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उत्तराखंड से पैदल गाजीपुर बार्डर के लिए चले किसान मुरादाबाद पहुंचे
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उत्तराखंड से पैदल मार्च कर अपने तीन अन्य साथियों के साथ गाजीपुर बॉर्डर जाते उत्तराखंड के किसान।
मुरादाबाद। किसान बिल वापस कराने की मांग पर गाजीपुर बार्डर पर धरना दे रहे किसानों की हौसला अफजाई करने तथा सरकार को किसानों के दर्द का संदेश देने के लिए उत्तराखंड के रुद्रपुर से किसान सतपाल सिंह ठुकराल अपने तीन अन्य किसान साथियों के साथ पैदल धरना स्थल जा रहे हैं। गुरुवार दोपहर वह यहां मुरादाबाद पहुंचे।
शाम करीब पांच बजे उनकी पैदल यात्रा दिल्ली रोड स्थित मझोली पहुंची। पांच दिन की पैदल यात्रा के बाद भी उनके चेहरे पर किसी तरह की कोई थकान नजर नहीं आई। उन्होंने बताया कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ वह पैदल यात्रा पर निकले है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को काले कानूनों की संज्ञा देते हुए कहा कि इसे लाकर किसानों को गिरवी रखने का काम सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में अब तक 750 से ज्यादा किसान शहीद हो गए हैं और बहुत किसान घायल भी हुए हैं। आज पूरे देश में किसान आंदोलन कर रहा है। किसान अपनी खेती बचाने के लिए लड़ रहा है और सरकार कारपोरेट की गुलामी कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह काले कृषि कानून किसानों के हित में नहीं हैं। इससे खेती किसान और देश की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि तत्काल इस काले कानून को वापस लिया जाए। किसानों से बात की जाए। उन्होंने कहा की ईवीएम मशीन का भी वह विरोध करेंगे और इसके लिए वे जनता को जागरूक करेंगे और बैलेट से चुनाव कराने की मांग भी करेंगे।
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यात्रा की गाजीपुर बार्डर पर धरना दे रहे किसानों के बीच जाकर समाप्त होगी। उसेक बाद वह गुरुद्वारा शीशगंज साहब जाकर शहीद हुए किसानों के लिए अरदास करेंगे। सरकार की बुद्धि शुद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना करेंगे। इस मौके पर उनके साथ परविंदर सिंह, उज्जवल ठुकराल और जगजीत सिंह आदि भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि जहां रात हो जाती है उसी गांव के किसानों के बीच में वह रुक जाते हैं। यात्रा के दौरान भी वह किसानों को जागरूक करते चल रहे हैं।
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शाम करीब पांच बजे उनकी पैदल यात्रा दिल्ली रोड स्थित मझोली पहुंची। पांच दिन की पैदल यात्रा के बाद भी उनके चेहरे पर किसी तरह की कोई थकान नजर नहीं आई। उन्होंने बताया कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ वह पैदल यात्रा पर निकले है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को काले कानूनों की संज्ञा देते हुए कहा कि इसे लाकर किसानों को गिरवी रखने का काम सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में अब तक 750 से ज्यादा किसान शहीद हो गए हैं और बहुत किसान घायल भी हुए हैं। आज पूरे देश में किसान आंदोलन कर रहा है। किसान अपनी खेती बचाने के लिए लड़ रहा है और सरकार कारपोरेट की गुलामी कर रही है।
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उन्होंने कहा कि यह काले कृषि कानून किसानों के हित में नहीं हैं। इससे खेती किसान और देश की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि तत्काल इस काले कानून को वापस लिया जाए। किसानों से बात की जाए। उन्होंने कहा की ईवीएम मशीन का भी वह विरोध करेंगे और इसके लिए वे जनता को जागरूक करेंगे और बैलेट से चुनाव कराने की मांग भी करेंगे।
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यात्रा की गाजीपुर बार्डर पर धरना दे रहे किसानों के बीच जाकर समाप्त होगी। उसेक बाद वह गुरुद्वारा शीशगंज साहब जाकर शहीद हुए किसानों के लिए अरदास करेंगे। सरकार की बुद्धि शुद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना करेंगे। इस मौके पर उनके साथ परविंदर सिंह, उज्जवल ठुकराल और जगजीत सिंह आदि भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि जहां रात हो जाती है उसी गांव के किसानों के बीच में वह रुक जाते हैं। यात्रा के दौरान भी वह किसानों को जागरूक करते चल रहे हैं।