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मोहब्बत और कौमी एकता का पैगाम है वारिसे पाक की तालीम: मुफ्ती शफीक
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मुरादाबाद। महफिले जिक्रे सरकार वारिसे पाक में मोहब्बत, इंसानियत और कौमी एकता को लेकर पैगाम दिए गए। मुंबई से आए मुफ्ती शफीक हनफी कादरी ने अपनी तकरीर में कहा कि वारिसे पाक का फरमान है कि जो उनसे मोहब्बत करता है वह उनका है चाहे वह किसी भी कौम का हो। अगर दुनिया इस पैगाम को अपना ले तो दुनिया एक खूबसूरत मोहब्बत का गुलदस्ता बन जाए। उन्होंने कहा वारिसे पाक को कौमी एकता का इमाम भी कहा जाता है। चक्कर की मिलक स्थित शाह बुलाकी की दरगाह पर गुलामाने सरकार वारिस पाक की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भारतीय सूफी फाउंडेशन के अध्यक्ष कशिश वारसी ने कहा कि वारिसे पाक के शिष्य अशफाकउल्ला खान वारसी ने देश पर जान न्यौछावर कर यह साबित किया कि सच्चा वारसी सिर्फ इबादत का नहीं बल्कि वफादारी और कुर्बानी का रास्ता चलने वाला होता है।
कार्यक्रम का आगाज हाफिज मो. अली वारसी ने कुरआन की तिलावत के साथ किया। इसके बाद नातख्वानों और शायरों ने अपने कलाम से महफिल में नई ऊर्जा भरी। शाहनवाज, अकदस वारसी, अमीन वारिस, नसीम और कशिश वारसी ने नात पढ़ा जिसके बाद वसीम अल्वी ने अपनी शायरी से मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम दिया। भोपाल से आए प्रख्यात कव्वाल हाजी सैयद मुकर्रम अली ने अपने साथियों के साथ कलाम पेश कर महफिल को रूहानी रंग में भर दिया। उन्होंने अपने मौला पे दिलो-जान से कुर्बान हूं मैं, अबू तालिब के घराने का मुसलमान हूं मैं। की कव्वाली प्रस्तुत की जिसपर अकीदतमंद झूमते हुए नजर आए।
आखिर में वारिसे पाक की नज्र दिलाई गई और तबर्रुक का वितरण किया गया। इस मौके पर हैदर अली, फैसल, अनस, उबैद, शादाब, समीर, अल्तमश, निहाल, दानिश, नाजिम, दानिश मंसूरी, पामिश, अदीब, हसन, अब्दुल और मो. अली समेत कई लोग मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का आगाज हाफिज मो. अली वारसी ने कुरआन की तिलावत के साथ किया। इसके बाद नातख्वानों और शायरों ने अपने कलाम से महफिल में नई ऊर्जा भरी। शाहनवाज, अकदस वारसी, अमीन वारिस, नसीम और कशिश वारसी ने नात पढ़ा जिसके बाद वसीम अल्वी ने अपनी शायरी से मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम दिया। भोपाल से आए प्रख्यात कव्वाल हाजी सैयद मुकर्रम अली ने अपने साथियों के साथ कलाम पेश कर महफिल को रूहानी रंग में भर दिया। उन्होंने अपने मौला पे दिलो-जान से कुर्बान हूं मैं, अबू तालिब के घराने का मुसलमान हूं मैं। की कव्वाली प्रस्तुत की जिसपर अकीदतमंद झूमते हुए नजर आए।
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आखिर में वारिसे पाक की नज्र दिलाई गई और तबर्रुक का वितरण किया गया। इस मौके पर हैदर अली, फैसल, अनस, उबैद, शादाब, समीर, अल्तमश, निहाल, दानिश, नाजिम, दानिश मंसूरी, पामिश, अदीब, हसन, अब्दुल और मो. अली समेत कई लोग मौजूद रहे।
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