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हैंडबॉल : सेमीफाइनल में भिड़ेंगे गोरखपुर-बस्ती
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मुरादाबाद।
प्रदेश स्तरीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में गोरखपुर, बस्ती, लखनऊ व बनारस मंडल की टीमें सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। इन टीमों ने बेहतरीन खेल का परिचय देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं प्रयागराज, आगर, अयोध्या हॉस्टल की टीमों का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा लेकिन अंतिम चार में जगह नहीं बना सकीं।
यह खेल प्रतियोगिता सोनकपुर स्टेडियम में आयोजित हो रही हैं। शुक्रवार को प्रतियोगिता के सेमीफाइनल व फाइनल मैच खेले जाने हैं। पहला सेमीफाइनल गोरखपुर बनाम बस्ती व दूसरा लखनऊ व बनारस मंडल के बीच खेला जाएगा। बृहस्पतिवार को लीग मैच खेले गए। पहला मैच लखनऊ बनाम बस्ती मंडल खेला गया। इसमें बस्ती ने 22-17 से मैच जीत लिया। बस्ती की ओर से राधना ने आठ व नूरी ने छह गोल किए। लखनऊ की ओर से रितु ने 10 व शीतल ने चार गोल दागे। दूसरा मैच सहारनपुर बनाम झांसी मंडल के बीच खेला गया। इसमें झांसी ने 7-1 से जीत हासिल की। झांसी की ओर से सोनम ने तीन व निधि ने दो गोल किए। सहारनपुर की ओर से शैली ने एक मात्र गोल किया।
प्रयागराज बनाम मुजफ्फरनगर के बीच खेले गए मैच में प्रयागराज ने 18-6 से जीत हासिल की। प्रयागराज की ओर से वैष्णवी ने आठ व चंदा ने सात गोल किए। मुजफ्फरनगर की ओर से शिवानी ने तीन व खुशी ने दो गोल दागे। मुरादाबाद बनाम लखनऊ मैच में लखनऊ ने 21-11 से जीत दर्ज की। लखनऊ की ओर से शीतल ने नौ व रितु ने सात गोल किए। मुरादाबाद की ओर से अलका ने चार व पायल ने दो गोल किए। बनारस ने लीग मैच में गोरखपुर की मजबूत टीम को 15-13 से मात दी और सेमीफाइनल में जगह बनाई। क्वार्टर फाइनल के मैच में गोरखपुर ने अयोध्या हॉस्टल को 16-12 से हराया और सेमीफाइनल में जगह बनाई।
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इन्होंने बढ़ाया खिलाड़ियों का उत्साह
प्रतियोगिता के दौरान उत्तर प्रदेश ओलंपिक संघ के संयुक्त सचिव डॉ. अजय पाठक, मुख्य रेफरी अमित कुमार, क्रिकेट कोच यश शुक्ला, खो-खो कोच धीरज कुमार, बैडमिंटन कोच मोहम्मद आसिफ सिद्दीकी, जूडो कोच रुचि अग्रवाल, सुप्रिया, सीएल वर्मा, प्रदीप सक्सैना, अंकित अग्रवाल आदि मौजूद रहे। प्रतियोगिता के निर्णायक संदीप राय, पवेंद्र यादव, कौशल दीक्षित, अमित पांडे, प्रेम, सूर्यभान, नफीस, अमित पांडे, साक्षी यादव, पूजा, नेहा पांडे, नीलम, परसुमन आनंद रहे।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी गोरखपुर, बस्ती की टीम में शामिल
मुरादाबाद। प्रदेश स्तरीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में प्रतिभाग के लिए 18 मंडलों की महिला खिलाड़ी मुरादाबाद पहुंचीं हैं। इनमें गोरखपुर व बस्ती की टीम में सबसे ज्यादा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। इसके बाद बनारस का नंबर है। लिहाजा तीनों ही टीमों का प्रदर्शन भी शानदार रहा है।
गोरखपुर व बस्ती की दावेदारी फाइनल मुकाबले के लिए बेहद मजबूत है। खेल के जानकारों का मानना है कि यदि सेमीफाइनल में गोरखपुर व बस्ती की भिड़ंत आपस में नहीं हुई तो दोनों टीमें फाइनल में आमने सामने हो सकती हैं। लखनऊ की टीम मजबूत है लेकिन इस प्रतियोगिता में गोरखपुर व बस्ती मंडल की टीमें दर्शकों की फेवरेट बनकर उभरी हैं। इन टीमों की खिलाड़ियों के पास राष्ट्रीय स्तर के कई पदक हैं।
पिता नहीं रहे तो बहन ने किया सपोर्ट, ज्योति ने जीते मेडल
मेरे पिता ऋषिलाल 2017 में दिवंगत हो गए। इसके बाद मेरी बड़ी बहन ने मुझे खेल के लिए प्रेरित किया। मैंने जूनियर नेशनल, सीनियर नेशनल व खेलो इंडिया में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। बहन की शादी हो गई है, इसके बाद भी मेरे खेल का पूरा खर्च उठाती हैं। - ज्योति, गोरखपुर
