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चंदौसी-बरेली रेलमार्ग पर जल्द दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेनें
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मुरादाबाद। चंदौसी-बरेली रेलमार्ग पर अब जल्द इलेक्ट्रिक ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। विद्युतीकरण का कार्य पूरा होने के बाद रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है। अब रेल प्रशासन को रेलवे बोर्ड की ओर से हरी झंडी मिलने का इंतजार है।
मुरादाबाद से चंदौसी तक रेल लाइन का विद्युतीकरण मार्च 2018 में पूरा हो चुका है। इसके बाद मार्च 2019 में चंदौसी से आंवला तक विद्युतीकरण का काम पूरा हो गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त शैलेश कुमार पाठक के निरीक्षण के बाद आंवला तक इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने की अनुमति दी थी, लेकिन बरेली तक विद्युतीकरण पूरा न होने के कारण मुरादाबाद से चंदौसी होकर बरेली के ट्रेन का संचालन नहीं हो पाया है। दरअसल सितंबर 2020 में सीआरएस निरीक्षण में आंवला से बरेली के बीच विद्युतीकरण में काफी कमियां पाईं गईं थीं। जिन्हें तीस दिन के भीतर दूर करने के आदेश दिए गए थे। जब निर्धारित समय पर कार्य पूरा नहीं हो सका तो सीआरएस ने फाइल रेलवे बोर्ड को भेज दी। पिछले दिनों काम पूरा करने के बाद आंवला से बरेली के बीच विद्युतीकरण की समीक्षा के लिए रेलवे बोर्ड को रिपोर्ट भेजी गई है। रेल प्रशासन का कहना है कि रेलवे बोर्ड की अनुमति मिलने के बाद इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।
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मुरादाबाद से चंदौसी तक रेल लाइन का विद्युतीकरण मार्च 2018 में पूरा हो चुका है। इसके बाद मार्च 2019 में चंदौसी से आंवला तक विद्युतीकरण का काम पूरा हो गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त शैलेश कुमार पाठक के निरीक्षण के बाद आंवला तक इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने की अनुमति दी थी, लेकिन बरेली तक विद्युतीकरण पूरा न होने के कारण मुरादाबाद से चंदौसी होकर बरेली के ट्रेन का संचालन नहीं हो पाया है। दरअसल सितंबर 2020 में सीआरएस निरीक्षण में आंवला से बरेली के बीच विद्युतीकरण में काफी कमियां पाईं गईं थीं। जिन्हें तीस दिन के भीतर दूर करने के आदेश दिए गए थे। जब निर्धारित समय पर कार्य पूरा नहीं हो सका तो सीआरएस ने फाइल रेलवे बोर्ड को भेज दी। पिछले दिनों काम पूरा करने के बाद आंवला से बरेली के बीच विद्युतीकरण की समीक्षा के लिए रेलवे बोर्ड को रिपोर्ट भेजी गई है। रेल प्रशासन का कहना है कि रेलवे बोर्ड की अनुमति मिलने के बाद इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।
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