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Moradabad News: मंडल में जन्म ले रहे हर छठे शिशु का वजन 2.5 किलो से कम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 02 Dec 2025 02:30 AM IST
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Every sixth baby born in the region weighs less than 2.5 kg.
मुरादाबाद। बिलारी के शरीफ नगर निवासी उस्मान की पत्नी शबाना बेगम ने तीन दिन पहले बेेटे को जन्म दिया। कुछ देर बाद ही बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो उसे एसएनसीयू में रखा गया। बच्चे का वजन लगभग दो किलोग्राम था। ये तो सिर्फ उदाहरण है, चिंता की बात ये है कि अकेले उस्मान का बेटा नहीं, मुरादाबाद मंडल में जन्म लेने वाले हर छठे बच्चे का वजन 2.5 किलो से कम है। ये खुलासा यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में हुआ है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक मुताबिक नवजात शिशु का वजन 2.5 के 2.8 किलो तक होना चाहिए। अप्रैल से अक्तूबर 2025 तक मंडल के पांच जिलों मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, संभल व बिजनौर में 54989 बच्चों ने जन्म लिया है। इनमें से 8705 यानी 16 प्रतिशत बच्चे कम वजन वाले पैदा हुए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक गर्भावस्था में महिला को सही पोषण न मिल पाना, इसकी मुख्य वजह है। ऐसे बच्चों में चार से पांच साल की उम्र तक कुपोषण का खतरा रहता है। अक्तूबर में कम वजन वाले 521 बच्चों को विभिन्न कारणों से स्पेशल निओनेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) में रखना पड़ा है। हर दिन महिला अस्पताल में सात से आठ महिलाएं कंगारू मदर केयर थैरेपी के लिए बच्चों को लाती हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में कम वजन वाले नवजात बच्चों की संख्या अधिक है। डॉक्टरों का मानना है कि अशिक्षा व जागरूकता की कमी के कारण कई बार दो माह तक महिलाओं को पता ही नहीं चलता कि वह गर्भवती हैं। पोषण ठीक से न मिल पाना ही नवजातों के कम वजन का मूल कारण है।
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ऑक्सीजन की कमी बुखार, पीलिया व निमोनाइटिस का खतरा
महिला अस्पताल की डॉक्टर के मुताबिक कम वजन वाले बच्चों में सबसे ज्यादा खतरा ऑक्सीजन लेवल कम होने का रहता है। इसके अलावा बुखार, पीलिया, निमोनाइटिस का खतरा भी रहता है। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में भी कम वजन की समस्या रहती है। इनमें अपरिपक्व फेफड़ों के कारण श्वसन से संबंधित सिड्रोम से जूझना पड़ सकता है। शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने में परेशानी होती है। नेक्रोटाइजिंग एंटरीकोलाइटिस (आंत का गंभीर रोग) का खतरा भी रहता है।

मंडल के जिलों में कम वजन वाले बच्चों का आंकड़ा
जिला कुल जन्मे बच्चे कम वजन वाले बच्चे
मुरादाबाद 9085 1424
रामपुर 11144 1783
संभल 15306 2493
अमरोहा 8208 1330
बिजनौर 11246 1675

वर्जन
एंटी नेटल केयर में लापरवाही लो बर्थ वेट का मुख्य कारण है। ऐसे बच्चों की माताओं की काउंसलिंग की जाती है। उन्हें बच्चे को दूध पिलाने से लेकर अपनी डाइट का ध्यान रखने के लिए जरूरी टिप्स दिए जाते हैं। यदि बच्चे के सभी वाइटल ठीक हों तो भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती।

- डॉ. संजीव बेलवाल, डिप्टी सीएमओ


नवजात शिशु का सामान्य वजन 2.5 किलो से अधिक होना चाहिए। जन्म के छह माह बाद उसका वजन दोगुना हो जाना चाहिए। माताएं हर दो घंटे में, खासकर रात में शिशु को स्तनपान जरूर कराएं। अपनी डाइट में अंडे, पनीर, दूध, हरी सब्जियां शामिल करें।
- डॉ. अवनीश कुमार सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ


-डॉ. रवि गंगल, बाल रोग विशेषज्ञ
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