राष्ट्रीय मेडल ने आरती को दिलाई रेलवे की नौकरी
मुझे हैंडबॉल खेलते हुए आठ साल हो गए हैं। पढ़ाई में मन नहीं लगता था तो मैंने खेलना शुरु किया था। इसके बाद खेल में इस तरह रुचि जागी कि नेशनल में आठ बार मेडल जीत चुकी हूं। इसके बल पर रेलवे में नौकरी मिल गई है। हाल ही में कजाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था। - आरती यादव, गोरखपुर
समृद्धि ने अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में जीता स्वर्ण, पंजाब पुलिस की नौकरी का मिला ऑफर
मैंने चार अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लिया है। 2023 में इंटरनेशनल हैंडबॉल फेडरेशन के टूर्नामेंट में मैंने स्वर्ण पदक जीता था। नेशनल में चार बार पदक जीत चुकी हूं। पंजाब पुलिस में सब इंस्पेक्टर की जॉब ऑफर हुई थी लेकिन मुझे अपने पापा की तरह रेलवे में जाना है। इसलिए पुलिस की नौकरी नहीं की। - समृद्धि सिंह, गोरखपुर
पिता बेचते हैं पान, बेटी खेलों में बढ़ा रही मान
मैंने
चार साल पहले हैंडबॉल खेलना शुरू किया था। मेरे पिता राजेश कुमार की पान की दुकान है, वह चाहते हैं कि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बनूं। खेल के लिए हमेशा सपोर्ट करते हैं। मैंने दो बार जूनियर नेशनल व एक बार सीनियर नेशनल खेला है। इनमें दो कांस्य पदक जीते हैं। अब एक बार फिर नेशनल में पहुंचने का मौका है। - सुनीत राज, बस्ती
अंशिका के पास हैं चार राष्ट्रीय स्तर के पदक
मेरे घर के पास स्टेडियम में कई लोग हैंडबॉल खेलते थे। उन्हें देखकर मेरा भी मन किया तो मैंने स्टेडियम ज्वाइन कर लिया। पिछले नौ साल से अभ्यास कर रही हूं। जूनियर, सब जूनियर, सीनियर नेशनल तक हर प्रतियोगिता में मेडल जीते हैं। इनमें एक सिल्वर मेडल है और बाकी ब्रांंज है। इस बार नेशनल में पहुंचकर गोल्ड जीतना है। - अंशिका शर्मा
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प्रदेश स्तरीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में गोरखपुर, बस्ती, लखनऊ व बनारस मंडल की टीमें सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। इन टीमों ने बेहतरीन खेल का परिचय देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं प्रयागराज, आगर, अयोध्या हॉस्टल की टीमों का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा लेकिन अंतिम चार में जगह नहीं बना सकीं।
यह खेल प्रतियोगिता सोनकपुर स्टेडियम में आयोजित हो रही हैं। शुक्रवार को प्रतियोगिता के सेमीफाइनल व फाइनल मैच खेले जाने हैं। पहला सेमीफाइनल गोरखपुर बनाम बस्ती व दूसरा लखनऊ व बनारस मंडल के बीच खेला जाएगा। बृहस्पतिवार को लीग मैच खेले गए। पहला मैच लखनऊ बनाम बस्ती मंडल खेला गया। इसमें बस्ती ने 22-17 से मैच जीत लिया। बस्ती की ओर से राधना ने आठ व नूरी ने छह गोल किए। लखनऊ की ओर से रितु ने 10 व शीतल ने चार गोल दागे। दूसरा मैच सहारनपुर बनाम झांसी मंडल के बीच खेला गया। इसमें झांसी ने 7-1 से जीत हासिल की। झांसी की ओर से सोनम ने तीन व निधि ने दो गोल किए। सहारनपुर की ओर से शैली ने एक मात्र गोल किया।
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प्रयागराज बनाम मुजफ्फरनगर के बीच खेले गए मैच में प्रयागराज ने 18-6 से जीत हासिल की। प्रयागराज की ओर से वैष्णवी ने आठ व चंदा ने सात गोल किए। मुजफ्फरनगर की ओर से शिवानी ने तीन व खुशी ने दो गोल दागे। मुरादाबाद बनाम लखनऊ मैच में लखनऊ ने 21-11 से जीत दर्ज की। लखनऊ की ओर से शीतल ने नौ व रितु ने सात गोल किए। मुरादाबाद की ओर से अलका ने चार व पायल ने दो गोल किए। बनारस ने लीग मैच में गोरखपुर की मजबूत टीम को 15-13 से मात दी और सेमीफाइनल में जगह बनाई। क्वार्टर फाइनल के मैच में गोरखपुर ने अयोध्या हॉस्टल को 16-12 से हराया और सेमीफाइनल में जगह बनाई।
