{"_id":"683372f07bfefef2d0090362","slug":"forced-to-buy-books-from-private-publishers-schools-shy-away-from-answering-moradabad-news-c-15-1-mbd1005-651983-2025-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: जबरन खरीदवाईं निजी प्रकाशकों की किताबें, जवाब देने से कतरा रहे स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: जबरन खरीदवाईं निजी प्रकाशकों की किताबें, जवाब देने से कतरा रहे स्कूल
विज्ञापन
मुरादाबाद। नए शैक्षिक सत्र में निजी स्कूलों ने मनमानी करते हुए निर्धारित दुकानों से ही अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने को मजबूर किया। इसकी शिकायत हुई तो डीआईओएस ने जिले के 26 स्कूलों को नोटिस जारी किए, लेकिन अब स्कूल संचालक नोटिस का जवाब देने से कतरा रहे हैं। एक स्कूल ने जवाब भी दिया है तो उसने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
नया शैक्षिक सत्र शुरू होने पर अभिभावकों ने जिलाधिकारी अनुज सिंह और डीआईओएस देवेंद्र कुमार पांडेय से शिकायत की थी कि स्कूल एनसीईआरटी की किताबें पढ़वाने के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदवा रहे हैं।
एनसीईआरटी की किताबों की तुलना में स्कूलों द्वारा लगवाई गईं किताबें आठ गुना महंगी थीं। अभिभावक संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को स्कूलों द्वारा लगवाई गईं किताबों से संबंधित 26 स्कूलों की सूची भी सौंपी थी। इन स्कूलों की किताबें सिर्फ सात दुकानों पर ही मिल रहीं थीं।
विज्ञापन
एक दुकानदार के यहां पर करीब 13 स्कूलों की किताबें मिल रहीं थीं, जबकि संबंधित दुकानदार की ही दूसरी दुकान पर छह स्कूलों की किताबें मिल रही थीं। तीन अप्रैल को हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में यह मुद्दा उठने के बाद 20 मई को जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय ने 26 स्कूलों को नोटिस जारी किया था और जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। नोटिस देने के पांच दिन बीत जाने क बाद सिर्फ एक स्कूल ने ही जवाब भेजा है। लेकिन उसनेे जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। बाकी के स्कूलों के जवाब अभी तक जिला विद्यालय निरीक्षक को नहीं मिला है।
विज्ञापन
नया शैक्षिक सत्र शुरू होने पर अभिभावकों ने जिलाधिकारी अनुज सिंह और डीआईओएस देवेंद्र कुमार पांडेय से शिकायत की थी कि स्कूल एनसीईआरटी की किताबें पढ़वाने के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदवा रहे हैं।
विज्ञापन
एनसीईआरटी की किताबों की तुलना में स्कूलों द्वारा लगवाई गईं किताबें आठ गुना महंगी थीं। अभिभावक संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को स्कूलों द्वारा लगवाई गईं किताबों से संबंधित 26 स्कूलों की सूची भी सौंपी थी। इन स्कूलों की किताबें सिर्फ सात दुकानों पर ही मिल रहीं थीं।
विज्ञापन
एक दुकानदार के यहां पर करीब 13 स्कूलों की किताबें मिल रहीं थीं, जबकि संबंधित दुकानदार की ही दूसरी दुकान पर छह स्कूलों की किताबें मिल रही थीं। तीन अप्रैल को हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में यह मुद्दा उठने के बाद 20 मई को जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय ने 26 स्कूलों को नोटिस जारी किया था और जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। नोटिस देने के पांच दिन बीत जाने क बाद सिर्फ एक स्कूल ने ही जवाब भेजा है। लेकिन उसनेे जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। बाकी के स्कूलों के जवाब अभी तक जिला विद्यालय निरीक्षक को नहीं मिला है।