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बुजुर्गों-दिव्यांगों ने दिखाया हौसला, बूथ पर जाकर ही मतदान का किया फैसला
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अगवानपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने इस बाद 80 साल से अधिक उम्र वाले वयोवृद्ध और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए घर में ही मतदान करवाने का आदेश दिए हैं। इसके तहत शनिवार को निर्वाचन टीमें घर-घर जाकर बुजुर्गों और दिव्यांगों को वोट डलवाए। इससे इतर अगवानपुर में 80 साल से अधिक उम्र वाले वयोवृद्ध और विकलांग युवकों ने हौसला दिखाते हुए खुद मतदान केंद्रों तक जाने और पसंदीदा प्रत्याशी के हक में वोट करने का फैसला लिया है।। उनकी मतदान का जज्बा क्षेत्र में सुर्खियां बटोर रहा है।
कांठ विधानसभा की नगर पंचायत अगवानपुर के बुजुर्ग और विकलांग मतदाता ने चुनाव आयोग की घर बैठे वोटिंग कराने वाली सुविधा को ठीक बताते हैं, मगर खुद उन्होंने पोलिंग बूथ पर जाकर ही मतदान करने का फैसला किया है। वह चलने फिरने की असमर्थता को अपने वोट की कमजोरी नही बनाना चाहते। वह अपने हौसले की बदौलत मतदान स्थल पर ही वोटिंग का मन बना चुके है। उनके मजबूत इरादे को उनकी कमजोरी भी नहीं तोड़ सकती। उनके फैसले का उनके परिजन ने खुलकर समर्थन कर रहे है। उनका फैसला नगर पंचायत की जनता के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
मेरे परिवार में तीन लोग विकलांग है। सभी लोगों के वोट भी आते है। हर बार मेरे पिता जी बारी बारी तीनों को कांधे पर बैठकर वोट डलवाने लेकर जाते है। इस बार भी ऐसा करेंगे। मुझसे क्षेत्र की बीएलओ ने आयोग की सुविधा के बारे में बताया था। लेकिन हमने उनसे मना कर दिया। हम हर दफा की तरह इस बार भी पिता के साथ मतदान स्थल पर ही वोटिंग करेंगे।
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मोहम्मद आलम, दिव्यांग
मेरी गैरमौजूदगी में कोई बीएलओ घर पर आई थी। मुझे आयोग से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी नहीं है। आयोग का हम सम्मान करते है, लेकिन अगर मुझसे कोई कहता तो मैं सुविधा लेने से इंकार कर देता। क्योंकि हम भी सभी लोगों की तरह मतदान वाले दिन वोटिंग करना चाहते हैं। इससे हमको भी अच्छा लगता है। अगर पहले वोटिंग कर देते हो मन में बहुत सारे सवाल खड़े हो जाते।
वसीम मंसूरी, दिव्यांग
परिजनों ने बताया था कि एक बीएलओ आयोग से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देकर गए हैं। मैंने अपने घर पर उनसे बात करने को मना कर दिया। हम अपनी इच्छा अनुसार उसी दिन मतदान केन्द्र पर वोटिंग करेंगे। मुझे भी सबके साथ वोटिंग करनी है। विकलांग होना कोई मजबूरी नहीं। दिल में जज्बा होना चाहिए।
प्रकाश सैनी, दिव्यांग
मेरे दिनों पैरों में दिक्कत है। ज्यादा दूर चल नही पाता हूं। मेरे घर से एक किलोमीटर बूथ है। इसके बावजूद वोट डालने जाऊंगा। अपनी इच्छा अनुसार वोट करूंगा। आयोग की सुविधाओं की जानकारी नहीं है। अगर होती तो भी नहीं लेता।
भूरा जाटव, दिव्यांग