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इन्होंने बढ़ाया खिलाड़ियों का उत्साह
प्रतियोगिता के दौरान उत्तर प्रदेश ओलंपिक संघ के संयुक्त सचिव डॉ. अजय पाठक, मुख्य रेफरी अमित कुमार, क्रिकेट कोच यश शुक्ला, खो-खो कोच धीरज कुमार, बैडमिंटन कोच मोहम्मद आसिफ सिद्दीकी, जूडो कोच रुचि अग्रवाल, सुप्रिया, सीएल वर्मा, प्रदीप सक्सैना, अंकित अग्रवाल आदि मौजूद रहे। प्रतियोगिता के निर्णायक संदीप राय, पवेंद्र यादव, कौशल दीक्षित, अमित पांडे, प्रेम, सूर्यभान, नफीस, अमित पांडे, साक्षी यादव, पूजा, नेहा पांडे, नीलम, परसुमन आनंद रहे।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी गोरखपुर, बस्ती की टीम में शामिल
मुरादाबाद। प्रदेश स्तरीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में प्रतिभाग के लिए 18 मंडलों की महिला खिलाड़ी मुरादाबाद पहुंचीं हैं। इनमें गोरखपुर व बस्ती की टीम में सबसे ज्यादा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। इसके बाद बनारस का नंबर है। लिहाजा तीनों ही टीमों का प्रदर्शन भी शानदार रहा है।
गोरखपुर व बस्ती की दावेदारी फाइनल मुकाबले के लिए बेहद मजबूत है। खेल के जानकारों का मानना है कि यदि सेमीफाइनल में गोरखपुर व बस्ती की भिड़ंत आपस में नहीं हुई तो दोनों टीमें फाइनल में आमने सामने हो सकती हैं। लखनऊ की टीम मजबूत है लेकिन इस प्रतियोगिता में गोरखपुर व बस्ती मंडल की टीमें दर्शकों की फेवरेट बनकर उभरी हैं। इन टीमों की खिलाड़ियों के पास राष्ट्रीय स्तर के कई पदक हैं।
पिता नहीं रहे तो बहन ने किया सपोर्ट, ज्योति ने जीते मेडल
मेरे पिता ऋषिलाल 2017 में दिवंगत हो गए। इसके बाद मेरी बड़ी बहन ने मुझे खेल के लिए प्रेरित किया। मैंने जूनियर नेशनल, सीनियर नेशनल व खेलो इंडिया में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। बहन की शादी हो गई है, इसके बाद भी मेरे खेल का पूरा खर्च उठाती हैं। - ज्योति, गोरखपुर
राष्ट्रीय मेडल ने आरती को दिलाई रेलवे की नौकरी
मुझे हैंडबॉल खेलते हुए आठ साल हो गए हैं। पढ़ाई में मन नहीं लगता था तो मैंने खेलना शुरु किया था। इसके बाद खेल में इस तरह रुचि जागी कि नेशनल में आठ बार मेडल जीत चुकी हूं। इसके बल पर रेलवे में नौकरी मिल गई है। हाल ही में कजाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था। - आरती यादव, गोरखपुर
समृद्धि ने अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में जीता स्वर्ण, पंजाब पुलिस की नौकरी का मिला ऑफर
मैंने चार अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लिया है। 2023 में इंटरनेशनल हैंडबॉल फेडरेशन के टूर्नामेंट में मैंने स्वर्ण पदक जीता था। नेशनल में चार बार पदक जीत चुकी हूं। पंजाब पुलिस में सब इंस्पेक्टर की जॉब ऑफर हुई थी लेकिन मुझे अपने पापा की तरह रेलवे में जाना है। इसलिए पुलिस की नौकरी नहीं की। - समृद्धि सिंह, गोरखपुर
पिता बेचते हैं पान, बेटी खेलों में बढ़ा रही मान
मैंने
चार साल पहले हैंडबॉल खेलना शुरू किया था। मेरे पिता राजेश कुमार की पान की दुकान है, वह चाहते हैं कि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बनूं। खेल के लिए हमेशा सपोर्ट करते हैं। मैंने दो बार जूनियर नेशनल व एक बार सीनियर नेशनल खेला है। इनमें दो कांस्य पदक जीते हैं। अब एक बार फिर नेशनल में पहुंचने का मौका है। - सुनीत राज, बस्ती
अंशिका के पास हैं चार राष्ट्रीय स्तर के पदक
मेरे घर के पास स्टेडियम में कई लोग हैंडबॉल खेलते थे। उन्हें देखकर मेरा भी मन किया तो मैंने स्टेडियम ज्वाइन कर लिया। पिछले नौ साल से अभ्यास कर रही हूं। जूनियर, सब जूनियर, सीनियर नेशनल तक हर प्रतियोगिता में मेडल जीते हैं। इनमें एक सिल्वर मेडल है और बाकी ब्रांंज है। इस बार नेशनल में पहुंचकर गोल्ड जीतना है। - अंशिका शर्मा