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सहनशीलता के साथ क्षमा अपनाने से जीवन में आती है शांति: आचार्य भद्रबाहु सागर
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मुरादाबाद। पर्यूषण महापर्व के तहत रामगंगा विहार स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को उत्तम क्षमा धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। सुबह भगवान श्रीजी का प्रथम अभिषेक और शांतिधारा विधि-विधान से हुई। इसके बाद विधानाचार्य राजकुमार जैन पंडित ने पूजा विधान कराया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लेकर भगवान की आराधना की।
मंदिर में विराजमान आचार्य भद्रबाहु सागर ने उत्तम क्षमा धर्म के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि क्षमा दस धर्मों में सबसे पहले आता है। इसे जीवन में आत्मसात करना चाहिए। क्षमा कोई वस्तु नहीं है, जिसे खरीदा जा सके। इसे हृदय से धारण करना पड़ता है। मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखते हुए हृदय को कोमल और निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए। सहनशीलता के साथ क्षमा का भाव अपनाने से जीवन में शांति आती है और हृदय कमल की तरह खिल उठता है।
पूजा विधान के दौरान मंडल पर मुख्य कलश की स्थापना की गई। अन्य कलश, अखंड ज्योति और शास्त्र जी को भी विधि-विधान से विराजमान कराया गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। शाम सात बजे संगीत के साथ भगवान की आरती हुई। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए आरती में शामिल हुए। मंदिर परिसर भक्तों की भक्ति और जयकारों से गूंज उठा। इस मौके पर मंदिर समिति अध्यक्ष संदीप जैन, मंत्री नीरज जैन, उपाध्यक्ष सजल जैन, कोषाध्यक्ष विकास जैन, सर्वोदय जैन, राहुल जैन, संजू जैन, प्रवेश जैन, महिला अध्यक्ष सुषमा जैन, उप मंत्री श्रुति जैन, कोषाध्यक्ष रीमा जैन, उषा जैन, रजनी जैन आदि मौजूद रहे।
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मंदिर में विराजमान आचार्य भद्रबाहु सागर ने उत्तम क्षमा धर्म के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि क्षमा दस धर्मों में सबसे पहले आता है। इसे जीवन में आत्मसात करना चाहिए। क्षमा कोई वस्तु नहीं है, जिसे खरीदा जा सके। इसे हृदय से धारण करना पड़ता है। मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखते हुए हृदय को कोमल और निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए। सहनशीलता के साथ क्षमा का भाव अपनाने से जीवन में शांति आती है और हृदय कमल की तरह खिल उठता है।
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पूजा विधान के दौरान मंडल पर मुख्य कलश की स्थापना की गई। अन्य कलश, अखंड ज्योति और शास्त्र जी को भी विधि-विधान से विराजमान कराया गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। शाम सात बजे संगीत के साथ भगवान की आरती हुई। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए आरती में शामिल हुए। मंदिर परिसर भक्तों की भक्ति और जयकारों से गूंज उठा। इस मौके पर मंदिर समिति अध्यक्ष संदीप जैन, मंत्री नीरज जैन, उपाध्यक्ष सजल जैन, कोषाध्यक्ष विकास जैन, सर्वोदय जैन, राहुल जैन, संजू जैन, प्रवेश जैन, महिला अध्यक्ष सुषमा जैन, उप मंत्री श्रुति जैन, कोषाध्यक्ष रीमा जैन, उषा जैन, रजनी जैन आदि मौजूद रहे।
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