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दिल का हर पांचवां मरीज निकल रहा कोरोना संक्रमित

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 26 Nov 2020 02:26 AM IST
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Every fifth patient of the heart is infected with corona
मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण के दौर में बदलते मौसम में गिरते तापमान के बीच दिल के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। एक ओर तापमान गिर रहा है तो दूसरी ओर कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है। न्यूनतम तापमान लुढ़क कर नौ डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। वहीं अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। कोरोना काल में यह मौसम दिल के मरीजाें के लिए मुश्किलों भरा है। वजह साफ है कि सत्तर फीसदी हार्ट अटैक के मामले इसी मौसम में सामने आते हैं। वहीं इन दिनों दिल का दौरा पड़ने पर डाक्टरों के पास पहुंचने वाले बीस फीसदी मरीज कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं।
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डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना काल में बढ़ती ठंड दिल के मरीजों के लिए खतरे की घंटी है। इस मौसम में शरीर बाहरी वातावरण में ढलने की कोशिश करता है, लेकिन ऐसा तुरंत नहीं हो पाता है। शरीर को ढलने में वक्त लगता है। ऐसे में शरीर की रक्त कोशिकाएं सिकुड़ जातीं हैं। इस दौरान दिल की रफ्तार बढ़ने लगती है। यही हार्ट मरीजों के लिए खतरनाक साबित होता है। तापमान में गिरावट के साथ ही ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इसका असर सरकारी और प्राइवेट अस्पतालाें की ओपीडी में देखने को भी मिल रहा है।
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कोविड, डेंगू, हार्ट की समस्या एक साथ
मुरादाबाद। हृदय रोग विशेषज्ञ डा. अनुराग मेहरोत्रा का कहना है कि कोरोना संक्रमण का दौर जारी है। इस बदलते मौसम में कोविड, डेंगू और हार्ट का काकटेल भी देखने को मिल रहा है। कोरोना ब्रेन, हार्ट, किडनी और फेफड़ों पर अटैक कर रहा है। हार्ट अटैक के बीस फीसदी मरीज कोरोना पॉजिटिव निकल रहे हैं। ऐसे में हार्ट, ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को सावधानी बरतनी चाहिए। दिल के मरीज मौसम के हिसाब से दवाओं में बदलाव करा लें।
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यह बनती हैं हार्ट अटैक की वजह
मुरादाबाद। ठंड के मौसम में शरीर को वातावरण के अनुरूप ढलने में वक्त लगता है। ऐसे में रक्त कोशिकाएं सिकुड़ जातीं हैं। खून का प्रवाह ठीक ढंग से नहीं हो पाता है। जबकि हृदय की गति बढ़ जाती है। इसके चलते दिल पर अधिक जोर पड़ता है।
डाक्टरों की सलाह
- बाहर से आने वाले लोगों से बिना मास्क न मिलें
- दिल केमरीज भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें
- शादी पार्टियों में भी न जाएं
- हार्ट की दवा लगातार खाते रहें
- बीपी की दवाइयां बदलवा लें
- अस्थमा के मरीज दवा हमेशा अपने पास रखें
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराते रहें
- डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवाओं का सेवन करें
- सुबह ठंडे पानी से न नहाएं
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