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Moradabad News: सौ मीटर की दूरी पर बिजली घर....बत्ती फिर भी नहीं नारायणपुर में
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मुरादाबाद। लाइनपार क्षेत्र का मानपुर नारायणपुर भले ही कई सालों से महानगर का हिस्सा हो लेकिन यहां अभी करीब पचास घरों की एक बस्ती ऐसी है, जो विद्युत उपकेंद्र से सौ मीटर दूर होने के बाद भी बिजली के लिए परेशान है। अभी तक लाइन ही नहीं बिछी है। यहां के लोग सोलर पैनल पर निर्भर हैं। गलियां कच्ची हैं, सीवर है ही नहीं।
शहर में शामिल मानपुर नारायण का क्षेत्र किसी पिछड़े गांव से भी बदहाल लगता है। सूर्यनगर से बस्ती की ओर मुख्य रास्ता जाता है जो ढक्का रोड से मिलता है। इसमें सूर्यनगर की ओर आधे रास्ते तक तो नालियां बनी हैं लेकिन आगे की नाली बनाई ही नहीं है। जिसके कारण यहां की जलनिकासी कहीं नहीं हो रही है। घरों से दैनिक उपयोग का जो पानी निकलता है वह आसपास के इलाकों में ही भरता है। नालियां बनी ही नहीं है, जिसके कारण अधिकतर सड़कों के किनारे जलभराव जैसी स्थिति है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां करीब पचास घरों में बिजली ही नहीं है, आज के दौर में बिना बिजली के जीवन कितना कठिन होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। मोबाइल फोन भी चार्ज करने के लिए सोलर पैनल की सहायता लेनी पड़ती है या फिर दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ता है।
बिजली तो बहुत जरूरी है
- आजकल बिना बिजली के जिंदगी कितनी कठिन है, आसानी से समझा जा सकता है, यह बस्ती तो बिजली घर से सटी हुई है, फिर भी कनेक्शन नहीं है।
कुसुम लता
-- -
कम से कम नालियां तो बनें
- सूर्यनगर से आने वाले मुख्य रास्ते पर आधी दूरी तक नालियां बनाकर छोड़ दीं हैं, जिससे इस क्षेत्र की जल निकासी होती ही नहीं है।
किशन लाल सैनी
--
पड़ोस में सड़कें व बिजली भी
- इस बस्ती के कुछ ही दूर आगे एक जनप्रतिनिधि का प्लॉट है, वहां सड़कें भी बन रही हैं, बिजली भी है, तो इस बस्ती को क्यों छोड़ दिया गया है।
सुंदर लाल
--
बारिश में होता है जलभराव
- यह इलाका इतना नीचा है, कि थोड़ी सी बारिश होने पर यहां कई फुट तक पानी भर जाता है, जिसे निकलने में भी समय लग जाता है, समस्या का समाधान होना चाहिए।
जयपाल
--
नाला पास में फिर भी सीवर नहीं
- नगर निगम ने यहां तो सीवर की पाइप लाइन ही अभी तक नहीं डाली है, इसलिए यहां की जल निकासी का कोई जरिया नहीं, जबकि पास से बड़ा नाला बहता है।
प्रेमचंद्र
--
फोन की बैट्री चार्ज करना मुश्किल
- बिना मोबाइल फोन के तो आजकल कोई घर नहीं है, बिना बिजली के तो फोन की बैट्री चार्ज करना भी मुश्किल होता है, बिजली कनेक्शन अतिशीघ्र मिलने चाहिए।
शिवा ठाकुर
--
बिजली घर के पास, फिर बिजली नहीं
- हमारी बस्ती से बिजली घर की दूरी अधिकतम करीब 100 मीटर ही है, फिर भी अभी तक यह फासला दूर नहीं हो सके, हम बिना बिजली के रहने को विवश हैं।
ताराचंद्र
--
एक भी गली पक्की नहीं
- मुख्य रोड से एक भी गली पक्की नहीं है, जिसके कारण नालियां भी नहीं हैं, यह इलाका काफी निचला है, इसलिए घर ऊंचे बने हैं, जिससे बड़ी दिक्कत है।
निर्दोष शर्मा
--
सफाई होती ही नहीं
- सड़कें व नालियां हैं ही नहीं तो सफाई कर्मचारी यहां आते ही नहीं, जितना भी कचरा निकलता है, यहीं पर पड़ा रहता है, जिससे चारों ओर गंदगी है।
सचिन
--
गलियां अंधेरे में डूबी रहती हैं
आधी बस्ती में जिस तरफ बिजली है, वहीं स्ट्रीट लाइटें भी हैं लेकिन यहां बिजली न होने के कारण स्ट्रीट लाइट भी नहीं है, जिससे अंधेरा रहता है।
अजय चौहान
--
शिकायत के बाद भी कोई नहीं सुनता
- कई बार नगर निगम के अधिकारियों से भी गुहार लगाई लेकिन कोई अधिकारी कभी यहां स्थिति देखने तक नहीं आया, सभी दिक्कतें झेलने को विवश हैं।
विजेंद्र सिंह
--
पार्षद ने भी नहीं सुना
- यह क्षेत्र वार्ड 53 के तहत आता है, पार्षद के आवास पर जाकर कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, न सड़कें बनी और न ही गलियां।
संजय सैनी
-- -
वर्जन
कई निजी कॉलोनियां जो नगर निगम या एमडीए में पंजीकृत नहीं हैं, वहां बिजली कनेक्शन के लिए लोगों को एस्टीमेट बनाकर दिया जाता है। लाइन खिंचने से लेकर खंभे लगाने और कनेक्शन करने तक का खर्च लोगों को वहन करना पड़ता है। इसके बाद ही कनेक्शन दिया जाता है। लोग यदि खर्च वहन करने को तैयार हैं तो एस्टीमेट बनवा सकते हैं।
