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Moradabad News: सरगी से चंद्रमा के दीदार तक...हर रस्म में पंजाबी परंपरा की झलक
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मुरादाबाद। शहर में करवाचौथ का त्योहार उत्साह से मनाया जा रहा है। पंजाबी समाज में चतुर्थी पर सुबह सरगी से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं। करवाचौथ उनके लिए आस्था, प्रेम, विश्वास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
पंजाबी परिवारों में करवाचौथ की शुरुआत सूर्योदय से पहले होती है। सास अपनी बहू को सरगी देती है, जिसमें फल, मिठाइयां और सूखे मेवे होते हैं। इसे सास का आशीर्वाद और बहू के प्रति स्नेह का प्रतीक माना जाता है। मुरादाबाद के मोहल्लों, सोसायटियों और मंदिरों में सामूहिक पूजा का आयोजन होता है। इसमें व्रत की कथा सुनना और थाली घुमाने की परंपरा खास आकर्षण का केंद्र होती है।
सामूहिक पूजा और सरगी की परंपरा
वीना अरोड़ा ने बताया कि उनके घर में तीन पीढ़ियां एक साथ व्रत रखती हैं। वह अपनी बहू को सरगी देती हैं और उनकी बहू अपनी बहू को सरगी देती है। परंपरा सोसायटी में करीब 20 से 25 महिलाएं सामूहिक पूजा में शामिल होंगी। आदर्श नगर सनातन धर्म मंदिर में भी सामूहिक करवाचौथ मनाया जाता है।
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एक बार में करीब 40 महिलाएं करती हैं पूजन
आदर्श नगर सनातन धर्म मंदिर में सामूहिक रूप से करवाचौथ मनाया जाता है। कार्यक्रम संयोजक सीमा भोला का कहना है कि त्योहार के दिन दोपहर तीन बजे से महिलाएं एकत्रित होना शुरू हो जाती हैं और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न की जाती है।
व्रत का उत्साह और पहली बार की तैयारी
लाजपत नगर निवासी वंशिका चड्ढा अपना पहला करवाचौथ मना रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मेहंदी लग चुकी है और मायके से शृंगार का सामान व अन्य उपहार आएंगे। वंशिका को पहली बार व्रत रखने में थोड़ी घबराहट के साथ उत्साह भी है। उनके घर में सामूहिक पूजा होगी और सरगी की परंपरा भी निभाई जाएगी। सरगी में सूखे मेवे, फल, रबड़ी और सरसों का साग का सेवन जरूरी होता है। पति द्वारा मिलने वाला उपहार अप्रत्याशित है।
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पंजाबी परिवारों में करवाचौथ की शुरुआत सूर्योदय से पहले होती है। सास अपनी बहू को सरगी देती है, जिसमें फल, मिठाइयां और सूखे मेवे होते हैं। इसे सास का आशीर्वाद और बहू के प्रति स्नेह का प्रतीक माना जाता है। मुरादाबाद के मोहल्लों, सोसायटियों और मंदिरों में सामूहिक पूजा का आयोजन होता है। इसमें व्रत की कथा सुनना और थाली घुमाने की परंपरा खास आकर्षण का केंद्र होती है।
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सामूहिक पूजा और सरगी की परंपरा
वीना अरोड़ा ने बताया कि उनके घर में तीन पीढ़ियां एक साथ व्रत रखती हैं। वह अपनी बहू को सरगी देती हैं और उनकी बहू अपनी बहू को सरगी देती है। परंपरा सोसायटी में करीब 20 से 25 महिलाएं सामूहिक पूजा में शामिल होंगी। आदर्श नगर सनातन धर्म मंदिर में भी सामूहिक करवाचौथ मनाया जाता है।
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एक बार में करीब 40 महिलाएं करती हैं पूजन
आदर्श नगर सनातन धर्म मंदिर में सामूहिक रूप से करवाचौथ मनाया जाता है। कार्यक्रम संयोजक सीमा भोला का कहना है कि त्योहार के दिन दोपहर तीन बजे से महिलाएं एकत्रित होना शुरू हो जाती हैं और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न की जाती है।
व्रत का उत्साह और पहली बार की तैयारी
लाजपत नगर निवासी वंशिका चड्ढा अपना पहला करवाचौथ मना रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मेहंदी लग चुकी है और मायके से शृंगार का सामान व अन्य उपहार आएंगे। वंशिका को पहली बार व्रत रखने में थोड़ी घबराहट के साथ उत्साह भी है। उनके घर में सामूहिक पूजा होगी और सरगी की परंपरा भी निभाई जाएगी। सरगी में सूखे मेवे, फल, रबड़ी और सरसों का साग का सेवन जरूरी होता है। पति द्वारा मिलने वाला उपहार अप्रत्याशित है।