से भी विजय कुमार की नौकरी के विषय में जानकारी लेनी चाही, तब विभाग ने पुलिस द्वारा जारी चरित्र प्रमाणपत्र को आधार बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद कृष्ण गोपाल ने अदालत की शरण ली। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विमल वर्मा की अदालत में की गई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विजय के मामले को दर्ज करते हुए अग्रिम सुनवाई के लिए 3 फरवरी नियत की है।
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