100 साल के करीब उम्र हो गई। इस दौरान बहुत दफा वोट डालने गईं हूं। सैकड़ों लोगों की हार और जीत देखी है। दो साल पहले कूल्हे की हड्डी टूट गई थी, इसलिए चलने फिरने में असमर्थ हूं। वॉकर के सहारे चल लेती हूं। इस बार वोट डालने में दिक्कत होगी। लेकिन हिम्मत अभी उतनी ही है। पोते के सहारे वोट डालने वोटिंग स्थल पर ही जाऊंगी।
तरीफान, बुजुर्ग महिला
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कांठ विधानसभा की नगर पंचायत अगवानपुर के बुजुर्ग और विकलांग मतदाता ने चुनाव आयोग की घर बैठे वोटिंग कराने वाली सुविधा को ठीक बताते हैं, मगर खुद उन्होंने पोलिंग बूथ पर जाकर ही मतदान करने का फैसला किया है। वह चलने फिरने की असमर्थता को अपने वोट की कमजोरी नही बनाना चाहते। वह अपने हौसले की बदौलत मतदान स्थल पर ही वोटिंग का मन बना चुके है। उनके मजबूत इरादे को उनकी कमजोरी भी नहीं तोड़ सकती। उनके फैसले का उनके परिजन ने खुलकर समर्थन कर रहे है। उनका फैसला नगर पंचायत की जनता के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
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मेरे परिवार में तीन लोग विकलांग है। सभी लोगों के वोट भी आते है। हर बार मेरे पिता जी बारी बारी तीनों को कांधे पर बैठकर वोट डलवाने लेकर जाते है। इस बार भी ऐसा करेंगे। मुझसे क्षेत्र की बीएलओ ने आयोग की सुविधा के बारे में बताया था। लेकिन हमने उनसे मना कर दिया। हम हर दफा की तरह इस बार भी पिता के साथ मतदान स्थल पर ही वोटिंग करेंगे।
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मोहम्मद आलम, दिव्यांग
मेरी गैरमौजूदगी में कोई बीएलओ घर पर आई थी। मुझे आयोग से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी नहीं है। आयोग का हम सम्मान करते है, लेकिन अगर मुझसे कोई कहता तो मैं सुविधा लेने से इंकार कर देता। क्योंकि हम भी सभी लोगों की तरह मतदान वाले दिन वोटिंग करना चाहते हैं। इससे हमको भी अच्छा लगता है। अगर पहले वोटिंग कर देते हो मन में बहुत सारे सवाल खड़े हो जाते।
वसीम मंसूरी, दिव्यांग
परिजनों ने बताया था कि एक बीएलओ आयोग से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देकर गए हैं। मैंने अपने घर पर उनसे बात करने को मना कर दिया। हम अपनी इच्छा अनुसार उसी दिन मतदान केन्द्र पर वोटिंग करेंगे। मुझे भी सबके साथ वोटिंग करनी है। विकलांग होना कोई मजबूरी नहीं। दिल में जज्बा होना चाहिए।
प्रकाश सैनी, दिव्यांग
मेरे दिनों पैरों में दिक्कत है। ज्यादा दूर चल नही पाता हूं। मेरे घर से एक किलोमीटर बूथ है। इसके बावजूद वोट डालने जाऊंगा। अपनी इच्छा अनुसार वोट करूंगा। आयोग की सुविधाओं की जानकारी नहीं है। अगर होती तो भी नहीं लेता।
भूरा जाटव, दिव्यांग
100 साल के करीब उम्र हो गई। इस दौरान बहुत दफा वोट डालने गईं हूं। सैकड़ों लोगों की हार और जीत देखी है। दो साल पहले कूल्हे की हड्डी टूट गई थी, इसलिए चलने फिरने में असमर्थ हूं। वॉकर के सहारे चल लेती हूं। इस बार वोट डालने में दिक्कत होगी। लेकिन हिम्मत अभी उतनी ही है। पोते के सहारे वोट डालने वोटिंग स्थल पर ही जाऊंगी।
तरीफान, बुजुर्ग महिला