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Moradabad News: जाम्भाणी साहित्य अकादमी का पांच दिवसीय विशेष शिविर संपन्न
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कांठ। मोहल्ला विशनपुरा स्थित श्री बिश्नोई मंदिर में जाम्भाणी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित पांच दिवसीय जाम्भाणी संस्कार शिविर का रविवार को समापन हो गया। शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बिश्नोई समाज के बच्चों को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
17 जून से आयोजित विशेष शिविर में बच्चों को उनके भीतर नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं गुरु जाम्भोजी के आदर्शों, भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण व 29 नियमों के पालक आदि के प्रति जागरूक किया गया। रविवार को शिविर समापन पर सुबह योगाचार्य सुभाष राजस्थान ने बच्चों को योगासन कराए। इसके बाद बिश्नोई संतों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए जाम्भाणी परंपरा के अनुसार 120 शब्दों से हवन, कलश एवं पाहल कराया और अंत में प्रसाद वितरित किया गया।
इसके बाद कार्यक्रम में जाम्भाणी साहित्य अकादमी के मुख्य उद्देश्य और भगवान श्री गुरु जम्भेश्वर जी के द्वारा दिए गए संदेशों की जानकारी दी गई। जाम्भाणी संस्कार शिविर में आध्यात्मिका बिश्नोई ने पहला, मंतव्य बिश्नोई ने दूसरा और आरुषि बिश्नोई ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। तीनों को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। अन्य बच्चों को प्रशस्ति-पत्र दिए गए। संचालन राजकुमार सेवक ने किया। इस अवसर पर आचार्य सत्यदेवानंद महाराज, संत स्वामी जगदेवानंद महाराज, संत स्वामी ऋषिदानंद महाराज, संत राजूराम महाराज, कुंवर सुरेंद्र सिंह बिश्नोई, सीपी सिंह बियनोई, डॉ. ओमराज सिंह, राजकुमार सेवक, विकास बिश्नोई व विश्वबंधु बिश्नोई आदि मौजूद रहे।
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17 जून से आयोजित विशेष शिविर में बच्चों को उनके भीतर नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं गुरु जाम्भोजी के आदर्शों, भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण व 29 नियमों के पालक आदि के प्रति जागरूक किया गया। रविवार को शिविर समापन पर सुबह योगाचार्य सुभाष राजस्थान ने बच्चों को योगासन कराए। इसके बाद बिश्नोई संतों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए जाम्भाणी परंपरा के अनुसार 120 शब्दों से हवन, कलश एवं पाहल कराया और अंत में प्रसाद वितरित किया गया।
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इसके बाद कार्यक्रम में जाम्भाणी साहित्य अकादमी के मुख्य उद्देश्य और भगवान श्री गुरु जम्भेश्वर जी के द्वारा दिए गए संदेशों की जानकारी दी गई। जाम्भाणी संस्कार शिविर में आध्यात्मिका बिश्नोई ने पहला, मंतव्य बिश्नोई ने दूसरा और आरुषि बिश्नोई ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। तीनों को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। अन्य बच्चों को प्रशस्ति-पत्र दिए गए। संचालन राजकुमार सेवक ने किया। इस अवसर पर आचार्य सत्यदेवानंद महाराज, संत स्वामी जगदेवानंद महाराज, संत स्वामी ऋषिदानंद महाराज, संत राजूराम महाराज, कुंवर सुरेंद्र सिंह बिश्नोई, सीपी सिंह बियनोई, डॉ. ओमराज सिंह, राजकुमार सेवक, विकास बिश्नोई व विश्वबंधु बिश्नोई आदि मौजूद रहे।
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