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Moradabad News: दिल्ली रोड पर दुष्यंत कुमार, जौन एलिया और जिगर मुरादाबादी सुनाएंगे रचनाएं

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2025 02:03 AM IST
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Dushyant Kumar, John Elia and Jigar Moradabadi will recite compositions on Delhi Road.
मुरादाबाद। कैसे आकाश में सूराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों...दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां अब सिर्फ किताबों में ही नहीं, बल्कि दिल्ली रोड पर चलते हुए भी सुनने को मिलेगी। साहित्य और रंगमंच प्रेमियों के लिए नगर निगम ने अनूठी पहल की है और दिल्ली रोड पर डिजिटल साहित्य पथ तैयार किया है। इस पथ पर दस डिजिटल पैनल बोर्ड लगाए गए हैं, जिसपर मंडल के साहित्यकारों की तमाम जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं। बोर्ड पर साहित्यकारों के बारे में जानकारी तो मिलेगी ही साथ ही इन साहित्यकारों की रचनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। निगम की इस पहल से शहरवासियों को मंडल के साहित्यकारों के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।
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नगर निगम की ओर से स्थापित इन डिजिटल बोर्डों पर मंडल के चार बड़े साहित्यकारों की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इसमें मुरादाबाद मंडल में जन्मे दुष्यंत कुमार, जौन एलिया, जिगर मुरादाबादी और उस्ताद साबरी खान शामिल हैं। बोर्ड पर इन साहित्यकारों के जन्म, मृत्यु, रचनाएं, सम्मान और किताबों के बारे में जानकारी डिजिटल माध्यम से प्रदर्शित हो रही है। साथ ही वीडियो में ये साहित्यकार अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते हुए भी नजर आ रहे हैं।
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इस साहित्य बोर्ड की मदद से निगम न सिर्फ साहित्यिक धरोहर को संरक्षित कर रहा है, बल्कि रात के समय साहित्य पथ की आकर्षक लाइटिंग से सड़क की खूबसूरती भी अलग रंग की नजर आ रही है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि आमतौर पर साहित्यकारों और रंगकर्मियों की मूर्तियां ही लगाई जाती हैं, लेकिन उनकी रचनाएं लोगों तक नहीं पहुंच पाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली रोड पर डिजिटल पथ बनाया गया है। यहां दस अलग-अलग डिजिटल पैनल पर मंडल के साहित्यकारों के बारे में और उनकी रचनाओं को प्रदर्शित किया जा रहा है।
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- सड़क पर चलते हुए सुनने को मिलेगी रचना
साहित्य डिजिटल पथ पर अभी डिजिटल माध्यम से ही रचनाएं प्रदर्शित की जा रही हैं, लेकिन जल्द ही इस तरह की व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे सड़क पर चलते हुए लोगों को इन साहित्यकारों की आवाज भी सुनने को मिलेगी। बोर्ड पर चलने वाले वीडियो को स्पीकर की मदद से सुनने योग्य भी बनाया जाएगा। इससे सड़क पर चलने वाले राहगीरों को एक अलग ही अहसास होगा।
यह शहर साहित्यिक और सांस्कृतिक इतिहास भी समेटे हुए है। डिजिटल पथ पर इसी धरोहर को जीवंत रखने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य शहरवासियों को साहित्य से जोड़ने और डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाने का है। निगम का प्रयास रहेगा कि इस तरह के और भी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योजनाओं को आगे बढ़ाया जाए। - दिव्यांशु पटेल, नगर आयुक्त

कौन हैं ये साहित्यकार
1. दुष्यंत कुमार
दुष्यंत कुमार का जन्म वर्ष 1931 में बिजनौर में हुआ था। उन्होंने मुरादाबाद से बीएड की डिग्री हासिल की थी। सूर्य का स्वागत, आवाजों के घेरे में, जलते हुए वन का वसंत जैसी उनकी काव्य रचनाएं खूब प्रसिद्ध हैं। वहीं, छोटे-छोटे सवाल, आंगन में एक वृक्ष, दुहरी जिंदगी जैसे उपन्यास, और मसीहा मर गया नामक प्रसिद्ध नाटक ने खूब लोकप्रियता बटोरी। 30 दिसंबर 1975 को उनका निधन हुआ, जिसके बाद भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया।

2. उस्ताद साबरी खान
साबरी खान का जन्म 1927 में मुरादाबाद में हुआ था। संगीत में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदेश सरकार ने 1990 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 1992 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। 2006 में भारत सरकार ने साबरी खान को कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया। वर्ष 2015 में साबरी खान का निधन हुआ।

3. जौन एलिया
अमरोहा में 1931 में जौन एलिया का जन्म हुआ। उन्होंने आठ वर्ष की उम्र में अपनी पहली कविता लिखी। उन्होंने साहित्यिक पत्रिका के संपादक के रूप में भी अपनी सेवाएं दी। 1957 में जौन एलिया पाकिस्तान चले गए। नवंबर 2002 में उनका निधन हो गया।


4. जिगर मुरादाबादी
जिगर मुरादाबादी का जन्म 1980 में मुरादाबाद में हुआ था। वह 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध उर्दू कवि और गजल के प्रमुख शायरों में से एक रहे। उनकी कविता संग्रह आतिश-ए-गुल के लिए उन्हें 1958 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया। जिगर मुरादाबादी का निधन 1960 में हुआ था।
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