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- प्रशांत कुमार, अधीक्षण अभियंता
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शहर में शामिल मानपुर नारायण का क्षेत्र किसी पिछड़े गांव से भी बदहाल लगता है। सूर्यनगर से बस्ती की ओर मुख्य रास्ता जाता है जो ढक्का रोड से मिलता है। इसमें सूर्यनगर की ओर आधे रास्ते तक तो नालियां बनी हैं लेकिन आगे की नाली बनाई ही नहीं है। जिसके कारण यहां की जलनिकासी कहीं नहीं हो रही है। घरों से दैनिक उपयोग का जो पानी निकलता है वह आसपास के इलाकों में ही भरता है। नालियां बनी ही नहीं है, जिसके कारण अधिकतर सड़कों के किनारे जलभराव जैसी स्थिति है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां करीब पचास घरों में बिजली ही नहीं है, आज के दौर में बिना बिजली के जीवन कितना कठिन होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। मोबाइल फोन भी चार्ज करने के लिए सोलर पैनल की सहायता लेनी पड़ती है या फिर दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ता है।
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बिजली तो बहुत जरूरी है
- आजकल बिना बिजली के जिंदगी कितनी कठिन है, आसानी से समझा जा सकता है, यह बस्ती तो बिजली घर से सटी हुई है, फिर भी कनेक्शन नहीं है।
कुसुम लता
कम से कम नालियां तो बनें
- सूर्यनगर से आने वाले मुख्य रास्ते पर आधी दूरी तक नालियां बनाकर छोड़ दीं हैं, जिससे इस क्षेत्र की जल निकासी होती ही नहीं है।
किशन लाल सैनी
पड़ोस में सड़कें व बिजली भी
- इस बस्ती के कुछ ही दूर आगे एक जनप्रतिनिधि का प्लॉट है, वहां सड़कें भी बन रही हैं, बिजली भी है, तो इस बस्ती को क्यों छोड़ दिया गया है।
सुंदर लाल
बारिश में होता है जलभराव
- यह इलाका इतना नीचा है, कि थोड़ी सी बारिश होने पर यहां कई फुट तक पानी भर जाता है, जिसे निकलने में भी समय लग जाता है, समस्या का समाधान होना चाहिए।
जयपाल
नाला पास में फिर भी सीवर नहीं
- नगर निगम ने यहां तो सीवर की पाइप लाइन ही अभी तक नहीं डाली है, इसलिए यहां की जल निकासी का कोई जरिया नहीं, जबकि पास से बड़ा नाला बहता है।
प्रेमचंद्र
फोन की बैट्री चार्ज करना मुश्किल
- बिना मोबाइल फोन के तो आजकल कोई घर नहीं है, बिना बिजली के तो फोन की बैट्री चार्ज करना भी मुश्किल होता है, बिजली कनेक्शन अतिशीघ्र मिलने चाहिए।
शिवा ठाकुर
बिजली घर के पास, फिर बिजली नहीं
- हमारी बस्ती से बिजली घर की दूरी अधिकतम करीब 100 मीटर ही है, फिर भी अभी तक यह फासला दूर नहीं हो सके, हम बिना बिजली के रहने को विवश हैं।
ताराचंद्र
एक भी गली पक्की नहीं
- मुख्य रोड से एक भी गली पक्की नहीं है, जिसके कारण नालियां भी नहीं हैं, यह इलाका काफी निचला है, इसलिए घर ऊंचे बने हैं, जिससे बड़ी दिक्कत है।
निर्दोष शर्मा
सफाई होती ही नहीं
- सड़कें व नालियां हैं ही नहीं तो सफाई कर्मचारी यहां आते ही नहीं, जितना भी कचरा निकलता है, यहीं पर पड़ा रहता है, जिससे चारों ओर गंदगी है।
सचिन
गलियां अंधेरे में डूबी रहती हैं
आधी बस्ती में जिस तरफ बिजली है, वहीं स्ट्रीट लाइटें भी हैं लेकिन यहां बिजली न होने के कारण स्ट्रीट लाइट भी नहीं है, जिससे अंधेरा रहता है।
अजय चौहान
शिकायत के बाद भी कोई नहीं सुनता
- कई बार नगर निगम के अधिकारियों से भी गुहार लगाई लेकिन कोई अधिकारी कभी यहां स्थिति देखने तक नहीं आया, सभी दिक्कतें झेलने को विवश हैं।
विजेंद्र सिंह
पार्षद ने भी नहीं सुना
- यह क्षेत्र वार्ड 53 के तहत आता है, पार्षद के आवास पर जाकर कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, न सड़कें बनी और न ही गलियां।
संजय सैनी
वर्जन
कई निजी कॉलोनियां जो नगर निगम या एमडीए में पंजीकृत नहीं हैं, वहां बिजली कनेक्शन के लिए लोगों को एस्टीमेट बनाकर दिया जाता है। लाइन खिंचने से लेकर खंभे लगाने और कनेक्शन करने तक का खर्च लोगों को वहन करना पड़ता है। इसके बाद ही कनेक्शन दिया जाता है। लोग यदि खर्च वहन करने को तैयार हैं तो एस्टीमेट बनवा सकते हैं।
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- प्रशांत कुमार, अधीक्षण अभियंता